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ईवी में दिखेगा भारत का दम:दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर फैक्ट्री यहां बनेगी, लिथियम-आयन बैटरी के प्रोडक्शन में बनेंगे नंबर-1

नई दिल्ली2 महीने पहले
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पेट्रोल की कीमत के नॉट आउट शतक और सरकार की ई-व्हीकल को लेकर प्लानिंग के चलते इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री तेजी से ऊपर आ रही है। देश की ई-व्हीकल इंडस्ट्री में निवेश भी बढ़ रहा है। ओला इलेक्ट्रिक के फाउंडर भाविश अग्रवाल भी तमिलनाडु के कृष्णागिरी में दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर फैक्ट्री लगाने की प्लानिंग को बता चुके हैं। कोविड-19 महामारी से चरमराई देश की अर्थव्यवस्था के लिए ये शुभ संकेत भी हैं।

देश की ज्यादातर ऑटोमोबाइल कंपनियों के बीच अब ई-व्हीकल बनाने की होड़ लग चुकी है। कम कीमत में ज्यादा रेंज के मिशन के साथ ये सभी काम कर रही हैं। हालांकि, तीन साल पहले तक कोई नहीं जानता था कि देश आने वाले दिनों में दुनिया का नंबर वन ई-व्हीकल हब बनाने की तरफ तेजी से बढ़ेगा।

2021 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के 11 मॉडल लॉन्च हुए
इस साल के शुरुआती 3 महीने में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में 11 मॉडल लॉन्च हो चुके हैं। इनमें कई पॉपुलर कंपनियों और कुछ स्टार्टअप के मॉडल शामिल हैं। गोवा के स्टार्टअप कबीरा ने तो भारत की सबसे तेज चलने वाली ई-बाइक भी बना दी। अभी भी कई मॉडल लॉन्च होने की तैयारी में हैं। कुल मिलकर ये साल ई-व्हीकल इंडस्ट्री के लिए बेहतर रहेगा।

लिथियम-आयन बैटरी प्रोडक्शन के लिए देश तैयार
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि ई-व्हीकल में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरी की मैन्युफैक्चरिंग भारत में छह महीने के अंदर शुरू हो जाएगी। आने वाले समय में देश बैटरी से चलने वाले वाहनों के मैन्युफैक्चरिंग के मामले में पहले स्थान पर होगा। हमारे पास लीथियम की कोई कमी नहीं है।

2024-25 तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर में 12.8% की ग्रोथ का अनुमान
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) द्वारा जारी पिछले 6 के आंकड़ों को देखा जाए तो ई-व्हीकल सेगमेंट सात गुना की ग्रोथ हुई है, लेकिन ये आंकड़े काफी छोटे हैं। JMK रिसर्च एंड एनालिटिक्स के मुताबिक, टू-व्हीलर मार्केट में इलेक्ट्रिक व्हीकल की हिस्सेदारी 2020-21 में बढ़कर 0.8% हो जाएगी। वहीं, 2024-25 में 12.8% ग्रोथ होने का अनुमान है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की डिमांड पर्सनल और बिजनेस दोनों में आने की उम्मीद है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों के शोध से पता चलता है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पेट्रोल वाहनों की तुलना में 10-20% सस्ते होंगे। इसकी मुख्य वजह चीन में बड़ी फैक्ट्रियों की बदौलत लिथियम-आयन बैटरी की कीमतों में गिरावट आना है।

लिथियम-आयन बैटरी की कीमतें प्रति किलोवाट-घंटे 89% कम हुई
बैटरी की लागत में गिरावट इलेक्ट्रिक व्हीकल की लागत में काफी कमी ला सकती है। मैकिन्से के अनुमान के मुताबिक, यह आम तौर पर मटेरियल इनपुट की लागत का लगभग 40% तक होता है। ब्लूमबर्ग NEF के अनुसार, लिथियम-आयन बैटरी पैक की कीमतें 2010 में 1100 डॉलर (करीब 80 हजार रुपए) प्रति किलोवाट-घंटे से 89% गिरकर 2020 में 137 डॉलर (करीब 10 हजार रुपए) प्रति किलोवाट हो गई हैं। 2023 तक इसके 101 डॉलर (करीब 7300 रुपए) प्रति किलोवाट-घंटे तक पहुंचने की उम्मीद है।

2030 तक बैटरी की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर FAME-2 योजना के माध्यम से सरकार सब्सिडी दे रही है। 2030 तक बैटरी की कीमतें 58 डॉलर (करीब 4200 रुपए) प्रति किलोवाट-घंटे तक गिर सकती हैं। उदाहरण के लिए, सॉलिड-स्टेट बैटरी को अपनाना। ब्लूमबर्ग NEF ने कहा कि पिछले साल ऑर्डर साइज में ग्रोथ, ईवी की बिक्री में ग्रोथ और नए पैक डिजाइनों की शुरूआत के कारण बैटरी की कीमतें 2019 के स्तर से 13% गिर गई थीं।

चीन के पास ग्लोबल बैटरी प्रोडक्शन का 72.5% हिस्सा
बैटरी प्रोडक्शन में निवेश के मामले में चीन सबसे ऊपर है। ऑक्सफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी स्टडीज के अध्ययन के अनुसार, योजना और निर्माण के विभिन्न चरणों में 181 बैटरी मेगा कारखानों में से 136 चीन में स्थित हैं। बेंचमार्क मिनरल इंटेलिजेंस के अनुसार, चीन में ग्लोबल बैटरी क्षमता का 72.5% हिस्सा है। यहां तक ​​कि जब कुल बैटरी क्षमता अगले 10 वर्षों में अनुमानित छह गुना बढ़ जाती है, तब भी चीन 67 फीसदी हिस्सेदारी बरकरार रखेगा।

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता और बैटरी सेल निर्माताओं के बीच साझेदारी हो सकती है। वोक्सवैगन और जनरल मोटर्स ने क्रमशः यूरोप और अमेरिका में ठीक वैसा ही किया है। इसका फायदा भारत को भी मिल सकता है, क्योंकि निवेशक अब ईवी के लिए भारतीय बाजार का रुख कर रहे हैं।

ज्यादा चार्जिंग स्टेशन से ईवी का आधार मजबूत होगा
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर भरोसा दिखाने की शुरुआत हो चुकी है। इस भरोसे को चार्जिंग स्टेशन की संख्या बढ़ाकर ज्यादा मजबूत किया जा सकता है। मैकिन्से की रिसर्च से पता चलता है कि ई-कॉमर्स बेड़े में शामिल एक ईवी प्रति दिन 90-100 किमी तक चलेगी। जबकि, फूड डिलिवरी के बेड़े में शामिल ईवी प्रति दिन 120-130 किमी तक चलेगी।

कुछ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सिंगल चार्ज पर 90 से 100 किमी की रेंज का वादा कर रहे हैं। ऐसे में चार्जिंग स्टेशन की जरूरत कुछ खास वर्ग को होगी। भारत सरकार ने अपनी FAME योजना के तहत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए 2019 में 1,000 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। अब ओला दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर फैक्ट्री भारत में स्थापित करने जा रही है। उसने कहा कि वह अगले पांच वर्षों में 400 शहरों में 100,000 चार्जिंग स्टेशन स्थापित करेगी।