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टेक:कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप पर एपल-गूगल का नया फैसला, यूजर की लोकेशन ट्रैक नहीं करेंगे

न्यूयॉर्क2 वर्ष पहले
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कंपनी इस बात की पुष्टि कर चुकी है कि कोरोना के खत्म होने के बाद कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग सिस्टम को भी बंद कर दिया जाएगा। - Dainik Bhaskar
कंपनी इस बात की पुष्टि कर चुकी है कि कोरोना के खत्म होने के बाद कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग सिस्टम को भी बंद कर दिया जाएगा।
  • लगभग 99 फीसदी स्मार्टफोन गूगल और एपल के ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करते हैं गूगल-एपल मिलकर कोरोना मरीज को ट्रैक करने वाले सिस्टम पर काम कर रही है

टेक कंपनी एपल और गूगल ने सोमवार को बताया कि वे अपने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप में लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक लगाने जा रही है। दोनों ही कंपनियां मिलकर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग सिस्टम पर काम कर रही है, जिससे कोरोना संक्रमित को ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे अन्य लोगों को संक्रमित होने से बचाया जा सकेगा। कंप​नियों को मानना है कि कोरोनावायरस के संक्रमण को ट्रैक करने के लिए आजकल कई ट्रैकिंग ऐप्स बनाए जा रहे हैं और इनके इस्तेमाल की वजह से यूजर्स के प्राइवेसी को खतरा हो सकता है। 

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 99 फीसदी स्मार्टफोन गूगल और एपल के ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करते हैं। गूगल ने पिछले महीने कहा था कि दोनों मिलकर एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रहे हैं जो कोरोना पॉजीटिव व्यक्ति के आस पास या उससे मिलने जुलने वाले लोगों को अलर्ट करेगा। कंपनी ने कहा था कि सिर्फ पब्लिक हेल्थ अथॉरिटी को ही इस तकनीक को इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी।

यूजर के प्राइवेसी हमारी प्राथमिकता: गूगल-एपल
दोनों कंपनियों का कहना था कि प्राइवेसी और सरकार द्वारा लोगों के डेटा को इस्तेमाल करने के बचाना ही हमारी प्राथमिकता है। यह सिस्टम ब्लूटूथ सिग्नल के जरिए काम करेगा और संक्रमितों की पहचान करने के लिए न जीपीएस लोकेशन इस्तेमाल करेगा न स्टोर करेगा। लेकिन ऐप के डेवलपर्स का कहना था कि यह जरूरी है कि हमें यूजर के जीपीएस लोकेशन ट्रैक करने की अनुमति दी जाए ताकि कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग ऐप के जरिए यह ट्रैक किया जाएगा कि वायरस कहां फैल रहा है साथ ही हॉटस्पॉट की पहचान की जा सके।

लोकेशन ट्रैकिंग में होती है बैटरी की ज्यादा खपत 
एपल-गूगल के कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप में जीपीएस लोकेशन इस्तेमाल न करने के फैसला लिया है क्योंकि उनका मानना है कि ये अनस्टेबल है और इससे बैटरी की खपल ज्यादा होगी। लेकिन  पब्लिक हेल्थ अथॉरिटी इसी के भरोसे हैं ताकि वे अपने लोगों को ट्रैक कर सके। इसके अलावा यह खामियां भी सामने आई कि एपल और गूगल के डिवाइस कुछ समय बाद बैटरी सेव करने और अन्य कारणों से ब्लूटूथ बंद देते हैं, फिर इन्हें यूजर को ही दोबारा ऑन करना होता है।

गूगल-एपल के सिस्टम हमारे अनुकूल नहीं- सॉफ्टवेयर कंपनी ट्वेंटी
कुछ ऐप्स अपने दृष्टिकोण पर ही अड़ी है। सॉफ्टवेयर कंपनी ट्वेंटी जिसने उताह हेल्दी टूगेदर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप बनाई है का कहना है कि हमारी ऐप ब्लूटूथ और जीपीएस दोनों पर काम करती है। और एपल-गूगल के नए टूल के बगैर भी बेहतर तरीके से काम कर रही है। उन्होंने आगे बताया कि अगर उनके अप्रोट हमसे से ज्यादा बेहतर होती तो हम उनके फीचर को अपनी ऐप में जरूर शामिल करते। कनाडा की कंपनी अल्बर्टा प्रांत के कहा कि जीपीएस डेटा नहीं कलेक्ट करते और कभी भी एपल-गूगल सिस्टम को अपनी एबीट्रेसटूगेगदर ऐप में इस्तेमाल नहीं करेंगे।

डेटा लीक यूजर को नुकसान पहुंचा सकता है- एक्सपर्ट
प्राइवेसी एक्सपर्ट ने बताया कि किसी यूजर के स्वास्थ्य संबंधित लोकेशन डेटा लीक हो जाए तो उससे यूजर को काफी नुकसान पहुंचाया जा सकता है। एपल-गूगल ने कहा कि वे कॉन्टैक्ट सिस्टम इस्तेमाल करने के लिए हर देश के लिए अलग ऐप तैयार करेगा ताकि इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि वे उन देशों का समर्थन करेंगे जो राज्य या क्षेत्रीय दृष्टिकोण का विकल्प चुनते हैं।

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