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फिल्मों की रिलीज से तौबा, थिएटर बंदी की तैयारी, कान फेस्टिवल पर भी संकट
मॉडर्न पैरेंटिंग,
फिजिक्स की तरह है
न्यू टन के तीसरे नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया के लिए, एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। और यह कम से कम आधुनिक पैरेंटिंग के मामले में सही प्रतीत होता है। ‘क्या आप प्रश्न-पत्र लीक कर सकते हैं?’ यह सवाल उन कई अनपेक्षित सवालों में से एक था, जो इंटरमीडिएट सार्वजनिक परीक्षाओं के दौरान छात्रों को तनाव से निपटने में मदद करने के लिए आंध्र प्रदेश राज्य शिक्षा बोर्ड के साथ काम करने वाले काउन्सलर्स से पूछे गए थे। ऐसा एक और सवाल था जिसने मनोवैज्ञानिकों को चौंका दिया था कि ‘मैंने पूरा साल पबजी खेलने में बर्बाद कर दिया, अब मुझे अच्छे मार्क्स के लिए क्या करना चाहिए?\\\'
ऐसा किसी एक राज्य तक ही सीमित नहीं है। कई राज्यों के छात्र तनावग्रस्त बच्चों की मदद करने के लिए राज्यों द्वारा जारी किए गए स्थानीय मनोवैज्ञानिकों के नंबर पर कॉल लगाते हैं, जिनका एक ही उद्देश्य होता है- अच्छे मार्क्स स्कोर करने का आसान तरीका क्या है, जबकि कुछ बच्चे किसी भी कीमत पर केवल पास होना चाहते हैं।
ये मनोवैज्ञानिक स्वीकारते हैं कि केवल अकादमिक रूप से कमजोर छात्र ही मदद नहीं मांग रहे हैं, बल्कि अच्छे मार्क्स वाले छात्र भी मदद ले रहे हैं, जो वास्तव में काफी तनाव में हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे छात्र भी हैं जो मनोवैज्ञानिकों से यह जानना चाहते हैं कि वे अपने माता-पिता या शिक्षकों की अपेक्षाओं पर खरे उतर पाएंगे या नहीं। एक छात्र कॉल पर यह कहते हुए रोने लगा कि वह गणित में हमेशा टॉप करता है, इसलिए उसके शिक्षक को उससे बोर्ड परीक्षाओं में भी ज्यादा नंबर लाने की उम्मीदें हैं। दिलचस्प बात यह है कि 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं में राज्य के टॉपर्स को डर था कि वे 12वीं की परीक्षा में टॉप नहीं कर पाएंगे। हालांकि कॉल करने का समय दोपहर 3 बजे से शाम 8 बजे के बीच है, लेकिन कई बार छात्र आधी रात को फोन करते हैं, ताकि उनके माता-पिता को पता न चले कि वे तथाकथित ‘बाहरी लोगों’ से मदद मांग रहे हैं। कुछ बच्चों ने केवल जोर से रोने और परीक्षा के लिए अपने डर को भगाने के लिए फोन किया, जबकि उन्हें यकीन था कि वे पास तो हो ही जाएंगे। लेकिन उनके लिए सिर्फ पास होने से ज्यादा अच्छे प्रतिशत लाना मायने रखता था।
क्या आपने कभी सोचा है कि छात्रों के बीच पिछले कुछ वर्षों में यह नया भ्रम क्यों आ गया है। क्यों होशियार बच्चों में यह आत्मविश्वास नहीं है कि वे माता-पिता और शिक्षक की उम्मीद पर खरे उतर सकते हैं, जबकि कुछ बच्चे बेहतर अंकों के लिए शॉर्टकट ढूंढ रहे हैं। दोनों ही स्थितियों में छात्रों के लिए अंक मायने रखते हैं।
