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- Bahadurgarh News Haryana News With The Implementation Of Fastag There Is A 70 Reduction In Pollution On The Ticking Border
फास्टैग लागू हाेने से टिकरी बाॅर्डर पर प्रदूषण में अाई 70 फीसदी कमी
टिकरी बाॅर्डर पर ट्रकों की संख्या में पचास फीसदी कमी अाने व अधिकतर वाहनों के केएमपी से निकल जाने के कारण टिकरी टोल पर वायु प्रदूषण का 70 फीसदी कम हुअा है। इससे टोल पर ड्यूटी दे रहे लोगों को राहत मिली है। ईपीसीए ने दावा किया है कि दिल्ली, हरियाणा व यूपी से लगते 13 बॉर्डरों पर फास्टैग लागू होने के बाद प्रदूषण में 70 फीसदी कमी अाई। इस तरह का आंकलन पहली बार जारी किया गया है। यह दावा भी सुप्रीम कोर्ट को दी अपनी रिपोर्ट में ईपीसीए ने किया है। ईपीसीए ने बताया कि 2015 के मुकाबले प्रदूषण के स्तर में यह गिरावट आई है। इन 13 जगहों पर हल्के और भारी माल वाहक ट्रकों से होने वाले नॉक्स के स्तर में 87 से 95 पर्सेंट तक की कमी आई है। एक दिसंबर 2019 से 1 जनवरी 2020 और जून, जुलाई 2015 के डेटा के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। 2015 के डेटा सीएसई और 2019-20 के डेटा एमसीडी से लिए गए हैं। जिसके मुताबिक 13 बॉर्डरों से आरएफआडी के बाद ट्रकों की संख्या में काफी कमी आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2015 के मुकाबले 2019-20 में हल्के माल वाहक ट्रकों से पार्टिकुलेट मेटर में 95 प्रतिशत की कमी आई, जबकि भारी माल वाहक ट्रकों में भी यह कमी 95 प्रतिशत की रही, जबकि 2015 के मुकाबले 2019-20 में हल्के माल वाहक ट्रकों से निकलने वाले नॉक्स में 94 प्रतिशत और भारी माल वाहक ट्रकों से निकलने वाले नॉक्स में 87 प्रतिशत की कमी आई है।
केएमपी पर प्रकाश होने से रात के समय भी बढ़ेगी वाहनों की संख्या
केएमपी पर रात के समय अंधेरा होने के कारण रात के समय वाहनों की संख्या में 20 फीसदी तक कमी अा रही है। जैसे ही बिजली निगम द्वारा बिजली की सप्लाई शुरू होगी तो ट्रकों की संख्या में 20 फीसदी बढ़ोतरी होने की संभावना है। वर्तमान में कंपनी ने बिजली के कनेक्शन के िलए अावेदन किया हुअा है व बिजली निगम ने 46 लाख रुपए के करीब लाइन अादि बिछाने का काम के बदले मांगे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही केएमपी पर बिजली की व्यवस्था होगी। जिसके बाद रात के समय भी ट्रकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। उससे टिकरी बाॅर्डर पर व्यवसायिक वाहनों की संख्या अौर कम होगी। अब केवल वहीं वाहन बार्डर क्रास कर रहे हैं जो प्रदूषण के पैमाने पर खरे उतर रहे हैं। जुगाड़ व पुराने वाहन जिनका रजिस्ट्रेशन समाप्त हो चुका है वे बाॅर्डर से नहीं जा रहे।
केएमपी की वजह से भी बाॅर्डर से पुराने वाहन नहीं निकल पाए
सन 2015 में इन 13 एंट्री पॉइंट से 22 हजार से 38 हजार ट्रक दिल्ली में आते थे। जिनकी संख्या अब 25 सौ से 3 हजार तक रह गई है। इसी आंकलन के आधार पर ईपीसीए ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया है कि आरएफआईडी फेज-2 पर भी काम शुरू किया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट पर कुल 36 करोड़ रुपए का खर्च अाने की संभावना है। इससे दिल्ली के सभी 133 एंट्री पॉइंट पर आरएफआईडी लागू हो जाएगा। फेज-2 में 10 बड़े एंट्री पॉइंट पर आरएफआईडी बूथ लगाने और 101 पर हैंडहेल्ड डिवाइस लगाया जाएगा। आरएफआईडी फेज-1 में दिल्ली के सबसे बड़े 13 बॉर्डरों को कवर किया गया है। जिस पर कुल 80.94 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।