सिविल अस्पताल में डॉक्टरों का टोटा, राेज बिना इलाज के लौट रहे 1025 मरीज

Sirsa News - सर्दी के मौसम में ठिठुरन बढ़ने के साथ- साथ सिविल अस्पताल की ओपीडी 1025 तक पहुंचती है, लेकिन अस्पताल में 29 डॉक्टरों की...

Dec 04, 2019, 08:46 AM IST
Sirsa News - haryana news tota of doctors in civil hospital 1025 patients returning without treatment
सर्दी के मौसम में ठिठुरन बढ़ने के साथ- साथ सिविल अस्पताल की ओपीडी 1025 तक पहुंचती है, लेकिन अस्पताल में 29 डॉक्टरों की कमी है। जिससे मरीजों की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं। डॉक्टर नहीं मिलने से मरीज वापस लौटते हैं और निजी अस्पतालों से महंगा इलाज करवाने को मजबूर हैं।

अस्पताल में डॉक्टरों के 57 पद स्वीकृत हैं। जिनमें 16 डॉक्टर विभाग को बिना बताए गैरहाजिर हैं, जबकि 14 पद खाली हैं। ड्यूटी से गैरहाजिर ज्यादातर डॉक्टरों ने अपना खुद का निजी अस्पताल बना रखा है और स्वास्थ्य विभाग उन डॉक्टरों को ड्यूटी ज्वाइन करने का नोटिस भिजवा रहा है। अभी तक उनमें किसी डॉक्टर ने नोटिस का जबाव देने की भी जहमत नहीं की। इधर अस्पताल में सिर्फ 28 डॉक्टर हैं। उनमें से रोजाना 10 डॉक्टर ही मरीज देख पाते हैं, क्योंकि 7 डॉक्टर डिप्टी सीएमओ का कार्यभार संभाले हुए हैं, जबकि बाकि डॉक्टर छुट्‌टी, कोर्ट व अन्य कार्यों में व्यस्त रहते हैं।

सरकरी अस्पताल में मुफ्त उपचार योजना तोड़ रही दम

वर्ष 2008 तक डॉ. गोबिंद गुप्ता ने बतौर जनरल फिजिशियन काम किया था, लेकिन उसके बाद से अस्पताल में कोई फिजिशियन नहीं है। इसके अलावा रेडियोलॉजिस्ट, न्यूरो सर्जन व स्किन स्पेशलिस्ट के पद वर्षों से खाली हैं। ऐसे हालातों के चलते सरकारी अस्पतालों में सरकार की मुफ्त उपचार योजना दम तोड़ रही है, क्योंकि मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ता है। उधर सरकारी अस्पतालों से गैरहाजिर डॉक्टरों ने खुद के अस्पताल बना रखे हैं। लेकिन इससे अनजान विभाग अब भी डॉक्टरों को ड्यूटी ज्वाइन करने का नोटिस देता है।

गैरहाजिर डॉक्टरों को दिए जाते हैं नोटिस


सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के 202 पद स्वीकृत हैं, विभाग के पास 127 डॉक्टर्स

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के 202 पद स्वीकृत हैं। जिनमें विभाग के पास 127 डॉक्टरों में 37 बिना बताए गैरहाजिर हैं। हालांकि कस्बों में स्थित सरकारी अस्पतालों की स्थिति मुख्य सिविल अस्पताल से बेहतर है, लेकिन उन अस्पतालों में व्यवस्थाओं का अभाव है। जिसके चलते मरीज इलाज कराने सिविल अस्पताल आते हैं। मगर यहां डॉक्टरों की कमी मरीजों पर भारी पड़ती है। उधर डॉक्टरों के मुताबिक सिविल अस्पताल में काम के बोझ से डॉक्टर सरकारी नोकरी से मुहं मोड़ रहे हैं। सिविल अस्पतालों में कुछ महीने प्रेक्टिस के बाद डॉक्टर प्राइवेट सेक्टर में जाते हैं, जहां डॉक्टरों को ज्यादा पैसा मिलता है और ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों को पोस्टमार्टम, विभिन्न मामलों की जांच व वीआईपी ड्यूटी जैसे काम नहीं देखने पड़ते। लेकिन सरकारी अस्पतालों में इन डॉक्टरों की गैरहाजिरी मरीजों पर भारी पड़ती है।

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