हाल ही में मेरी उन माता-पिता के साथ मीटिंग थी, जिनके बच्चे अभी नर्सरी या किंडरगार्टन में हैं। आप हैरान हो जाएंगे कि उन्होंने मुझसे कैसे-कैसे सवाल पूछे। जैसे कि ‘पिछले एक महीने से नर्सरी में होने के बावजूद बच्चा माता-पिता की मदद के बिना ए टू जेड नहीं बोल पाता’। दूसरे माता-पिता का कहना था कि ‘मेरा बेटा अंग्रेजी में पहले चार अल्फाबेट्स से अधिक क्यों नहीं लिख पा रहा है? सवाल सिर्फ अकादमिक ही नहीं थे। दूसरे माता-पिता की भी सुनें: ‘मेरे बच्चे को फैंसी ड्रेस में पुरस्कार क्यों नहीं मिला। आखिरकार वो पुरस्कार जीतने के लिए ही तो स्कूल जाता है।’ इतना ही नहीं एक मां ने स्कूल प्रबंधन के साथ जमकर लड़ाई की, जब उनकी तीन वर्षीय बेटी की नर्सरी कक्षा के सभी 40 बच्चों के एक डांस के कार्यक्रम में बच्ची को पीछे खड़ा किया गया था। उनका सवाल यह था कि उनकी बेटी को सबसे आगे खड़े करने की बजाय डांस ग्रुप के बीच में क्यों खड़ा किया गया था।
अब मुझे बताएं कि अगर हम माता-पिता ही इस तरह बर्ताव करेंगे, यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारे बच्चे डांस प्रोग्राम में सबसे आगे खड़े हों, तो कल्पना कीजिए कि बच्चे स्कूल की परीक्षा देते वक्त कितना दबाव महसूस करते होंगे।
फंडा ये है कि पैरेंटिंग, फिजिक्स की तरह है। माता-पिता की हर क्रिया की एक समान प्रतिक्रिया होती है। यदि आप पहले दिन से ही हर काम में पहले नंबर पर आने को महत्व देंगे, तो स्कूल खत्म होने तक सिर्फ अंक ही महत्वपूर्ण रह जाएंगे। फैसला आपका है।
कोरोना कालखंड में किस्सागोई
अ मिताभ बच्चन और हेमा मालिनी अभिनीत फिल्म ‘बुड्ढा होगा तेरा बाप’ के अंतिम दृश्य में एक अपराध दल के सभी सदस्य मार दिए जाते हैं। नायक एक मरियल सदस्य को जीवित छोड़ देता है और उससे कहता है कि अब वह सरगना पद पर विराजमान हो सकता है। अतः वह मरियल और कमजोर सदस्य दुख जाहिर करता है कि उसे सिंहासन पर बैठने को कहा जा रहा है, परंतु वह किस पर शासन करे। सारे सदस्य मर चुके हैं, हथियार टूटे हुए हैं, कुरुक्षेत्र में लड़े गए 18 दिवसीय युद्ध के पश्चात केवल महिलाएं, उम्रदराज लोग और कमजोर बच्चे ही बचे थे। युद्ध में शामिल सभी राज्यों के खजाने खाली हो चुके थे। शस्त्र बेचने वालों के पास भव्य भवन और अकूट धन भरा था, परंतु रोटी नहीं थी। ‘बुड्ढा होगा तेरा बाप’ का नायक रंगीन मिजाज है। वहां लंपट नहीं है, परंतु छेड़छाड़ में उसे मजा आता है। उसके स्वभाव को ठीक से नहीं समझ पाने वाली प|ी उससे अलग हो जाती है। नायक अपने पुत्र को बचा लेता है और प|ी से कहता है कि अब उस बुड्ढे को विदा होने दो। नायिका जवाब देती है...‘बुड्ढा होगा तेरा बाप’। बहरहाल, एक प्रांत के शिखर नेता ने बयान दिया है कि उनके प्रांत में आईपीएल क्रिकेट होगा, परंतु दर्शक नहीं होंगे, क्योंकि कोरोना वायरस के इस भयावह दौर में भीड़ जमा होने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कल्पना करना कठिन है कि खाली स्टेडियम में खिलाड़ी क्या महसूस करेंगे। स्टेडियम में सन्नाटा पसरा हो, न कोई ताली बजाए और न कोई त्रुटि होने पर गाली दे तो खेलने का क्या मजा आएगा?
