ऑस्ट्रेलियन NCAP टेस्ट:2021 किआ कार्निवाल पर 7 क्रैश टेस्ट किए, टक्कर के दौरान इसके परखच्चे उड़ गए; जानिए कितनी सेफ है ये कार

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
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किसी भी कार को खरीदने से पहले ग्राहक उसकी सेफ्टी के बारे में जरूर जानना चाहता है। NCAP (न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम) अपने कार क्रैश टेस्ट में उसकी सेफ्टी के लिए स्टार देती है। इसमें एडल्ट और चाइल्ड सेफ्टी को लेकर अलग-अलग रेटिंग दी जाती है। ऑस्ट्रेलियन NCAP ने 2021 किआ कार्निवाल का क्रैश टेस्ट किया है। आप भी जानिए ये कार कितनी सुरक्षित हैं।

2021 किआ कार्निवाल का क्रैश टेस्ट
NCAP ने कार्निवाल पर 7 क्रैश टेस्ट के साथ कुल 9 तरह के टेस्ट किए। इसमें फ्रंटनल ऑफसेट, साइड इम्पैक्ट, फुल विड्थ, ऑब्लीक पोल, फार-साइड इम्पैक्ट, व्हिपलैश टेस्ट, पेडेस्ट्रियन प्रोटेक्शन टेस्ट, ऑटोनोमस इमरजेंसी ब्रेकिंग, लेन सपोर्ट सिस्टम जैसे टेस्ट शामिल रहे। इन सभी टेस्ट के दौरान कार के पैसेंजर पूरी तरह सेफ रहे। इसलिए इसे 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग दी गई।

  • फ्रंटनल ऑफसेट क्रैश टेस्ट : सबसे पहले इसका फ्रंटनल ऑफसेट (MPDB) टेस्ट किया गया। इस टेस्ट में कार की सामने की तरफ से दूसरे व्हीकल से टक्कर कराई। हालांकि, कार्निवाल की स्पीड क्या थी ये नहीं बताया। इस टेस्ट के दौरान कार के बोनट वाला हिस्सा पूरी तरह डैमेज हो गया, लेकिन कार के अंदर के सभी एयरबैग एक्टिव हो गए। यानी ड्राइवर, फ्रंट पैसेंजर के साथ रियर एयरबैग भी ओपन हो गए।
  • साइड इम्पैक्ट क्रैश टेस्ट : इस टेस्ट के दौरान खड़ी कार्निवाल से व्हीकल आकर टकराता है। जैसे ही व्हीकल ने कार को टक्कर मारी उसके अंदर राइट साइड के एयरबैग्स ओपन हो गए।
  • फुल विड्थ क्रैश टेस्ट : इस टेस्ट के दौरान कार कार को हाई स्पीड के साथ एक दीवार से टकराया गया। जैसे ही कार दीवार से टकराई ड्राइवर और फ्रंट पैसेंजर का एयरबैग ओपन हो गया।
  • ऑब्लीक पोल क्रैश टेस्ट : इस टेस्ट के दौरान कार को राइट साइड से स्पीड के साथ एक पोल से टकराया गया। इस टक्कर के होते ही साइट साइड के एयरबैग्स ओपन हो गए।

कैसे किया जाता है क्रैश टेस्ट?
NCAP द्वारा लगभग सभी कंपनियों की कार का क्रैश टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट के लिए कार में डमी का इस्तेमाल किया जाता है। ये डमी इंसान की तरह तैयार किया जाता है। टेस्ट के दौरान गाड़ी को फिक्स स्पीड से किसी हार्ड ऑब्जेक्ट के साथ टकराया जाता है। इस दौरान कार में 4 से 5 डमी का इस्तेमाल किया जाता है। बैक सीट पर बच्चे की डमी होती है। ये चाइल्ड सेफ्टी सीट पर फिक्स की जाती है। क्रैश टेस्ट के बाद कार के एयरबैग ने काम किया या नहीं, डमी कितनी डैमेज हुई, इन सब के आधार पर रेटिंग दी जाती है।