• Hindi News
  • Tech auto
  • Apple And Samsung Set Locally Manufacture Smartphones Worth Rs. 37,000 Crore In FY22

स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग का रिकॉर्ड बनेगा:इस साल 14 हजार करोड़ कीमत के एपल-सैमसंग फोन एक्सपोर्ट करेगा इंडिया, PIL स्कीम से मिलेगा नया मुकाम

नई दिल्ली7 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

एपल और सैमसंग फाइनेंशियल ईयर 2022 में 5 बिलियन डॉलर (करीब 37,000 करोड़ रुपए) के स्मार्टफोन की मैन्युफैक्चरिंग करने को तैयार है। ये प्रोडक्शन सरकार की फ्लैगशिप लिंक्ड इनसेंटिव (PIL) योजना के तहत किया जाएगा। सरकार और इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक ये सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य से 50% अधिक है। इस दौरान योजना के तहत 2 बिलियन डॉलर (करीब 14,000 करोड़ रुपए) के फोन एक्सपोर्ट किए जाएंगे।

एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया कि ग्लोबल कंपनियों को इस साल अपना टारगेट को पूरा करने की उम्मीद है। हैंडसेट के लिए PIL योजना पांच साल में लगभग 39,000 करोड़ रुपए के इंसेंटिव का वादा करती है।

सिर्फ 3 कंपनियों को इंसेंटिव मिलने की संभावना
फ्लैगशिप लिंक्ड इनसेंटिव (PIL) पहली और बड़ी योजना है जिसकी मदद से भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य चीनी मैन्युफैक्चरर्स को दूर करना है। कोरियन कंपनी सैमसंग और एपल के स्मार्टफोन का प्रोडक्शन भारत में पेगाट्रॉन, फॉक्सकॉन और विस्ट्रॉन फैक्ट्री में किया जा रहा है।

एक अधिकारी ने बताया कि इस योजना के तहत फाइनेंशियल ईयर 2022 के लिए योग्य आवेदकों के लिए सरकार का लक्ष्य 3.2 अरब डॉलर (करीब 23,000 करोड़ रुपए) के करीब था। अभी इस स्कीम का से सिर्फ तीन कंपनियों को इंसेंटिव मिलने की उम्मीद है क्योंकि भारत FIH और पेगाट्रॉन ने अभी तक इस कैटेगरी में फोन का प्रोडक्शन शुरू नहीं किया है।

लागत कम होने से शाओमी PIL के योग्य नहीं
फॉक्सकॉन के बाद एपल की दूसरी सबसे बड़ी ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी पेगाट्रॉन है। आने वाले कुछ महीनों में भारत में इसके प्रोडक्शन शुरू करने की उम्मीद है। भारत FIH वर्तमान में चीनी कंपनी शाओमी के लिए स्मार्टफोन बनाता है। क्योंकि इन डिवाइस के प्रोडक्शन की प्रति यूनिट लागत 15,000 रुपए से कम है, इसलिए ये PIL योजना के तहत प्रोत्साहन के लिए योग्य नहीं है।

ग्लोबल मैन्युफैक्चरर्स इस साल अपने स्मार्टफोन PIL टारगेट को पार करने के लिए तैयार हैं। कैल्कुलेशन के मुताबिक, सैमसंग, विस्ट्रॉन और फॉक्सकॉन द्वारा लगभग 5 अरब डॉलर के इंक्रीमेंटल प्रोडक्शन की उम्मीद है। भारत FIH अगले फाइनेंशियल ईयर में चुनौती के लिए भी तैयार है। इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) के अध्यक्ष पंकज मोहिंद्रू ने कहा कि अगले फाइनेंशियल ईयर (1 अप्रैल से शुरू) से पेगाट्रॉन के उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। ICEA एपल, फॉक्सकॉन, विस्ट्रॉन का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन इसमें सैमसंग शामिल नहीं है।

सैमसंग को दूसरे साल इंसेंटिव का फायदा
सैमसंग दूसरे साल के लिए इंसेंटिव का लाभ ले रहा है। इसका मतलब यह है कि कंपनी ने 2019-20 में 15,000 रुपए या उससे ज्यादा वाली हैंडसेट कैटेगरी में 8,000 करोड़ रुपए के फोन का प्रोडक्शन किया है। एपल के कॉन्टैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के लिए यह पहला साल है। इसका मतलब है कि ताइवान के मैन्युफैक्चरर्स को इंसेंटिव लेने के लिए 2019-20 में अपने प्रोडक्शन पर एक ही कैटेगरी में 4,000 करोड़ रुपए के स्मार्टफोन का प्रोडक्शन करने की आवश्यकता है।

पहले दो सालों के लिए इंसेंटिव रेट 6%, तीसरे और चौथे के लिए 5% और पांचवें साल के लिए 4% है। इसका मतलब है कि सरकार कंपनी की प्रोडक्शन लागत का 6% इंसेटिंव के रूप में पेमेंट करेगी। यदि वह दूसरे साल में टारगेट पूरा करती हैं और तीसरे और चौथे साल में 5% और पांचवें साल में ऐसा करने पर 4% का पेमेंट करेगी।

सैमसंग को 900 करोड़ रुपए लाभ मिला
सैमसंग को फाइनेंशियल ईयर 2021 से शुरू होने वाली ओरिजनल PLI योजना की समयसीमा रखने की परमिशन दी गई थी, जिसमें उसने पहले साल के इंसेंटिव के तौर पर 900 करोड़ रुपए का लाभ उठाया। लेकिन एपल के कॉन्टैक्ट मैन्युफैक्चरर्स सहित अन्य लोगों के लिए पहला फेसियल या फाइनेंशियल ईयर 2022 है।