दशकों पूर्व विशेषज्ञों द्वारा 2022 में भयावह वैश्विक आर्थिक मंदी की बात कही गई थी। आने वाली मंदी की पदचाप सुनी जा रही है। सभी क्षेत्रों में नैराश्य छाया है। फिल्म जगत में पूरी बन चुकी फिल्मों के प्रदर्शन को टाला जा रहा है। महामारी हो या कोई भी संकट हो, सबसे अधिक कष्ट आम आदमी पाता है परंतु कोरोना वायरस किसी भेद को नहीं समझता। यह कितनी भयावह बात है कि एक बीमारी अलग किस्म का समाजवाद ला रही है। कोरोना पूरे विश्व को एक गांव में बदल सकता है। यह गांव डाकुओं द्वारा रौंदे जाने के बाद वाला गांव होगा। विश्व नामक ‘कुटुंब’ एक गांव में सिमटकर रह जाएगा।
याद आती है ‘मेरा नाम जोकर’ के गीत की पंक्तियां- ‘खाली खाली कुर्सियां हैं, खाली-खाली डेरा है, खाली खाली तंबू है, बिना चिड़िया के रैन बसेरा है यह घर न तेरा है न मेरा है।’
ज्ञातव्य है कि सन 2008 में वैश्विक मंदी का सबसे कम प्रभाव भारत पर पड़ा था, क्योंकि उस समय तक भारतीय समाज किफायत और बचत के आदर्श को मानता था। विगत कुछ वर्षों से अवाम गैरजरूरी चीजें खरीद रहा है। सस्ते मोबाइल से भी काम चलता है, परंतु महंगे मोबाइल सस्ते मोबाइल से अधिक बिक रहे हैं। हमारे इंदौर के मित्र महेश जोशी कहते हैं कि खरीदने की प्राथमिकता को उल्टा कर दिया गया है। यह तथ्य याद दिलाता है फिल्म ‘चोरी चोरी’ के शैलेंद्र रचित गीत की- ‘जो दिन के उजाले में न मिला दिल ढूंढ रहा है ऐसे सपने को, इस रात की जगमग में खोज रही हूं अपने को।’ काबिले गौर है शब्द ‘जगमग’ का उपयोग।
ज्ञातव्य है कि 1936 में पेरिस में बने एक शॉपिंग मॉल पर दार्शनिक ने टिप्पणी की थी कि शॉपिंग मॉल में आप प्रवेश एक जगह से करते हैं और बाहर किसी अन्य द्वार से जाते हैं। उसी जर्मन दार्शनिक ने कहा था कि शॉपिंग मॉल पूंजीवादी व्यवस्था के परचम हैं, परंतु भविष्य में ये ही परचम उसे ध्वस्त भी करेंगे। वर्तमान में यही हो रहा है। मॉल के मालिक दुकानदारों से कह रहे हैं कि किराया भले ही मत दो परंतु दुकान बनाए रखो।
भारत में गर्मी के आगमन से कोरोना वायरस बेअसर हो सकता है। कोरोना से बचाव की दवा खोजी जा रही है। ज्ञातव्य है कि ‘डेकोमेरॉन’ नामक गल्प का स्पष्ट सार है कि प्लेग फैलने के कारण कुछ लोग पहाड़ की एक गुफा में बस गए हैं। समय व्यतीत करने के लिए हर सदस्य को एक कहानी सुनानी होती है। इन कथाओं का संग्रह है ‘डेकोमेरॉन’। अंग्रेजी के पहले कवि चौसर की ‘पिलग्रिम्स प्रोग्रेस’ भी तीर्थ यात्रा पर जा रहे यात्रियों द्वारा कथा कहने की बात करती है। कथा कहने और और सुनने से भी जिया जा सकता है। आज हम खोखली गहराइयों में जी रहे हैं। सियासत में खो-खो खेला जा रहा है और अवाम आपसी कबड्डी और खो-खो में रमा हुआ है।
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु [raghu@dbcorp.in]
‘चाचू मुंह छिपाकर ऑडियंस रिएक्शन देखने जाते थे\\\'
कान फिल्म फेस्टिवल भी हो सकता है रद्द
