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बारिश और ओलों से चौपटा के गांवों में 70 फीसदी तक फसलें तबाह, ऐलनाबाद में भी हुआ नुकसान

एक वर्ष पहले
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मौसम में आए बदलाव से बुधवार दोपहर बाद तेज अंधड़ के साथ हुई 8 एमएम बारिश और जमकर हुई ओलावृष्टि ने जिला के चौपटा हिस्से में तबाही मचा दी। गांव जमाल, बरासरी, रामपुरा ढिल्लों, रूपावास, ढूकड़ा, गुडियाखेड़ा, रायपुर बरूवाली सेंकेड, हंजीरा, कुतियाना सहित ऐलनाबाद क्षेत्र के कई गांव में जमकर हुई ओलावृष्टि से फसलों को 70 फीसदी से ज्यादा नुकसान हो गया है। सबसे अधिक सरसों, चना की फसल नष्ट हुई है।

वहीं गेहूं की फसल पर भी 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान है। गांव गुड़िया खेड़ा के किसान रोहताश गोदारा, कृष्ण ने बताया कि फसलें बर्बाद हो गई हंै। वहीं गांव जमाल व ढूकड़ा निवासी किसान गोपाल बैनीवाल, जगतपाल, रामपाल, अजय सिंह, मनोज, किरपाल सिंह ने बताया कि चौपटा क्षेत्र में तेज आंधी के साथ बारिश और ओलावृष्टि से फसलों में जमकर नुकसान हुआ है। तेज बारिश के साथ 15 मिनट तक लगातार ओलावृष्टि हुई है। किसानों की 6 महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। किसानों ने बताया कि उनका गुजारा फसलों की आमदनी से होता है, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने उनकी फसलें मिट्‌टी में मिला दी हैं। सरसों, गेहूं व चना की फसलों का 70 फीसदी से ज्यादा नुकसान हुआ है। इसकी एवज में किसानों ने सरकार व जिला प्रशासन से उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।

शहर में भी 8 एमएम बरसात से नीचले इलाकों में जलभराव

तेज आंधी के साथ आई 8 एमएम तक बारिश से भी जिला के अन्य हिस्सों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया है। वहीं तापमान में 7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। जबकि बारिश से शहर के नीचले 12 इलाकों में जलभराव की स्थिति ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सबसे ज्यादा दिक्कतें सुरखाब चौक व बेगू रोड से गुजरने वाले वाहन चालकों को आई। शहर में बरसाती पानी निकासी के इंतजाम नाकाफी साबित हुए। जबकि पिछले दिनों हलकी ओलावृष्टि और अंधड़ के साथ जिले में हुई 16 एमएम बारिश ने फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया था। कृषि उपनिदेशक कार्यालय में 1863 किसानों ने फसली मुआवजा के आवेदन किए हैं। जिसमें सबसे ज्यादा आवेदन नाथूसरी चौपटा क्षेत्र से आए हैं।

कहां कितनी बारिश

स्टेशन बारिश

सिरसा 8

कालांवाली 5

पंजुआना 5

रोड़ी 5

ओटू 5

गोलेवाला 5

नोट : बारिश एमएम में है।

जिले के 91 हजार किसानों ने करवा रखा है फसल बीमा

कृषि उपनिदेशक कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी से जिला के 91 हजार 279 किसानों ने फसल बीमा करवाया है। जिसके तहत प्राकृतिक आपदाओं के कारण क्षतिग्रस्त हुई फसलों के मुआवजे बारे विभाग को 72 घंटों में जानकारी देनी अनिवार्य होती है। आवेदन ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करता है।

सर्वे रिपोर्ट पर जारी होगा मुआवजा

पिछले दिनों बारिश से नुकसान बारे अभी तक 1863 किसानों के आवेदन आए हैं। संबंधित बीमा कंपनी उक्त खेतों की सर्वे करवाएगी और उसी आधार पर किसानों को मुआवजा जारी होगा। \\\' -डॉ. बाबूराम, कृषि उपनिदेशक सिरसा।

मौसम में फिर से बदलाव संभावित

कृषि मौसम विज्ञान विभाग हकृवि हिसार में विभागाध्यक्ष डॉ. मदनलाल खिचड़ ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम में फिर से बदलाव संभावित है। 12 मार्च रात तक हवाअाें व गरज चमक के साथ कहीं-कहीं बारिश संभावित है।

3 लाख 70 हजार हेक्टेयर में खेती बारिश से फसलों को फायदा नहीं

जिले में 3 लाख 70 हजार हेक्टेयर कृषि रकबा है, जिसमें करीब एक लाख 72 हजार किसान काश्त करते हैं। जिसमें 2 लाख 98 हजार हेक्टेयर में गेहूं व 54 हजार हेक्टेयर में सरसों की फसल है। वहीं 4 हजार हेक्टेयर में चना और 5 हजार हेक्टेयर में जो की फसल है। पिछले दिनों गेहूं और सरसों की फसल में खराब मौसम से नुकसान हुआ था।

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