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प्रत्येक सब डिवीजन पर एक अतिरिक्त सब डिवीजन बनने से कम होगा वर्कलोड, उपभोक्ताओं को राहत
स्टाफ की कमी व अधिक वर्क लोड को लेकर बिजली निगम चर्चा में रहता है। कार्यालय के कार्यों को लेकर उपभोक्ताओं की फाइलें अटकी रहती हैं, जिस कारण उपभोक्ताओं को इंतजार करना पड़ता है। इतना ही नहीं, कई बार उपभोक्ताओं को कार्यालय के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं, लेकिन अब निगम उपभोक्ताओं की इस परेशानी को दूर करने की योजना पर कार्य कर रहा है। इसे लेकर प्रत्येक सब डिवीजन पर एक अतिरिक्त सब डिवीजन बनाए जाने की योजना का खाका तैयार हो रहा है। हालांकि रादौर में फिलहाल यह निर्णय नहीं हो पाया है कि नया सब डिवीजन कार्यालय रादौर में ही बनाया जाएगा या फिर जठलाना क्षेत्र को इसके लिए चिह्नित किया जाएगा। कार्यालय कहीं पर भी बने, लेकिन यह तय है कि इससे बिजली निगम से जुड़े उपभोक्ताओं को अच्छा लाभ मिलेगा है।
एक सब डिवीजन में 20 हजार से कम उपभोक्ताओं को जोड़ा जाएगा: बिजली निगम रादौर की सब डिवीजन के अधीन करीब 92 गांव आते हैं जिनमें फिलहाल निगम के पास करीब 39 हजार 500 कनेक्शन हैं। नई योजना के अनुसार निगम एक सब डिवीजन के अधीन 20 हजार से कम कनेक्शनों को शामिल करेगा, जिसे लेकर रादौर डिवीजन के अधीन आने वाले 92 गांवों को दो भागों में बांट दिया जाएगा। इसमें 20 हजार से अधिक कनेक्शन दूसरी सब डिवीजन में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे।
खाका तैयार करने में जुटे निगम के अधिकारी: नई सब डिवीजन का कार्य जल्द से जल्द पूरा हो इसके लिए निगम के अधिकारी खाका तैयार करने में जुटे हैं। गांवों की नक्शाबद्ध सूची तैयार कर अधिकारियों से विचार-विमर्श किया जा रहा है। इस बात पर भी चर्चा चल रही है कि रादौर या फिर जठलाना क्षेत्र में कहा पर नई डिवीजन का कार्यालय खोला जाए। इसमें इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि डिविजन के नये कार्यालय का अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके। निगम के अधिकारियों द्वारा जो खाका तैयार किया जा रहा है, उसमें रादौर डिवीजन के अधीन कितने कनेक्शन हैं, कितना स्टाफ, कितने फीडर और कितने गांव हैं, यह सारी सूची तैयार की जा रही है।
नई सब डिवीजन के लिए तैयारी चल रही है। उम्मीद है कि छह माह से पहले ही यह योजना अमल में आ जाएगी। गांवों की सूची तैयार कर ली गई है। अतिरिक्त सब डिवीजन के बन जाने से स्टाफ का वर्कलोड भी कम हो जाएगा।
शमशेर सिंह, एसडीओ रादौर।
यह मिलेगा लाभ: एक अतिरिक्त डिवीजन बनाए जाने से जहां निगम के कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों की टेंशन भी कम होगी, बल्कि लोगों को भी अपने कार्याें में राहत मिलेगी। अतिरिक्त डिवीजन बन जाने के बाद नई डिवीजन में अतिरिक्त स्टाफ भी उपलब्ध होगा, जिससे निगम में स्टाफ की कमी तो दूर होगी ही, साथ ही लोगों के कार्य भी लंबे समय तक नहीं अटकेंगे। वहीं कर्मचारियों का वर्कलोड भी काफी हद तक कम हो जाएगा।