काेरोना के चलते अब हर साल आयोजित होने वाले कान फिल्म फेस्टिवल पर भी रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है। फेस्टिवल के प्रेसिडेंट पियरे लेस्क्योर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा है कि हम यह उम्मीद कर रहे हैं कि कोरोनावायरस मार्च के अंत तक काबू में आ जाएगा और अप्रैल में हम कुछ खुलकर सांस ले सकेंगे, लेकिन हमारे मन में इसके प्रति शंका है इसलिए अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो हम इसे रद्द कर देंगे। इस साल यह फेस्टिवल 12 मई को होने वाला था और 16 अप्रैल को इसका लाइन-अप अनाउंस होने वाला था।
यह भी हुआ असर
Á14 मार्च को आमिर खान के बर्थडे सेलिब्रेशन पर भी संशय बरकरार है।
Áअंशुमन झा की फिल्म ‘लॉर्ड कर्जन की हवेली’ की शूटिंंग मार्च में यूके में शुरू हुई थी पर अब कोरोना वायरस के चलते शूटिंग पुश कर दी है।
Áमार्वल की फिल्म ‘द फेल्कॉन एंड द विंटर सोल्जर’ की शूटिंग 6 मार्च से प्राग में चल रही थी। कोरोना के डर से इसके आउटडोर शूट कैंसल कर दिया गया है।
एक्सपर्ट्स से समझिए ‘बागी 3’ का नुकसान
ट्रेड एक्सपर्ट राज बंसल बताते हैं,  ‘बागी 3’ चार हजार से ज्यादा स्क्रीन पर रिलीज हुई थी। उसे सौ करोड़ क्लब में चले जाना चाहिए था लेकिन उसे भी 15 से 20 फीसदी का घाटा हुआ है और अभी तक वह 84 करोड़ ही पहुंची है। कई शहरों में सिनेमाघर बंद होने से भी नुकसान हो रहा है।’
बड़ी फिल्मों को 30 करोड़ तक नुकसान
वहीं ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन का कहना है कि इस हालात में अगर बड़ी फिल्में रिलीज होती हैं तो उन्हें कम से कम 20 से 30 करोड़ का नुकसान मुमकिन है। खासतौर पर विदेशी मार्केट से इतना नुकसान होना तय है। ‘सूर्यवंशी’ के बाद अब सभी की नजरें ‘83’ पर हैं। उसके हिसाब से आगे चलकर ‘गुंजन सक्सेना’, ‘कुली नंबर वन’, ‘लक्ष्मी बॉम्ब’, ‘राधे’ की रिलीज की किस्मत तय होगी।
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक
ग्लैमर**
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फरीदाबाद, शुक्रवार 13 मार्च, 2020 |
सीरियल ‘मेरे साईं- श्रद्धा और सबुरी’ में साईं बाबा की भूमिका निभा रहे तुषार दल्वी के तमाम फैंस के बीच उनकी एक नन्ही फैन भी है। देशना दुगड़ जो कि टीवी इंडस्ट्री से ही ताल्लुक रखती हैं। वे हाल ही में तुषार से मिलने ‘मेरे साईं’ के सेट पर पहुंचीं। 11 साल की बाल कलाकार देशना खास तौर पर तुषार से मिलने के लिए अपने पैरेंट्स के साथ ‘मेरे साईं’ के सेट पर पहुंची थीं। तुषार से मिलने को लेकर उत्साहित देशना कहती हैं...‘मेरी फैमिली साईं की भक्त है और बचपन से ही उन्होंने मुझे साईं बाबा की शिक्षाप्रद बातें बताईं। हर साल मेरे पैरेंट्स शिर्डी जाते हैं। मैं इस बात की शुक्रगुजार हूं कि मैं तुषार सर से मिली। उनसे मिलना एक बढ़िया अनुभव था। मैं उम्मीद करती हूं कि मैं सेट पर अक्सर आती रहूंगी।’
तुषार दल्वी से मिलने ‘मेरे साईं’ के सेट पर पहुंचीं देशना
 मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए 9190000071 पर मिस्ड कॉल करें।
मैनेजमेंट फंडा**
मशहूर फिल्ममेकर नासिर हुसैन की पुण्यतिथि पर भतीजे फैजल खान ने भास्कर से खास बात की...
