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रिपोर्ट:जनवरी से बढ़ सकती है कार समेत अन्य वाहनों की कीमतें, वजह- इनपुट और कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी

नई दिल्ली6 महीने पहले
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उम्मीद है कि ट्रैक्टरों का घरेलू होलसेल वित्त वर्ष 2021 में 16 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। - Dainik Bhaskar
उम्मीद है कि ट्रैक्टरों का घरेलू होलसेल वित्त वर्ष 2021 में 16 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा।
  • यात्री वाहनों के होलसेल में सालाना आधार पर 14% तक की गिरावट हो सकती है
  • ट्रैक्टर सेगमेंट का वित्त वर्ष 2020-21 में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है

भारत की ऑटोमोबाइल कंपनियों को बिक्री और राजस्व में सामान्य स्थिति हासिल करने से पहले एक लंबा सफर तय करना होगा। जहां मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 के शेष महीनों में यात्री वाहनों की मांग कम रहने की उम्मीद है, वहीं निर्माताओं को भी इनपुट और कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी की भरपाई के लिए कीमतें बढ़ाने की संभावना है।

वित्त वर्ष 2020-21 में लगभग हर सेगमेंट में गिरावट
केयर रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कारणों से यात्री वाहनों के होलसेल में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है। अन्य ऑटोमोबाइल सेगमेंट में, 2-पहिया वाहनों के होलसेल में 18 प्रतिशत तक, 3-पहिया के होलसेल में 73 प्रतिशत तक; और कमर्शियल वाहनों के होलसेल में वित्त वर्ष 2020-21 में 30 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज कर सकते हैं।

ट्रैक्टर सेगमेंट ने किया सबसे अच्छा प्रदर्शन
दूसरी ओर, ट्रैक्टर सेगमेंट का वित्त वर्ष 2020-21 में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है, क्योंकि इस साल इस कृषि मशीनरी के लिए एक लचीली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मांग बढ़ी है। घरेलू होलसेल दिसंबर 2020 और फरवरी 2021 के बीच कम होने और मार्च 2021 से तेजी लाने की उम्मीद है। यह उम्मीद है कि ट्रैक्टरों का घरेलू होलसेल वित्त वर्ष 2020-21 में 16 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा।

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सबसे ज्यादा नुकसान पैसेंजर वाहन सेगमेंट में
हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि देश की आर्थिक गतिविधियों के साथ अपने उच्च संपर्कों के कारण, कमर्शियल वाहन गिरावट दर्ज कराने वाला पहला और रिकवरी दर्ज कराने वाला आखिरी सेगमेंट है। यह उम्मीद की जाती है कि कोविड -19 वैक्सीन का डोमेस्टिक ट्रांसपोर्टेशन, निकट भविष्य में कमर्शियल वाहनों के लिए नए मांग बढ़ाने के रूप में काम कर सकता है।

ऑटो सेक्टर से सीधे जुड़े हैं कई उद्योग
ऑटोमोटिव सेक्टर की वृद्धि को प्राप्त करना महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कई उद्योगों जुड़े हुए हैं। वाहनों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए स्टील, लोहा, एल्युमिनियम, पेंट, प्लास्टिक, कांच, चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रबर, आदि की आवश्यकता होती है। इस क्षेत्र में ऑटोमोबाइल फाइनेंसिंग के रूप में बैंकिंग/एनबीएफसी उद्योग का महत्वपूर्ण योगदान है, जो रिटेल लोन के सबसे सामान्य रूप में से एक है।

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सेक्टर में लगभग 2,300 करोड़ का नुकसान हुआ

  • यह सेक्टर विज्ञापन समेत तेल और गैस के मुख्य एंड-यूजर्स के बीच सबसे अधिक खर्चा करने वालों में से एक है। संपूर्ण भारतीय अर्थव्यवस्था में मौजूद ऑटोमोटिव सेक्टर की विशाल वैल्यू चेन भारत की मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान करती है।
  • इसलिए, इस सेक्टर में जॉब क्रिएशन के साथ-साथ समावेशी विकास और सामुदायिक विकास लाने की क्षमता है। इस बीच, ऑटोमोबाइल ओईएम, डीलरों और सहायक कंपनियों को प्रति दिन 2,300 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ और लॉकडाउन के दौरान लगभग 3.5 लाख लोग बेरोजगार हुए हैं।

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