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करनाल डिपो का घाटा 28.65 से बढ़कर 30.37 करोड़ हुआ, 250 की जगह 160 बसें रूट पर, पर डे 5 हो रहीं खराब

Karnal News - हरियाणा रोडवेज के करनाल डिपो को घाटे से उभारने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हर साल घाटा बढ़ता जा रहा है।...

Feb 15, 2020, 08:05 AM IST
Karnal News - haryana news the loss of karnal depot increased from 2865 to 3037 crore 160 buses on the route instead of 250 but day 5 is getting worse

हरियाणा रोडवेज के करनाल डिपो को घाटे से उभारने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हर साल घाटा बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2019 में 30 करोड़ 37 लाख रुपए का घाटा हुआ है। जबकि वर्ष 2018 में 28 करोड़ 65 लाख का नुकसान हुआ था। हर साल घाटे का आंकड़ा इसी गति से बढ़ता गया तो यात्रियों के अनुसार बसों की संख्या नहीं बढ़ेगी। अब तक करनाल डिपो में 250 बसों की जगह 160 बसों को ही दौड़ाया जा रहा है। इसमें भी रोजाना औसतन 5 बसें आधे रास्ते में खराब हो रही हैं। ड्राइवर-कंडक्टर के जहां किलोमीटर मिस हो रहे हैं, वहीं बसों की आमदनी भी कम हुई है। वर्कशॉप की लापरवाही रही है कि चलती बसों के पहिया तक निकल जाते हैं। करनाल में ऐसे कई बड़े हादसे हुए, लेकिन जान माल का बचाव रहा।

इससे समझिए करनाल डिपो का घाटा

{अप्रैल से दिसंबर 2019 में 30 करोड़ 37 लाख रुपए।

{अप्रैैल से दिसंबर 2018 में 28 करोड़ 65 लाख रुपए।

{एक महीने की औसतन आमदनी 3 करोड़ 30 लाख रुपए।

{एक महीने के औसतन खर्चे 7 करोड़ 90 लाख रुपए।

{एक महीने में औसतन नुकसान 4 करोड़ 60 लाख रुपए।

नया पार्ट्स डालने के बजाए पुराने सामान से जुगाड़


रोडवेज वर्कशॉप में सबसे बड़ी लापरवाही है कि खराब बसों में नया सामान बहुत कम डालते हैं। ड्राइवर-कंडक्टर बताते हैं कि पुराने सामान से जुगाड़ लगाते हैं। इसलिए रोजाना 5 बसें ब्रेक डाउन हो रही हैं। जो बसें खराब हो रही हैं उनमें गियर, क्लच प्लेट, टायर, स्टेयरिंग ऑयल की कमियां हैं। बस की प्रॉपर जिम्मेदारी के साथ सर्विस भी नहीं करते। पिछले दो माह पहले निसिंग में चलती बस से टायर निकल गए थे। बड़ा हादसा होने से बच गया।


कर्मचारियों का हर साल वेतन बढ़ने से भी बढ़ रहा है ज्यादा खर्चा


Q. बसें ज्यादा ब्रेक डाउन हो रही हैं, क्या कारण हैं।

A. कहां लापरवाही है इस बारे में वर्कशॉप मैनेजर से पूरी जानकारी ली जाएगी।

Q. आमदनी कम खर्चे ज्यादा हैं, आमदनी बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाएंगे।

A. चेकिंग बढ़ाई जाएगी। आमदनी बढ़ाने के सोर्स तलाश रहे हैं। कर्मचारियों की हर साल वेतन बढ़ने से भी ज्यादा खर्च बढ़ रहा है।

Q. सवारियों को बेहतर सफर कैसे देंगे।

A. जो व्यवस्था है, उसके मुताबिक बेहतर सर्विस देने की कोशिश है। नई बसों की डिमांड भेजी हुई है।

52 सीटर बसों में सवारियांे की संख्या 125 तक

जिले में करनाल डिपो की बसें ओवरलोड चल रही हैं। 52 सीटर बस में सवारियांे की संख्या 100 से 125 तक पहुंच जाती है। सर्दी में भी बस की छत पर बैठकर सफर करना पड़ता है। जान जोखिम में डालकर सफर करना सवारियों की मजबूरी है। रोडवेज अधिकारियों को वर्कशॉप पर फोकस करने की जरूरत है। टाइम टेबल के मुताबिक बसों के चक्कर भी लगातार मिस हो रहे हैं। करनाल डिपो में लंबे टाइम से वर्कशॉप मैनेजर ही नहीं है। अब भी यमुनानगर के वर्कशॉप मैनेजर को करनाल का अतिरिक्त चार्ज दिया हुआ है। इसलिए निगरानी के अभाव में व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जिले के करनाल से असंध, कैथल, सीतामाई, मूनक-मतलौड़ा, गढ़ीबीरबल, इंद्री, पानीपत जाने के लिए लोकल सवारियों का सफर प्रभावित हो रहा है। एक सप्ताह में मंजूरा, रसीना, मुंदडी, रसीना-मुंदड़ी के बीच, ठोंठा, बल्डी बाईपास करनाल, करनाल सदर थाना के बाहर, असंध मार्ग पर बसें खराब ज्यादा हो चुकी हैं।


सीधी बात अजय गर्ग, जीएम, करनाल रोडवेज डीपो**

करनाल. महात्मा गांधी चौक के नजदीक खराब होने के बाद खड़ी रोडवेज की बस।

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