फिल्म ‘जबरदस्त’ के दौरान की बात है। तीन महीने बीत गए पर एक सिचुएशन पर गाना ही नहीं मिल रहा था। इसी दौरान हम सभी बच्चों को लेकर वह पिकनिक मनाने खंडाला गए। वहां पर मैंने एक कैसेट लगाकर गाना बजाया और उन्होंने कहा हमें तो ऐसी ही धुन चाहिए थी। तुरंत रिसेप्शन पर जाकर उन्होंने आर डी बर्मन को फोन किया। कहा कि गाना मिल गया है मैं आपसे मिलने आ रहा हूं। बड़े खुश हो गए और मुझे बहुत शाबाशी दी। शायद वो बच्चों के साथ घुलमिल कर इसलिए रहते थे कि नई पीढ़ी से बहुत कुछ सीखते थे। चाचा जान ने ‘कयामत से कयामत तक’ बनाई जिससे आमिर ने डेब्यू किया। वह नया लड़का था इसलिए फिल्म बिकने में थोड़ी परेशानी अाई। पूरी फैमिली को बैठाकर वो बोले, ‘मैंने यह फिल्म प्रॉफिट या लॉस के बारे में नहीं इन दोनों के भविष्य को सोचकर बनाई है। ताकि ये दोनों अपने पैरों पर खड़े हो जाएं।’
- जैसा उमेश कुमार उपाध्याय को बताया
‘चा चा जान को बच्चों से उन्हें बहुत लगाव था इसलिए पूरी फैमिली के बच्चे उनके बड़े करीब थे। वे हमेशा हमारे लिए तोहफे और चॉकलेट वगैरह लाते थे। कभी-कभी वे हम सबको खंडाला वगैरह की पिकनिक पर भी लेकर जाते थे। हमारे स्कूल के टाइम पर वे ऑफिस जाते थे तो हमें अपनी गाड़ी में लिफ्ट दे देते थे। जब वह ‘मंजिल-मंजिल’ फिल्म डायरेक्ट कर रहे थे तब उनके सेट पर गया था। मैंने देखा कि चाचा जान एक किताब में शार्ट डिवीजन लिखे हुए थे। शूटिंग शेड्यूल से पहले ही वह होमवर्क करके किताब में लिख कर तैयार रखते थे कि टी-शर्ट कैसे लेना है और क्या करना है? जब शूटिंग पर जाते थे तो नोटबुक से रेफर करके शॉट लेते थे। उनके काम करने के स्टाइल ऐसी थी कि सब कुछ आसान हो जाता था।
वे हमें ‘यादों की बारात’ के ट्रायल शोज में भी लेकर गए थे। वे फिल्म को लेकर बच्चों की भी राय लेते थे। कभी-कभी तो रिलीज के वक्त मुंह छिपाकर अपनी फिल्में देखने भी जाते थे। वहां ऑडियंस का रिएक्शन देखते थे। इस तरह से स्टडी करते थे।
फिल्म ‘जबरदस्त’ के दौरान की बात है। तीन महीने बीत गए पर एक सिचुएशन पर गाना ही नहीं मिल रहा था। इसी दौरान हम सभी बच्चों को लेकर वह पिकनिक मनाने खंडाला गए। वहां पर मैंने एक कैसेट लगाकर गाना बजाया और उन्होंने कहा हमें तो ऐसी ही धुन चाहिए थी। तुरंत रिसेप्शन पर जाकर उन्होंने आर डी बर्मन को फोन किया। कहा कि गाना मिल गया है मैं आपसे मिलने आ रहा हूं। बड़े खुश हो गए और मुझे बहुत शाबाशी दी। शायद वो बच्चों के साथ घुलमिल कर इसलिए रहते थे कि नई पीढ़ी से बहुत कुछ सीखते थे। चाचा जान ने ‘कयामत से कयामत तक’ बनाई जिससे आमिर ने डेब्यू किया। वह नया लड़का था इसलिए फिल्म बिकने में थोड़ी परेशानी अाई। पूरी फैमिली को बैठाकर वो बोले, ‘मैंने यह फिल्म प्रॉफिट या लॉस के बारे में नहीं इन दोनों के भविष्य को सोचकर बनाई है। ताकि ये दोनों अपने पैरों पर खड़े हो जाएं।’
