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ई-मोबिलिटी की मुश्किलें:कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों की रिसेल वैल्यू से बैंक परेशान, इन्हें लोन देने से कतरा रही कंपनियां

नई दिल्ली2 महीने पहले
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  • कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों को लोन देने में बैंक पीछे हट जाते हैं
  • इसी कारण कई लोग ई-वाहन खरीदाने की योजना ही बदल देते हैं

इलेक्ट्रिक वाहनों के सामने एक नई समस्या उभरती नजर आ रही है। बैंक इलेक्ट्रिक वाहनों की रिसेल वैल्यू को लेकर चिंतित हैं। कंपनियां मॉर्गेज (mortgage) की स्थिति में ईवी की रिसेल वैल्यू को लेकर चिंतित हैं।

कंपनियों का मानना है कि कम आय वाले लोगों में कमर्शियल गतिविधियों के लिए रिक्शा और माल ढोने वाले इलेक्ट्रिक थ्री और फोर व्हीलर खरीदना के प्रति रुझान बढ़ा है क्योंकि स्टैंडर्ड वाहनों की तुलना में इनकी कीमत और मेंटेनेंस काफी कम है। लेकिन विक्रेता पर्सनल और पब्लिक सेक्टर बैंकों की मदद के इस व्यवसाय के विकल्प को अपनाने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि बैंक उनकी पर्याप्त सहायता नहीं कर रहे हैं। इसी कारण कई लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की योजना ही बदल देते हैं या तो स्टैंडर्ड वाहन (पेट्रोल/डीजल) पर चले जाते हैं।

इलेक्ट्रिक वाहन की रिसेल वैल्यू को लेकर बैंक चिंतित
बेंगलुरु स्थित ओमेगा सेकी मोबिलिटी के एमडी देब मुखर्जी ने बताया कि- भारत में 90% वाहन फाइनेंस के माध्यम से बेचे जाते हैं लेकिन जब ईवी की बात आती है, विशेष रूप से कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों की तो बैंक पीछे हट जाते हैं। वे कुछ वर्षों के बाद वाहनों और उनकी बैटरी के मूल्य और उनके ओवरऑल परफॉर्मेंस जैसे पहलुओं पर चिंता व्यक्त करते हैं।

हालांकि इलेक्ट्रिक टू व्हीलर के मामले में ऐसा नहीं है। कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में, बैंकरों का मानना ​​है कि इसके ग्राहक किस्तों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त कमाई नहीं कर पाते, जिस कारण लोन चुकाने में देरी हो सकती है। अक्सर यह धारणा प्रवासियों के लिए होती है और बैंक इनकी कृषि भूमि को वसूली के लिए गिरवी नहीं रखते हैं।

बैंकों की चिंता भी काफी हद तक सही है
हैदराबाद की ओएचएम ऑटोमोटिव्स के संस्थापक, निर्मल रेड्डी ने कहा कि बैंकों की चिंता काफी हद तक सही भी है। बैंक सभी ईवी को समान नजरिया से देखते हैं। उनका मानना है कि इन्हें चीनी कंपोनेंट से बनाया जाता है। वे ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (ओईएम) और चीन के आयात हुए वाहनों के बीच अंतर करने में विफल रहते हैं।

स्थिति ठीक होने में कुछ समय लगेगा
महाराष्ट्र सरकार की मुख्य ऊर्जा अधिकारी रूशी एस ने कहा कि वित्त संस्थानों को क्षेत्रीय रूप से निर्मित ऑटोमोबाइल को समझने में कुछ समय लगेगा। उन्होंने कहा कि वारंटी, इन्वेस्टमेंट पर तुरंत रिटर्न, वाहनों और बैटरी की रिसेल वैल्यू और ई-वाहनों के लाभ से संबंधित डेटा को शेयर करना बैंकों को अपना रवैया बदलने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

सरकार को इस दिशा में उचित कदम उठाने की जरूरत
ईवी सेक्टर को उम्मीद है कि संघीय सरकार अपना काम करेगी। मुख्य रूप से चेन्नई स्थित सीके मोटर्स के रिजनल हेड ओमकारा मूर्ति ने संघीय सरकार को ई-वाहन को और ज्यादा मूल्यवान बनाने के लिए कदम उठाने के बारे में कहा है। कमर्शियल ईवी सेगमेंट में एक बड़ा बाजार है, लेकिन इन वाहनों की कीमत के लिए, सरकार को ईवी खरीदारों का सपोर्ट करने और सब्सिडी बढ़ाने के लिए बैंकों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

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