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  • Kaithal News Haryana News The Condition Of Taking A Certificate Of 90 Days39 Work From A Registered Contractor Became A Headache For The Laborers Registration Of 9 Only In 15 Months

रजिस्टर्ड ठेकेदार से 90 दिन के काम का सर्टिफिकेट लेने की शर्त मजदूरों के लिए बनी सिरदर्द, 15 महीनों में 9 का ही हुआ पंजीकरण

एक वर्ष पहले
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भवन एवं अन्य सनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (श्रम विभाग) में कई महीनों से मजदूरों का पंजीकरण ठप पड़ा है। यह हम नहीं विभाग के आंकड़े दर्शा रहे हैं। पिछले 15 महीनों में विभाग में पंजीकरण के लिए 9796 मजदूरों ने ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन पंजीकरण सिर्फ नौ मजदूरों का ही हो पाया है। पंजीकरण नहीं होने का सबसे बड़ा कारण मजदूरों के पास रजिस्टर्ड ठेकेदार द्वारा दिया जाने वाला 90 दिनों के काम का सर्टिफिकेट नहीं होना है। पहले अटल सेवा केंद्रों पर पंजीकरण व योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदकों की लाइन लगी रहती थी, लेकिन पंजीकरण नहीं होने और लाभ नहीं मिलने से आवेदक भी परेशान हैं। सर्टिफिकेट से सिर्फ नए मजदूरों का पंजीकरण ही नहीं, बल्कि पहले से पंजीकृत मजदूरों को भी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। नियमानुसार मजदूरों को किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए कम से कम 90 दिन के काम का सर्टिफिकेट हर साल देना होता है। लेकिन वर्तमान में मजदूर किसी ठेकेदार से सर्टिफिकेट का इंतजाम कर भी लेते हैं तो उसमें भी शर्त है कि वह बोर्ड से रजिस्टर्ड होना चाहिए।

पहले इनकी वेरिफिकेशन से चल जाता था काम| श्रम विभाग में पंजीकरण करवाने के लिए 2018 में सरकार द्वारा तहसीलदार, डीडीपीओ, बीडीपीओ, पटवारी, कानूनगो, जेई व किसी भी ठेकेदार द्वारा वेरिफाइ सर्टिफिकेट को मान लिया जाता था। इसके अलावा कुछ यूनियन को भी यह पावर दी गई थी। इनसे प्राप्त सर्टिफिकेट किसी भी योजना के लाभ लेने के लिए वैध होता था, लेकिन अब इन सर्टिफिकेट को डस्टबिन में डाल दिया गया है। ऑब्जेक्शन लगाकर पंजीकरण व सभी योजनाआओं की फाइलों को पेंडिंग में रखा गया है। अगर कोई मजदूर पंजीकरण या लाभ लेने की शिकायत करता है तो उससे रजिस्टर्ड ठेकेदार द्वारा जारी सर्टिफिकेट की मांग की जाती है जो मजदूरों के पास होता नहीं है।

सरकार मजदूरों से जमा राशि भी नहीं बांट रही| भवन निर्माण कामगार यूनियन हरियाणा के जिला संयोजक नरेश रोहेड़ा ने कहा कि सरकार की मंशा धीरे धीरे बोर्ड का पतन करना है और इसकी शुरुआत पहले ही हो चुकी है। पंजीकरण से लेकर किसी भी तरह का लाभ देने के लिए जो शर्तें रखी गई हैं वह सभी मजदूरों को उनके अधिकारों से वंचित करना है। बोर्ड के पास मजदूरों का अंशदान के रूप में जमा होने वाला 4000 करोड़ पड़ा है। सरकार अपनी तरफ से मदद देने की बजाय यह जमा राशि भी मजदूरों को आवेदन करने पर भी नहीं लौटा रही है। जिले में ही कई हजार आवेदन पेंडिंग पड़े हैं और पूरे प्रदेश में ताे लाखों हैं।

मजदूर बोले } योजनाएं बहुत हैं, लेकिन लाभ नहीं मिल पा रहा

खुराना रोड निवासी बलदेव ने बताया कि मार्च 2019 में बच्चे की शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता मांगी थी, लेकिन आवेदन के कई चक्कर काटने के बाद भी लाभ नहीं मिला। पहले साइकिल के लिए भी आवेदन किया था वह भी नहीं मिला। यहां तक कि कोई अधिकारी भी नहीं मिलता जिसको शिकायत कर सकें। गांव भाणा निवासी रघुबीर सिंह ने बताया कि मातृत्व योजना के लिए आवेदन किया था, लेकिन लाभ नहीं मिल रहा है। इसी तरह गांव ब्राह्मणीवाला निवासी वीरभान ने दो बेटियों की शादी की थी और कन्यादान योजना की राशि के लिए जून 2019 में आवेदन किया था। चक्कर काटने के साथ ही डीसी व सीएम विंडो पर शिकायत कर चुके हैं, लेकिन लाभ नहीं मिल पाया है।

योजना का लाभ न मिलने की जानकारी देते आवेदक।

पंजीकरण व सभी तरह की योजनाओं के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। खासतौर पर पंजीकरण के लिए समस्या आ रही है। नियमानुसार जो सर्टिफिकेट लगाना होता है वह मजदूर नहीं लगा रहे हैं और यही कारण है कि ज्यादातर फाइलों पर ऑब्जेक्शन लगाया गया है। जिला स्तर पर किसी भी योजना के लाभ की कोई फाइल पेंडिंग नहीं है। ऑब्जेक्शन भी हेड क्वार्टर स्तर पर लगाए गए हैं।
रणबीर सिंह, असिस्टेंट वेलफेयर ऑफिसर, श्रम विभाग।

{ इन योजनाओं का लाभ अटका

सर्टिफिकेट के कारण जिले में हजारों मजदूरों को विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इनमें मुख्य रुप से कन्यादान योजना (एक लाख), मातृत्व लाभ (36 हजार), पितृत्व लाभ (21 हजार), मृत्यु सहायता राशि (दो लाख), बच्चों की शादी में सहायता (50 व 21 हजार), शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता (8 से 51 हजार), सिलाई मशीन (3500), औजार किट (आठ हजार), साईकिल (तीन हजार) व अक्षम बच्चों को वित्तीय सहायता (दो हजार) जैसी योजनाओं की फाइल पेंडिंग पड़ी हैं। हालांकि विभाग के जिला कार्यालय का दावा है कि उनके स्तर पर कोई भी फाइल पेंडिंग नहीं है।
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