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शहर में नामी कंपनियों के डुप्लीकेट स्टेबलाइजर बनाने के कारखाने का भंडाफोड़, मालिक को किया गिरफ्तार
शहर की गोशाला मार्केट में नामी कंपनी के डुप्लीकेट स्टेबलाइजर बनाने के कारखाने का भंडाफोड़ हुआ है। कंपनी के अधिकारियों ने पुलिस को साथ लेकर शुक्रवार देर रात को छापा मार कार्रवाई की। इसमें कारखाना मालिक को गिरफ्तार कर 40 डुप्लीकेट स्टेबलाइजर, लाखों रुपये के पार्ट और स्टेबलाइजर बनाने की मशीन बरामद की गई।
वी-गार्ड इंडस्ट्रीज मैसर्ज उषा इंटरनेशनल लि. कंपनी को सूचना मिल रही थी कि भिवानी मार्केट में कंपनी के नाम से डुप्लीकेट स्टेबलाइजर पहुंच रहे हैं। सूचना पर चंडीगढ़ से कंपनी के डायरेक्टर रोमेशदत्त व फिल्ड ऑफिसर मोहित शर्मा अन्य अधिकारियों के साथ भिवानी पहुंचे और भिवानी मार्केट में सर्वे किया। सर्वे के बाद अधिकारियों को पता चला कि गोशाला मार्केट में दुकान नंबर 40 में बने कारखाने से कंपनी के नाम के डुप्लीकेट स्टेबलाइजर बनाए जा रहे हैं। कंपनी अधिकारियों ने दुकान पर पहुंचकर मामले की जांच की। इसके बाद शिकायत एसपी संगीता कालिया को दी। एसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने कंपनी अधिकारियों के साथ कारखाने में दबिश दी। कंपनी अधिकारियों ने कारखाने में जांच की और उषा व वी गार्ड कंपनी के 40 डुप्लीकेट स्टेबलाइजर बरामद किए। इसके अलावा काफी संख्या में स्टेबलाइजर बनाने की तैयारी में था। पुलिस ने मौके पर ही दुकान व कारखाने के मालिक विजय को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कॉपीराइट व आईपीसी की धारा 1957 व 420 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दिया है।
कॉपर की जगह यूज करता था एल्यूमीनियम वायर
ब्रांडेड कंपनी के स्टेबलाइजर की कीमत लगभग 2800 रुपये है, जिसमें कॉपर की तार का उपयोग होता है। जबकि कंपनी के नाम से डुप्लीकेट स्टेबलाइजर में कॉपर के स्थान पर एल्यूमीनियम तार का इस्तेमाल किया जा रहा था। डुप्लीकेट स्टेबलाइजर को बनाने में लगभग 1000 रुपये का खर्च आता है। आरोपी व्यक्ति दो हजार रुपये प्रति स्टेबलाइजर के हिसाब से बाजार में सप्लाई करता था। आरोपी ने दुकान के अंदर ही स्टेबलाइजर बनाने की मशीनें लगाई हुई थी। वह स्टेबलाइजर तैयार कर बाजार में सप्लाई करता था।
एक साल पहले खाेली थी दुकान
आरोपी दुकानदार को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया है। 40 डुप्लीकेट स्टेबलाइजर बरामद किए गए हैं। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। आरोपी ने लगभग एक साल पहले दुकान खोली थी। आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद जिला जेल भेज दिया है।\\\'\\\' -दशरथ, एएसआई।
लाेगों को लगा रहा था चूना
ब्रांडेड कंपनियों के नाम से डुप्लीकेट स्टेबलाइजर बनाकर दुकानदार ग्राहकों से असली स्टेबलाइजर की कीमत वसूल रहा था। दिखाई देने में आम ग्राहक को असली व डुप्लीकेट स्टेबलाइजर में कोई अंदर दिखाई नहीं देता है। क्योंकि स्टेबलाइजर की बॉडी के बाहर कंपनी का नाम, कंपनी लोगों आदि सब कुछ हू बहु प्रिंट किया गया था। ताकि आम ग्राहक आसानी से असली व डुप्लीकेट की पहचान न कर सके।
असली-डुप्लीकेट स्टेबलाइजर में अंतर
{ कंपनी के स्टेबलाइजर में कॉपर तार का उपयोग होता है जबकि डुप्लीकेट स्टेबलाइजर में एल्युमीनियम की तार होती है।
{ कंपनी के कॉपर युक्त स्टेबलाइजर वर्षों तक खराब नहीं होता है, जबकि एल्युमिनियम की तार से निर्मित डुप्लीकेट स्टेबलाइजर किसी भी समय खराब हो सकता है।
डुप्लीकेट स्टेबलाइजर बनाने की सूचना पर जांच करती पुलिस व मौजूद अन्य।
भिवानी. स्टेबलाइजर बनाने वाली मशीन।