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वन्य प्राणी विभाग ने 3 हजार बंदरों को पकड़ने की मंजूरी दी

एक वर्ष पहले
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शहर में बंदरों का उत्पात बढ़ा हुआ है। बंदरों की यह परेशानी आम काॅलोनियों से निकलकर आफिसर काॅलोनी तक पहुंच गई है। जहां पर जिले के बड़े अधिकारी व उनका स्टाफ भी परेशान है। इस बीच राहत की बात यह है कि नगरपालिका की ओर से वन्य प्राणी विभाग से जो बंदर पकड़ने की मंजूरी मांगी गई थी वह मिल गई है। अब बंदर पकड़ने के लिए टेंडर लगाने का रास्ता साफ हो गया। शहर की कोई कॉलोनी ऐसी नहीं है। जहां के लोग बंदरों के उत्पात से परेशान न हो। पहले बंदरों की संख्या मुख्य जलघर के आस-पास रहती थी, जहां पर पेड़ पौधों भी काफी संख्या में है। समय-समय पर बंदरों की टोलियां जलघर के आस-पास के घरों तक जाकर लौट आती थी, लेकिन अब पूरे शहर में बंदरों की अधिकता की शिकायत बनी है। लोगों की शिकायत है बंदरों के कारण वे छत पर कपड़े नहीं सुखा पा रहे हैं। छोटे बच्चे व महिलाओं के लिए बंदरों का खतरा बन चुके हैं। कई जगह बंदरों की बढ़ती शिकायत को देखते हुए लोगों ने अपने समूचे घर पर जाली लगाकर कवर किया है। लोगाें ने आप को कैद कर लिया है ताकि घर के बच्चे व दूसरे सदस्य सुरक्षित रह सकें। इसके बाद बंदरों का प्रभाव कम होने की बजाय लगातार बढ़ रहा है। ऑफिसर कॉलोनी में भी बंदरों ने धमाल मचा हुआ है। पिछले कई दिनों से यहां पर रहने वाले अधिकारी व दूसरे स्टाफ कर्मी भी परेशान हैं। बंदरों की समस्या के कारण यहां तैनात कर्मचारी भी खासी दिक्कत में हैं। दिनभर पेड़ पौधों पर उछल कूद करने वाले बंदरों काे भगाने के लिए हर कुछ समय बाद भागदौड़ करनी होती है। बाद जरा सी लापरवाही हुई नहीं कि बंदर कोई न कोई नुकसान कर डालते हैं। स्टाफ का कहना है कि बंदर पकड़ने के अलावा और कोई चारा नहीं है। इस बीच अच्छी बात यह है कि वन्य प्राणी विभाग की ओर से बंदर पकड़ने के लिए मंजूरी मांगी हुई थी। वह जारी हो गई। अब यह नगरपालिका के अधिकारियों पर निर्भर है कि वे बंदर पकड़ने के लिए कब टेंडर करते हैं।

जिले में बंदर पकड़ने के लिए अधिकारियों को फाइल भेजी गई थी। झज्जर से 3000 बंदरों को पकड़ने की अनुमति मिल गई है। अब यह नगर पालिका और ग्राम पंचायतों को देखना है कि वे किस तरह से बंदरों को पकड़ने के लिए योजना तैयार करते हैं।
-देवेंद्र हुड्डा, वाइल्डलाइफ इंस्पेक्टर भिंडावास
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