सितंबर अंत तक चलेगा स्वच्छता सर्वेक्षण, फीडबैक पर रहेगा जोर

Gurgaon News - स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण-2019 में सबसे अहम भूमिका आमजन की होगी, क्योंकि लोगों द्वारा स्वच्छता को लेकर दिए जाने...

Aug 20, 2019, 07:30 AM IST
स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण-2019 में सबसे अहम भूमिका आमजन की होगी, क्योंकि लोगों द्वारा स्वच्छता को लेकर दिए जाने वाला फीडबैक अहम भूमिका निभाएगा। सिटीजन अपना फीडबैक स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2019 एप के माध्यम से दे सकते हैं। यह बात सोमवार को गुड़गांव के अतिरिक्त उपायुक्त मोहम्मद इमरान रजा ने लघु सचिवालय में स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2019 को लेकर हुई बैठक के दौरान कही।

अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2019 के दौरान गुड़गांव जिले के लोगों से भी स्वच्छता संबंधी फीडबैक लिया जाएगा, जिसमें उनसे स्वच्छता को लेकर प्रश्न पूछे जाएंगे। टीम द्वारा आंकलन किया जाएगा कि लोग स्वच्छता को लेकर कितने जागरूक हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2019 मोबाइल एप के द्वारा सिटीजन फीडबैक लिया जाएगा। अतिरिक्त उपायुक्त ने आम जनता से अपील की कि वे इस मोबाइल एप को अधिक से अधिक डाउनलोड करें और स्वच्छता को लेकर अपना फीडबैक दें।

उन्होंने कहा कि जिले में ग्रामीण स्वच्छ सर्वेक्षण 14 अगस्त से शुरू हो चुका है जो सितंबर के अंत तक चलेगा। रजा ने बताया कि भारत सरकार की टीम जल्द ही यहां पहुंचेगी जो स्वच्छता संबंधी विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं की बारीकी से पड़ताल करेगी। उन्होंने कहा कि लोग अपने घरों के आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ व सुंदर बनाए रखें और साफ सफाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सभी व्यक्तिगत, सार्वजनिक तथा सामुदायिक शौचालय चालू हालत में होने चाहिए। स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान कचरे के संग्रहण और परिवहन, कचरे का प्रोसेस एंड डिस्पोजल, स्वच्छता व खुले में शौचमुक्त, स्वच्छता को लेकर लोगों के व्यवहार में बदलाव, कैपेसिटी बिल्डिंग तथा इनोवेशन एंड प्रैक्टिस आदि सहित बहुत से तथ्यों पर अध्ययन होगा।

गुड़गांव. स्वच्छता सर्वेक्षण की जानकारी देते एडीसी मोहम्मद इमरान रजा।

2019 में इन 12 बिंदुओं पर होगा सर्वे

डोर टू डोर कचरा कलेक्शन।

घरों-दुकानों से गीला-सूखा कचरा अलग-अलग करना।

सार्वजनिक, व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों की सफाई।

वेस्ट स्टोरेज बिंस, लिटरबिंस और मटेरियल रिकवरी सुविधा।

यूजर फीस, कचरा फैलाने वालों पर पैनल्टी, स्पॉट फाइन, प्लास्टिक बैन को लागू करना।

बड़े पैमाने पर कचरा उत्सर्जक संस्थानों में ऑन साइट कंपोस्टिंग।

वैज्ञानिक तरीके से कचरे की प्रोसेसिंग, साइट लैंडफिलिंग और कंस्ट्रक्शन व डेमोलिशन वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम।

नागरिकों की समस्याओं को एप, हेल्पलाइन या अन्य माध्यम से दर्ज कर समाधान करने और फीडबैक के लिए सिस्टम।

डंप साइट या ट्रेंचिंग ग्राउंड में पुराने कचरे की प्रोसेसिंग और निपटान।

स्टॉर्म वाटर ड्रेन की सफाई और जलाशयों के सतह की सफाई।

शहर में सुंदरता के ऐसे इंतजाम करना जो साफ तौर पर देखें और महसूस किए जा सकें

कचरा उत्सर्जन में कमी।

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