फास्ट चार्जिंग से खराब हो रही बैटरी:मिनटों में इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्ज करना घाटे का सौदा, रिपोर्ट का दावा-इससे ज्यादा दिन नहीं चलेगी बैटरी

नई दिल्ली6 महीने पहले
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बैटरी फास्ट चार्जिंग वह फीचर है जिसका नाम सुनकर खुशी होती है कि कम समय में ही बैटरी चार्ज हो जाएगी, लेकिन इसके नुकसान भी हो रहे हैं। खासतौर से इलेक्ट्रिक व्हीकल पर! नए रिसर्च के मुताबिक EV में फास्ट चार्जिंग सिस्टम से उसकी बैटरी खराब हो रही है। इसलिए व्हीकल को चार्ज करने के लिए ज्यादा समय देना मजबूरी हो जाएगी। यदि कुछ मिनटों में चार्ज करने वाली टेक्नोलॉजी को अपनाते हैं तो EV की बैटरी जल्दी चार्ज तो हो जाएगी, लेकिन इसके जल्दी डैमेज होने का खतरा होगा। यह स्टडी 'द इलेक्ट्रोकेमिकल सोसाइटी जर्नल' में पब्लिश हुई है।

बैटरी खराब होने की वजह इंटरकलेशन की प्रोसेस का रुकना
अमेरिकी एनर्जी डिपार्टमेंट आर्गन नेशनल लैबोरेटरी के नए रिसर्च में, साइंटिस्ट ने बैटरी के चार्ज और डिस्चार्ज होने की प्रोसेस पर रिसर्च की है। इसमें फास्ट चार्जिंग के दौरान बैटरी को होने वाले नुकसान को बताया गया है। इसके अनुसार...

  • लिथियम-आयन बैटरी में एक पॉजिटिव चार्ज कैथोड और एक निगेटिव चार्ज एनोड होता है, जिन्हें एक इलेक्ट्रोलाइट नाम के मटेरियल से अलग किया जाता है।
  • लिथियम आयनों को उनके बीच ले जाता है। इन बैटरियों में जो एनोड होता है वह आमतौर पर पेंसिल में इस्तेमाल होने वाले ग्रेफाइट का बना होता है।
  • लिथियम-आयन बैटरी में ग्रेफाइट को स्मॉल पार्टिकल से इकट्ठा करके बनाया जाता है।
  • इन पार्टिकल के अंदर लिथियम आयन इंटरकलेशन नाम की प्रोसेस में खुद को शामिल कर सकते हैं।
  • जब इंटरकलेशन ठीक से होता है, तो बैटरी प्रॉपर तरीके से चार्ज और डिस्चार्ज होती है।
  • जब बैटरी फास्ट चार्जर से बहुत जल्दी चार्ज होती है तो इंटरकलेशन नाम की प्रोसेस में दिक्कत होने लगती है और लिथियम आयन आसानी से ग्रेफाइट में प्रवेश करने के बजाय, एनोड की सतह के ऊपर इकट्ठा हो जाते हैं।
  • लिथियम आयन का एनोड की सतह पर इकट्ठा होने को प्लेटिंग इफेक्ट कहते हैं।
  • स्टडी करने वाले आर्गन बैटरी साइंटिस्ट डेनियल अब्राहम ने कहा कि फास्ट चार्जिंग के दौरान बैटरी के खराब होने की वजह प्लेटिंग इफेक्ट है।
  • अब्राहम ने कहा कि हम जितनी तेजी से व्हीकल की बैटरी चार्ज करते हैं, उतना ही ज्यादा एनोड ऑटोमैटिक तरीके से अव्यवस्थित हो जाएगा, जो लिथियम आयनों को आगे बढ़ने से रोकेगा।

इस स्टडी को करने का उद्देश्य गेफ्राइट पार्टिकल में सुधार करना है ताकि इंडस्ट्री और कस्टमर्स को इसके नुकसान से बचाया जा सके।