‘चा चा जान को बच्चों से उन्हें बहुत लगाव था इसलिए पूरी फैमिली के बच्चे उनके बड़े करीब थे। वे हमेशा हमारे लिए तोहफे और चॉकलेट वगैरह लाते थे। कभी-कभी वे हम सबको खंडाला वगैरह की पिकनिक पर भी लेकर जाते थे। हमारे स्कूल के टाइम पर वे ऑफिस जाते थे तो हमें अपनी गाड़ी में लिफ्ट दे देते थे। जब वह ‘मंजिल-मंजिल’ फिल्म डायरेक्ट कर रहे थे तब उनके सेट पर गया था। मैंने देखा कि चाचा जान एक किताब में शार्ट डिवीजन लिखे हुए थे। शूटिंग शेड्यूल से पहले ही वह होमवर्क करके किताब में लिख कर तैयार रखते थे कि टी-शर्ट कैसे लेना है और क्या करना है? जब शूटिंग पर जाते थे तो नोटबुक से रेफर करके शॉट लेते थे। उनके काम करने के स्टाइल ऐसी थी कि सब कुछ आसान हो जाता था।
फैजल खान
एक्टर और नासिर हुसैन के भतीजे
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टल गई सूर्यवंशी**
बॉलीवुड पर कोरोना का साया**
\\\"बागी 3\\\' के बाद \\\"अंग्रेजी मीडियम\\\' को भी होगा नकुसान
सिनेमाघरों में चल रही टाइगर श्रॉफ की फिल्म ‘बागी 3’ के कलेक्शन पर भी कोरोना की मार पड़ी है। फिल्म के कलेक्शन में करीबन 15 से 20 फीसदी का घाटा हुआ है। माना जा रहा है कि दिल्ली के सिनेमाघरों के बंद होने से सबसे बड़ा नुकसान फिल्म \\\"अंग्रेजी मीडियम\\\' को होगा। चर्चा है कि फिल्म के निर्माता गुरुवार देर रात तक माथापच्ची करते रहे कि आखिरकार फिल्म को आगे खिसकाया जाए या रिलीज किया जाए। ट्रेड पंडितों की माने तो इससे फिल्म के कलेक्शन में 20 से 25 परसेंट की गिरावट आएगी।
हॉलीवुड की बात करें तो वहां की भी कई फिल्मों की रिलीज टाली जा रही है। उससे भी बड़ी खबर यह है कि ऑस्ट्रिेलिया में शूटिंग करने गए दिग्गज एक्टर टॉम हैंक्स और उनकी प|ी कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए हैं।
को रोनावायरस के चलते अब अक्षय कुमार की फिल्म ‘सूर्यवंशी’ भी टल गई है। गुरुवार को देर शाम मेकर्स ने इसकी रिलीज डेट टालने की घोषणा की। हालांकि, उन्होंने नई रिलीज डेट की अनाउंसमेंट नहीं की। फिल्म की रिलीज डेट टलने का एक अन्य कारण यह भी है कि 31 मार्च तक दिल्ली सरकार ने सभी सिनेमाघर बंद रहने का निर्णय किया है। ऐसे में मेकर्स को रिलीज डेट बढ़ानी ही पड़ी क्योंकि दिल्ली बहुत बड़ी टेरिटरी है। उसके बगैर फिल्म की रिकवरी नामुमकिन है। इसके अलावा जम्मू और केरल के सिनेमाहॉल ऑलरेडी बंद हो चुके हैं। अब जानकारों का मानना है कि इस शनिवार तक रणवीर सिंह की फिल्म ‘83’ के मेकर्स भी इसकी रिलीज डेट के बदलाव के बारे में आधिकारिक घोषणा करेंगे।
