मुस्लिम पक्षकार ने शेर पढ़ा- है राम के वजूद पे हिंदोस्तां को नाज, अहल-ए-नजर समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद

Bhiwani News - अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को 25वें दिन सुनवाई दिनभर चली। इस दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड की दलीलें...

Bhaskar News Network

Sep 18, 2019, 08:05 AM IST
Kadma News - haryana news the muslim party read the lion on the existence of rama hindostan is considered as an ill ahl e nazar
अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को 25वें दिन सुनवाई दिनभर चली। इस दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड की दलीलें जारी रहीं। वक्फ बोर्ड की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा- भगवान राम के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास पर कभी किसी ने सवाल नहीं उठाया है। यहां तक कि मुस्लिम पक्षकारों ने भी कभी सवाल नहीं उठाया। बल्कि उर्दू के शायरों ने भी अपनी शायरी में भगवान राम का उल्लेख किया है। उन्होंने मशहूर शायर अल्लामा इकबाल का शेर भी पढ़ा-

है राम के वजूद पे हिंदोस्तां को नाज, अहल-ए-नजर समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद।

धवन ने कहा कि यह शेर लिखने वाले उर्दू शायर अल्लामा कट्टर मुस्लिम थे। इस कोर्ट ने पूछा- ये शायर कहां चले गए। इस पर धवन बोले- उन्होंने देश की आजादी के समय धर्म के आधार पर बंटवारे के लिए पाकिस्तान का समर्थन किया था। उनका आजादी से पहले ही देहांत हो गया। धवन ने कहा कि राम की पवित्रता पर कोई विवाद नहीं है। इस पर भी सवाल नहीं है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में कहीं हुआ था। लेकिन, ऐसी पवित्रता किसी जगह को एक न्यायिक व्यक्ति बदलने के लिए पर्याप्त कब होगी? जन्मस्थान एक न्यायिक व्यक्ति नहीं हो सकता। जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है, लेकिन कृष्ण न्यायिक व्यक्ति नहीं हैं। धवन ने शिया वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा- बाबरी मस्जिद वक्फ की संपत्ति है और उस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का हक है। 1885 के बाद ही बाबरी मस्जिद के बाहर के राम चबूतरे को राम जन्मस्थान के रूप में जाना गया। इस बीच, राजीव धवन ने अपने लिए शुक्रवार को अवकाश की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। साथ ही पूछा है कि उनकी जगह पर शुक्रवार को कौन दलील पेश करेगा। इस मामले पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली संविधान पीठ बुधवार को भी सुनवाई जारी रखेगी।

फैजाबाद की कोर्ट का आदेश: बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी पर दर्ज होगी एफआईआर

अयोध्या | अयोध्या मामले के मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी के खिलाफ फैजाबाद की जेएम सेकंड कोर्ट ने थाना रामजन्मभूमि में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि 3 दिन के अंदर मुकदमा दर्ज कर न्यायालय को अवगत कराया जाए। सीआरपीसी की धारा 156/3 के तहत राष्ट्रद्रोह व अन्य मामलों को लेकर इंटरनेशनल शूटर वर्तिका सिंह की ओर से कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। 3 सितंबर को शूटर वर्तिका सिंह रामलला के दर्शन करने के बाद मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी से शिष्टाचार मुलाकात करने गई थीं।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- ये शायर अब कहां हैं, - मुस्लिम पक्षकार का सवाल- जन्मभूमि को न्यायिक व्यक्ति में कैसे बदला जा सकता है

25वें दिन

कोर्ट ने अंतिम जिरह के लिए सभी पक्षों से अंतिम ताारीखें मांगी

सुनवाई में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि अब सभी पक्ष अंतिम जिरह के लिए उन्हें अंतिम तारीखें मुहैया कराएं। धवन से चीफ जस्टिस ने पूछा कि आप कब तक अपनी बहस पूरी कर लेंगे? उन्होंने हिंदू पक्षकारों से भी कहा कि आपस में चर्चा कर कोर्ट को यह जानकारी दें कि उन्हें मुस्लिम पक्ष द्वारा दी गई दलीलों पर अपना पक्ष रखने के लिए कितना समय चाहिए? जिस पर कोर्ट दलीलों के लिए समय सीमा तय कर सके। कोर्ट में हिंदू पक्षकारों की तरफ से करीब 16 दिन दलील रखी गई। उसके बाद से मुस्लिम पक्ष अपनी दलीलें दे रहा है।

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