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- Sirsa News Haryana News The Impact Of Karona Sirsa Is 40 Percent Less Expensive In The Market But It Is Own In 150 Of 150 Motu Patlu Will Also Be Found
काेरोना का असर: सिरसा बाजार में 40 प्रतिशत कम हुआ व्यापारमंहगी है पर अपनी है...सौ की पिचकारी 150 में, मोटू-पतलू भी मिलेंगे
चीन में फैले काेरोना वायरस का असर बाजार पर दिख रहा है। चाइनीज वस्तुओं के आयात का असर होली पर दिखाई दे रहा है। होली का त्योहार 10 मार्च को मनाया जाएगा। चीन से इस बार रंग, पिचकारी व उपहार आइटमों का आना बंद है। जिसकी वजह से इस बार होली पर चीन की नहीं बल्कि देसी पिचकारी से रंग बरसेगा।
कुछ दुकानदार पुराने स्टॉक से ही काम चला रहे हैं। बाजार में रंग गुलाल की बिक्री वर्ष 2019 के मुकाबले कम है। पिचकारियों के थोक विक्रेता मोंटी भाई की दुकान के संचालक मनीष ने बताया कि होली पर्व पर शहर में छोटे से लेकर बड़े दुकानदारों के पास 50 लाख रुपये का माल बेचा जाता था, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से अबकी बार केवल 10 लाख रुपये ही रह गया है। इस त्यौहार पर रंग गुलाल, स्प्रे, बैलून व स्ट्रे बैलून की खूब मांग होती है। चीन में बनने वाले इन आइटमों की मांग इस बार कम है। हालांकि बाजार से चीनी उत्पादों के गायब होने से ‘मेक इन इंडिया’’’’ को बढ़ावा तो मिल रहा है, लेकिन व्यापारियों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
कोरोना वायरस के डर से स्टॉकिस्ट नया माल नहीं मंगा रहे हैं। इसके चलते स्वदेशी माल की मांग ज्यादा बढ़ गई है। हालात यह भी बने कि बहुतेरे दुकानदार तो इस दफा होली की चाइनीज आइटम लेकर भी नहीं आए। क्योंकि उन्हें यह चिंता है कि यह आइटम इस बार नहीं बिकेगी और उन्हें घाटा उठाना पड़ेगा। हर्बल गुलाल से ही इस बार लोग त्यौहार मनाएंगे।
होली पर सावधान रहने के लिए सोशल मीडिया पर किया जा रहा प्रचार : कोरोनावायरस के चलते होली के सीजन पर सावधान रहने के लिए पिछले कई दिन से सोशल मीडिया पर प्रचार किया जा रहा है। कई सोशल साइट्स पर कोरोना से बचने के लिए चीन में निर्मित उत्पादों का इस्तेमाल न करने के साथ ही होली के बाजार में इन उत्पादों से दूर रहने को लेकर जागरूक किया जा रहा।
गुलाल और रंगों की बिक्री पर पड़ा है जबरदस्त असर
चीन के रंगों व गुलाल से लोग तौबा कर रहे हैं तो साथ ही होली से संबंधित अन्य आइटम की बिक्री पर भी जबरदस्त असर देखने को मिल रहा है। अब तक पिछली होली की तुलना में इस बार बाजार में करीब 40 प्रतिशत व्यापार कम हुआ नजर आ रहा है। क्योंकि लोग चाइनीज आइटम से परहेज कर रहे हैं। इन्हीं की डिमांड ज्यादा हुआ करती थी। चाइनीज से कई तरह की पिचकारी, अलग-अलग क्वालिटी के रंग, गुलाल आते हैं। होली से संबंधित पटाखे भी खूब बिका करते थे। होली के हुल्लड़ का मजा बढ़ाने के लिए चाइना से मुखौटसहित कई फैंसी आइटम आती थी। लेकिन अब इन आइटम को खरीदने वाले कम ही आ रहे हैं।
रंगों से दूर रहने की सलाह
चिकित्सों का कहना है कि फूलों की होली खेलने की लिए हिदायत दी है। कोरोना वायरस से बचने के लिए देसी रंगों का इस्तेमाल किया जाना बेहतर है। वहीं, कोरोना के कारण स्वदेशी पोकीमैन पिचकारी जहां बाजार में 150 की कीमत पर मिल रही है। वहीं पहले यह पिचकारी चाइनीज 100 में मिल रही थी। इसके अलावा चाइनीज कलरफुल बाल पहले 50 से लेकर 100 बिक रहे पर ्वदेशी कलरफुल बालों की ज्यादा डिमांड बढ़ गई।
3 माह पहले ही आ गई थी चाइनीज आइटम
जगदम्बे इंटरप्राइजिज के संचालक मनीष का कहना है कि कोरोना के चलते चाइनीज आइटम की डिमांड कम होने की चिंता पहले ही हो गई थी। हालांकि उनका मानना है कि चीन में कोराना वायरस फैलने से पहले ही चाइनीज आइटम तैयार हो गई थी। लेकिन लोगों को यह डर है कि कहीं इन आइटम के इस्तेमाल से यह वायरस नहीं हो जाए। हालांकि देसी आइटम की मांग बढ़ना जरूर स्थानीय व्यापारियों के
देसी गुलाल, पिचकारी, रंग की डिमांड बढ़ी
कोरोना वायरस के चलते बाजार में एक सकारात्मक बात यह सामने आई। इस बार बाजार में देसी रंग, गुलाल व पिचकारी की डिमांड बढ़ी है। पिचकारियों के थोक विक्रेता मोंटी भाई की दुकान के संचालक मोंटी ने बताया कि पिछले कई साल से होली पर चाइनीज आइटम की ही डिमांड रहती थी। इसके चलते देसी आइटम के खरीदार बहुत कम रह गए थे तो साथ ही दुकानदार भी देसी सामान कम ही लाते थे।
सिरसा। हाेली पर बेचने के लिए स्वदेशी पिचकारियां दिखाता दुकानदार।