भगवान की दी बुद्धि का सदुपयोग करें: संतोषी
भगवान की असीम कृपा से मनुष्य के अंदर एक विशेष प्रकार की बुद्धि प्रदान की है। जिसको विवेक बुद्धि कहते है जिसके द्वारा सत्य व असत्य आत्मा और अनात्मा जड़ व चेतन का भेद मनुष्य पहचान सकता है। यह बात महामंडलेश्वर संतोषी माता ने कही। वे श्री दुर्गा मंदिर के वार्षिकोत्सव में शनिवार की सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रही थी। सनातन धर्म को सृष्टि का सर्वोत्कृष्ट धर्म बताते हुए उन्होंने बताया कि इस धर्म के सभी पर्वों का वैज्ञानिक महत्व है जो हमारे ऋषि-मुनियों ने अपनी सैकड़ों-हजारों वर्षों की तपस्या एवं अनुभव के आधार पर निर्धारित किए हैं।
इन्हीं विशिष्टताओं के कारण संपूर्ण विश्व सनातन धर्म और उसके अनुयायी तथा धर्मगुरुओं का सम्मान करता है। इसलिए सभी मनुष्यों को भगवान की भक्ति पर ध्यान देना चाहिए। इस दौरान भिवानी से आए बाबा सत्यनारायण व भजन गायक ओम प्रकाश सरल ने भजन प्रस्तुत किए। पुजारी महेंद्र कुमार व अनूप कुमार ने पूजन कराया। इस मौके पर प्रधान किट्टी बत्तरा, डॉ. आत्मप्रकाश मेहता, दिवान चंद मेहता, कुशल चराईपोत्रा, कैलाश बत्तरा, राजकुमार गिल्होत्रा, नरेंद्र चौधरी, उत्तमपाल रूखाया, दूनी चंद गिल्होत्रा, मोहन लाल वधवा, राजेंद्र ललित, ज्ञानचंद नांगरू आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम में श्री दुर्गा युवा संघ के सदस्यों ने
सेवा की।
दुर्गा मंदिर महोत्सव कार्यक्रम स्थगित
दुर्गा मंदिर के वार्षिकोत्सव का रविवार को होने वाला समापन समारोह स्थगित कर दिया गया है। मंदिर सचिव कुशल चराईपौत्रा ने बताया कि कोरोना वायरस को लेकर सरकारी आदेश के चलते रविवार का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है।
फतेहाबाद। दुर्गा मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं
संतोषी माता