49 दिन बाद फिर तय, सुनील चौधरी ही अध्यक्ष; मूलसिंह हारे हुए प्रत्याशी

3 वर्ष पहले
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  • चुनावी खर्च समय पर नहीं देने के मामले को कुलपति प्रो. गुलाबसिंह चौहान का सुनने से इंकार
  • बोले - चुनावी हिसाब का बिंदु मूल शिकायत में था ही नहीं तो कैसे सुना जा सकता है?  

जोधपुर. जेएनवीयू छात्रसंघ अध्यक्ष सुनील चौधरी के चुनावी खर्च समय पर नहीं देने के मामले को कुलपति प्रो. गुलाबसिंह चौहान ने सुनने से इनकार करते हुए शेष शिकायतों के आधार पर फैसला सुनाते हुए उनके निर्वाचन को सही बताया है। इस फैसले के बाद अब सुनील चौधरी ही जेएनवीयू छात्रसंघ के अध्यक्ष रहेंगे।

 

प्रो. चौहान ने आदेश में लिखा है कि वे केवल उन शिकायतों पर फैसला कर सकते हैं, जिन्हें शिकायत निवारण प्रकोष्ठ अर्थात् ग्रीविएंस कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। मूलसिंह की मूल शिकायत में चुनावी खर्च समय पर देने वाला बिंदु था ही नहीं। जेएनवीयू के छात्रसंघ चुनाव में शिकायतों पर ग्रीविएंस कमेटी ने सुनील चौधरी की शिकायतों को उचित मानते हुए एबीवीपी प्रत्याशी मूलसिंह राठौड़ का नामांकन चुनाव के परिणामों के बाद रद्द कर दिया था।

 

दूसरी ओर मूलसिंह राठौड़ की ओर से प्रस्तुत 30 बिंदुओं की शिकायतों को खारिज कर दिया गया। इस मामले में मूलसिंह राठौड़ ने कुलपति के समक्ष अपील की। प्रो. चौहान ने अपीलीय अधिकारी के रूप 12 अक्टूबर, 2018 को सुनवाई की थी। बुधवार को उन्होंने अपना फैसला सुनाया। फैसले के अनुसार मूलसिंह राठौड़ का नामांकन रद्द करने का ग्रीविएंस कमेटी का फैसला अपास्त किया जाता है तथा सुनील चौधरी के निर्वाचन से जुड़ी मूलसिंह की शिकायतों को खारिज किया जाता है। 

 


अब कुलपति के नाते सुननी होगी हिसाब समय पर नहीं देने की शिकायत: जेएनवीयू के छात्रसंघ पदाधिकारियों पर समय पर चुनाव खर्च नहीं देने का खतरा अभी तक समाप्त नहीं हुआ है। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार उन्हें 26 सितंबर तक ऑडिटेड हिसाब देना था, लेकिन किसी ने नहीं दिया। इस मामले में कुलपति प्रो. चौहान ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि वे अपीलीय अधिकारी के रूप में यह नहीं सुन सकते, क्योंकि यह मूल शिकायतों में नहीं थी, लेकिन अब कुलपति के रूप में ताे यह शिकायत सुननी ही होगी।

 

इसलिए सुनील चौधरी अध्यक्ष बने रहेंगे  
 

  • मतगणना के दौरान मूलसिंह राठौड़ की ओर से जो आपत्तियां थीं, उनका निस्तारण उसी दिन कर दिया गया था।  
  • सुनील के दस्तावेजों को लेकर मूलसिंह राठौड़ की ओर से दर्ज आपत्तियां खारिज कर दी गईं।
  • चुनावी खर्च समय पर नहीं देने की शिकायत मूल 30 शिकायतों में शामिल नहीं थीं इसकी उसकी सुनवाई से वीसी ने इंकार किया।

मूलसिंह की आपत्तियां इन तर्कों पर खारिज

  • मतगणना के दौरान जो अनियमितताओं के आरोप लगाए थे, वीडियोग्राफी देखकर खारिज कर दिए गए।
  • ग्रीविएंस कमेटी के गठन पर सवाल उठाया, लेकिन यह सवाल मतदान, मतगणना व चुनाव परिणाम के बाद लगाने की वजह से खारिज हुआ।
  • चुनावी खर्च की शिकायत ग्रीविएंस कमेटी को दी शिकायतों में नहीं था, जिसकी वजह से उन्हें वीसी ने सुनने से मना कर दिया।

मूलसिंह का नामांकन खारिज होना अर्थहीन

चुनाव प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद मूलसिंह का नामांकन खारिज होना अर्थहीन है, क्योंकि मूलसिंह हारा हुआ प्रत्याशी है तथा संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपेक्स पद पर केवल एक बार चुनाव लड़ सकता है। मूलसिंह को भविष्य में वैसे भी चुनाव का अवसर नहीं मिलेगा तो हारे प्रत्याशी का नामांकन रद्द करने का क्या औचित्य?

 

चुनावी खर्च का हिसाब नहीं देने का नोटिस सीआरओ की ओर से दिया गया था, जो नियमानुसार गलत है। यह नोटिस ग्रीविएंस कमेटी की ओर से आना चाहिए था। मैंने 1 अक्टूबर को हिसाब से अवगत करवा दिया था। 8 अक्टूबर को ऑडिटेड हिसाब भी दे दिया है। -सुनील चौधरी, अध्यक्ष

 

मेरे साथ अन्याय हुआ है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अब मैं वीसी व कुलसचिव के समक्ष शिकायत दर्ज कराऊंगा। फिर भी मुझे न्याय नहीं मिला तो कोर्ट की शरण में जाऊंगा। -मूलसिंह राठौड़, एबीवीपी प्रत्याश

 

पूर्ण पारदर्शिता के साथ चुनाव व मतगणना करवा रिजल्ट घोषित किए। शिकायतों की सुनवाई के दौरान ग्रीविएंस कमेटी व कुलपति के समक्ष मैंने अपना पक्ष रख दिया। मेरी इतनी ही जिम्मेदारी थी। - प्रो. अवधेश शर्मा, सीआरओ

 

कमेटी ने हर शिकायत का निस्तारण पारदर्शिता से करने की कोशिश की। वीसी अपीलीय अधिकारी हैं, उन्होंने भी पूरा अध्ययन कर फैसला लिया होगा। - प्रो. कमलेश पुरोहित, चेयरपर्सन, ग्रीविएंस कमेटी

 

यह फैसला पूर्ण मंथन कर नियमानुसार व न्यायोचित लिया गया है। सुनील चौधरी का निर्वाचन सही है तथा मूलसिंह का नामांकन रद्द करना गलत था। - प्रो. गुलाबसिंह चौहान, कुलपति जेएनवीयू