टीम को अस्पताल में ब्लड बैंक मिला बंद, नशामुक्ति केंद्र का लाइसेंस भी नहीं मिला

Karnal News - नागरिक अस्पताल में बुधवार को एनक्वास (नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टेंडर्ड) की 7 सदस्यीय टीम ने दौरा किया। टीम की...

Nov 07, 2019, 08:06 AM IST
Karnal News - haryana news team found blood bank closed in hospital license of de addiction center not even
नागरिक अस्पताल में बुधवार को एनक्वास (नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टेंडर्ड) की 7 सदस्यीय टीम ने दौरा किया। टीम की नोडल ऑफिसर डिप्टी सीएमओ अंबाला डॉ. संगीता गोयल ने सदस्यों की अलग-अलग जगहों पर ड्यूटी लगाई और उन्होंने वहां की व्यवस्था का जायजा लिया। टीम के सदस्यों ने स्टाफ से बातचीत की। ओपीडी, इमरजेंसी, डिस्पेंसरी, वार्ड, लैब, एक्सरे रूम, अल्ट्रासाउंड, ब्लड बैंक, नशामुक्ति केंद्र का भी दौरा किया, जहां ब्लड बैंक बंद मिला। पूछने पर जवाब मिला की स्टाफ की कमी है। वहीं नशामुक्ति केंद्र का अभी तक लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। टीम के साथ डॉ. गौरव एमओ डेंटल नारायणगढ़, डॉ. राहुल एमओ अंबाला सिटी, डॉ. मोनिका क्वालिटी कनसलटेंट, कनुप्रिया स्टेट क्वालिटी कनसलटेंट, संजीव डाटा एंट्री, महबूब साथ रहे।

अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के साथ कई खामियां पाई गई। यह टीम रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को सौंपेगी। इसके आधार पर नागरिक अस्पताल को अंक मिलेंगे। यदि यह अंक 70 प्रतिशत व इससे अधिक होंगे तो फिर केंद्र से एनक्वास की टीम नागरिक अस्पताल का निरीक्षण करेगी और फिर अस्पताल को प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

करनाल. नागरिक अस्पताल में निरीक्षण करते हुए एनक्वाश की टीम।

ब्लड बैंक शुरू नहीं करने से मरीज परेशान

नागरिक अस्पताल में ब्लड बैंक शुरू नहीं करने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निजी ब्लड बैंक से महंगा ब्लड खरीदना पड़ रहा है। इस समस्या को अस्पताल के अधिकारी समझ नहीं रहे हैं। इसलिए ब्लड बैंक का लाइसेंस मिलने के एक महीने बाद भी व्यवस्था बेपटरी है।

टीम उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजेगी


मेडिकल काॅलेज में पर्ची लेने में 20 की जगह 5 मिनट तक रहेगी वेटिंग

करनाल| कल्पना चावला राजकीय मेडिकल काॅलेज में ओपीडी में पर्ची लेने में ही 20 मिनट की वेटिंग चल रही है। इससे मरीज को इलाज मिलने में टाइम अधिक लगता है। इसलिए मेडिकल काॅलेज प्रबंधन की तरफ से लक्ष्य रखा है कि इस वेटिंग को 5 मिनट पर लेकर आना है। 12 काउंटरों पर ऐसी व्यवस्था की जानी है कि मरीज आए और पांच मिनट में पर्ची कटवाकर डॉक्टर तक पहुंच सके।

मेडिकल काॅलेज की इमरजेंसी से रेफर होने वाले मरीजों का कारण स्पष्ट निकाला जाएगा, ताकि लापरवाही के चलते स्टाफ मरीज को रेफर न कर सके। यह दावा मेडिकल काॅलेज की कार्यकारी डायरेक्टर डॉ. हिमांश मदान ने किया। इस दौरान डॉ. अशोक जागलान, डाॅ. गुलशन गर्ग, डॉ. जयंत मौजूद रहे। मेडिकल काॅलेज में बेहतर व्यवस्था करने के लिए डॉक्टरों ने अपनी रूपरेखा स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद है कि मरीज संतुष्ट हो और उसका बेहतर इलाज कर सकें। मरीजों को संतुष्ट करना हमारी प्राथमिकता रहेगा। इसलिए एक निगरानी कमेटी भी बनाएंगे, जो मेडिकल काॅलेज की मूमेंट पर नजर रखें। निजी अस्पतालों का हस्तक्षेप मेडिकल काॅलेज में नहीं है। यदि काॅलेज के नजदीक निजी अस्पतालों की एंबुलेंस रहेंगी तो उनकी भी भूमिका को परखा जाएगा। यदि स्टाफ की मिलीभगत पाई जाती है तो वह विभागीय कार्रवाई करेंगे। मेडिकल काॅलेज में 2 हजार से 2500 की ओपीडी है। इसलिए इतनी ज्यादा ओपीडी में स्टाफ से भी लापरवाही हो जाती है। फिर भी हम मरीज एवं उनके सहयोगियों से अपील करते हैं कि वह भी संयम बरतें। स्टाफ के साथ सादगी से पेश आएं। यदि कोई मेडिकल काॅलेज से मरीज को रेफर करता है तो उसका कारण स्पष्ट करना होता है। इसलिए स्टाफ की तरफ से भी लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

करनाल. कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की कार्यकारी डा. हिमांशु मदान।

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