दिल्ली के निर्णय को देखते हुए नोएडा के थिएटर्स को भी बंद किया जा सकता है। हरियाणा ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया है इसलिए वहां भी जल्द ही सिनेमाघर बंद होने की एडवाइजरी जारी होना तय है। राजस्थान में कोरोना का सबसे ज्यादा खतरा है तो वहां की सरकार ही जल्द ही एक-दो दिनों में सिनेमाघरों के लिए एडवाइजरी जारी कर सकती है। मुंबई ने इस संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
जम्मू और केरल के बाद दिल्ली में भी बंद हुए सिनेमाघर**
हरियाणा और राजस्थान भी जारी कर सकते हैं एडवाइजरी
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हॉलीवुड के दिग्गज स्टार टॉम हैंक्स वायरस की गिरफ्त में**
Radhika
Fashion
parade
Huma Qureshi
हुमा ऑरेंज व्हाइट कलर के हूडी जैकेट में नजर आईं। उन्होंने कलरफुल शूज भी पहने थे।
Rakul Preet Singh
रकुल प्रीत सिंह ने प्रिंटेड शीर टॉप और मिनी स्कर्ट से अपने लुक को कम्प्लीट किया। साथ ही व्हाइट स्नीकर्स से उन्होंने अपने स्टाइल को फ्लॉन्ट किया।
Mouni Roy
मौनी रॉय ने बेहद स्टाइलिश अंदाज में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनकी स्टाइलिंग अनुराधा खुराना ने की। इस मौके पर उन्होंने एपापॉप का आउटफिट चूज किया। इसके साथ उन्होंने यूनीक स्टाइल में बेल्ट और क्लच बैग का शोऑफ किया।
Urvashi Rautela
उर्वशी रौतेला ने इस मौके पर शॉर्ट स्कर्ट के साथ ग्रे मैटेलिक सूट पहना। उन्होंने नो ज्वेलरी सिंपल लुक में अपनी प्रेजेंस प्रेफर की। इस दौरान उनके स्माइलिंग फेस ने सभी का ध्यान खींंचा।
फिल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’ आज रिलीज होगी। इससे एक रात पहले मेकर्स ने एक स्क्रीनिंग पार्टी रखी। जिसमें बॉलीवुड की कई हसीनाओं ने ग्लैमरस अंदाज में दस्तक दी। इस दौरान को-इंसीडेंटली ज्यादातर एक्ट्रेसेज ने शॉर्ट ड्रेसेज ही पहने थे। सभी ने अपने फैंशन सेंस से पार्टी की शान बढ़ाई।
राधिका मदान फ्लोरल शॉर्ट ड्रेस में पहुंची। इसके साथ उन्होंने ब्लैक पम्प्स पेयर किए।
Pooja Hegde
पूजा हेगड़े ने सुनहरे टॉप और ब्लैक जीन्स के साथ फर वाली सैंडल्स पहनीं।
‘मौका मिला तो कंगना के साथ काम करूंगा’
कंगना रनोट को लेकर डायरेक्टर अहमद खान ने एक बार फिर से बयान दिया है। अहमद ने कहा, ‘कंगना बहुत बेहतरीन एक्ट्रेस हैं। अगर कभी मुझे मौका मिला तो मैं कंगना के साथ जरूर काम करूंगा। हमारे बीच कोई नेगेटिविटी नहीं है। हम लोग एक ही इंडस्ट्री के हैं और मिल-जुल कर रहते हैं। वो ‘लेडी बागी’ हैं। जब मैंने उनकी फिल्म ‘धाकड़’ का टीजर देखा तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। अगर कंगना को मेरी स्क्रिप्ट पसंद आएगी तो मैं उनके साथ जरूर काम करूंगा।’
