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मांडौठी में देखे गए सबसे ज्यादा 6500 विदेशी पक्षी, दुर्लभ डाटर के 11 पेयर आए

Jhajjar News - भिंडावास झील पर वीकेंड पर पिकनिक मनाने वाले पक्षी प्रेमियों, फोटोग्राफर व वीडियोग्राफर के लिए अच्छी खबर है।...

Jan 24, 2020, 08:00 AM IST
Jhajjar News - haryana news the highest number of 6500 exotic birds seen in mandothi 11 pairs of rare daters came
भिंडावास झील पर वीकेंड पर पिकनिक मनाने वाले पक्षी प्रेमियों, फोटोग्राफर व वीडियोग्राफर के लिए अच्छी खबर है। मौजूदा समय में झील में हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी है। इस महीने हुई गणना में 11 हजार प्रवासी पक्षी देखे गए हैं। इनमें दुर्लभ पक्षियों में नैकड़ स्टॉट का एक व डाटर के 11 पेयर देखे गए हैं। इस कार्य के लिए विशेष रूप से यमुनानगर से प्रो. डाॅक्टर राजीव कलसी यहां 3 दिन के प्रवास पर रहे। डाॅ. कलसी ने बताया कि वे दो वर्ष पहले भी यहां आए थे, लेकिन तब ऐसा नजारा नहीं था। झील में अच्छा खासा पानी और पक्षी भी है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार मांडौठी में कहीं अधिक 6500 पक्षी देखने को मिले। फैलेमांगो की संख्या कहीं अधिक रही। डीघल टोल के समीप में इस बार पानी भी कम था और पक्षी भी बहुत कम संख्या में आए। भिंंडावास झील में दुर्लभ पक्षी नैकंड स्टॉक व डाटर के अलावा टोइड पुचर्ड भी काफी संख्या में देखने को मिली।

भिंडावास प्रदेश का सबसे वैट लैंड क्षेत्र

भिंडावास प्रदेश का सबसे वैट लैंड क्षेत्र माना जाता है। यह स्थान करीब 12 किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे 1985 में वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित कर दिया गया था। भिंडावास झील एक मानव निर्मित झील है, जिसका निर्माण उस पानी को इकट्ठा करने के लिए किया गया है, जो बिजली गुल होने के कारण जवाहरलाल नेहरू केनाल से बाहर नहीं निकाला जा सकता है। इसके बाद भी यदि पानी कहीं अधिक हो जाता है, तब यह आगे ड्रेन संख्या आठ में बहने लगता है। पानी को कंट्रोल करने के लिए गेट की व्यवस्था भी है। यहां विश्व के हर हिस्से से हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी आरामदायक वातावरण में रहने के लिए आते हैं।

इंडियन डाटर

यह पक्षी भी देखे गए

सर्दियों के दौरान प्रवासी पक्षी न सिर्फ संख्या में ज्यादा होते हैं, बल्कि वह अलग-अलग प्रजाति के भी होते हैं। 12 व 19 जनवरी को पक्षियों की गिनती का काम हुआ है। इसमें किंगफिशर, मोर, बुलबुल, कॉमन हूपो, ग्रेटर कॉर्मरंट, नीली दलदीय मुर्गी सहित अन्य 11 हजार पक्षी देखे गए। पक्षियों की कलकल और मधुर आवाज वातावरण में मिठास घोल देती है। इसके अलावा दूर तक नजर आने वाला झील का झिलमिलाता पानी आंखों को सुकून पहुंचाने वाला होता है। अब 50 एकड़ में सेलो जोन बनाई है। झील में टापू तैयार किया जा रहा है, जहां पर पक्षी लंबे समय तक भी रुक सकेंगे। टापू की व्यवस्था हाल ही में बनाई है। इसमें पानी भरने के बाद दो वर्ष तक इस क्षेत्र में आने वाले पक्षियों की हलचल पर नजर रखी जाएगी।

डाॅ. राजीव कलसी अपनी टीम के साथ।

शिकारी पक्षी रैपर भी पहुंचा : डाॅ. राजीव कलसी ने बताया कि इस बार झील में शिकारी पक्षी रैपर भी काफी संख्या देखने को मिली। इस पक्षी की गतिविधियां आमतौर पर राजस्थान में अधिक रहती है, लेकिन इस बार झील परिसर में भी यह काफी संख्या में देखा गया।


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