‘अपनों से बेवफाई’ करने अप्रैल में आएंगे इरफान
इरफान खान की फिल्म ‘अपनों से बेवफाई’ इस साल 2 अप्रैल को रिलीज होगी। रिपोर्ट्स की मानें तो यह फिल्म दो साल पहले ही पूरी हो गई थी लेकिन अटकी हुई थी। फिल्म के डायरेक्टर प्रकाश भालेकर ने इस खबर को कन्फर्म करते हुए कहा, ‘पैसे की कमी के कारण यह फिल्म अभी तक रिलीज नहीं हो पाई। यह इरफान की तबीयत खराब होने से पहले ही पूरी हो चुकी थी। फिर भी ये दो साल से लटकी हुई थी। हालांकि अब यह जल्द ही रिलीज होगी।’
मनोज बाजपेयी ने हाल ही में अपनी 2007 में रिलीज हुई फिल्म ‘1971’ की यादों को फैंस के साथ फिल्म का पोस्टर शेयर करते हुए लिखा, ‘फिल्म की कुछ यादें आपको छोड़ती नहीं हैं। ‘1971’ ऐसी ही एक फिल्म है। जिसकी शूटिंग के दौरान अत्यधिक सर्दी में मनाली में बिताए गए वो पल याद आते हैं। जहां लगभग दो बार मेरी जान जाने से बची थी... मैं उन 60 दिनों के फिल्मांकन को नहीं भूल सकता हूं।’ बहरहाल, मनोज इन दिनों \\\"सूरज पे मंगल भारी\\\' की शूटिंग में जुटे हुए हैं।
मनाली में शूटिंग के दौरान दो बार जान गंवाने से बचे थे मनोज
चर्चा है कि यह एक लव स्टोरी है जिसका नरेशन कार्तिक को किया जा चुका है। इस फिल्म को करण जौहर प्रोड्यूस करेंगे। कार्तिक पहले से ही इस बैनर की ‘दोस्ताना 2’ में काम कर रहे हैं। लीड एक्ट्रेस पर फैसला बाकी है।
शशांक खेतान ने बीते दिनों अनाउंसमेंट की थी कि वे वरुण धवन के साथ ‘मिस्टर लेले’ बनाने जा रहे हैं पर यह फिल्म वरुण के बिजी शेड्यूल के चलते शुरू नहीं हो पाई। अब सुनने में आया है कि शशांक ने वरुण की फिल्म को होल्ड पर डालते हुए कार्तिक आर्यन के साथ अपनी अगली फिल्म शुरू करने का फैसला किया है।
वरुण की ‘मिस्टर लेले’ होल्ड कर, कार्तिक की फिल्म पर जुटे शशांक
उर्वशी रौतेला स्टारर फिल्म ‘वर्जिन भानुप्रिया’ 12 जून को देशभर में रिलीज होने वाली है। अजय लोहान निर्देशित इस फिल्म में उर्वशी एक ऐसी लड़की का रोल निभा रही हैं जिसका ताल्लुक एक रूढ़ीवादी परिवार से है। अपने टाइटल के विपरीत यह एक फैमिली कॉमेडी फिल्म है, जो युवाओं और उनके परिवार के बीच के रिश्तों पर फोकस करती है। इस फिल्म में उर्वशी के अलावा गौतम गुलाटी, अर्चना पूरण सिंह, डेलनाज ईरानी, राजीव गुप्ता और ब्रिजेंद्र काला जैसे कलाकार भी नजर आएंगे।
12 जून को रिलीज होगी उर्वशी स्टारर ‘वर्जिन भानुप्रिया’
परदे के पीछे**