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एडवांस्ड कार भी सेफ नहीं:5 मिनट में चोर ले उड़े हाईटेक फॉर्च्यूनर, फ्रीक्वेंसी की मदद से तोड़ी की-लेस एंट्री; ऐसी कार चोरी से कैसे बचाएं, क्लेम कैसे करें?

नई दिल्ली24 दिन पहले
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कार अब कई एडवांस्ड फीचर्स से लैस हो चुकी हैं। इन्हें स्मार्टफोन से ऑपरेट कर सकते हैं। इसे चलाने के लिए चाबी, गियर और ड्राइवर तक की जरूरत नहीं है। हालांकि, इतनी एडवांस्ड होने के बाद भी क्या आपकी कार पूरी तरह सेफ है? भोपाल में 38.5 लाख की हाईटेक और फुली ऑटोमैटिक फॉर्च्यूनर की चोरी महज 5 मिनट में हो गई। तो क्या इतनी महंगी कार की चोरी आसानी से हो सकती है? आखिर कैसे इतनी एडवांस्ड कार आसानी से चोरी हो जाती हैं? हम यहां इसी बारे में आपको सबकुछ बताने वाले हैं...

पहले जानिए फॉर्च्यूनर की चोरी का मामला
फुली ऑटोमैटिक फॉर्च्यूनर की चोरी को 3 चोरों ने पूरी प्लानिंग से अंजाम दिया। चोरी के दौरान सभी को क्या करना है, इसकी पहले से ही तैयारी कर ली गई थी।

  • पहला चोर : सीसीटीवी फुटेज में सिर पर साफा बांधे बदमाश की जिम्मेदारी फॉर्च्यूनर का दरवाजा खोलने की थी। तड़के 4:31 बजे वह गाड़ी के दरवाजे के पास पहुंचा और महज डेढ़ मिनट में की-लेस एंट्री ब्रेक कर दी।
  • दूसरा चोर : गाड़ी के पास तड़के 4:36 बजे आता है। उसकी जिम्मेदारी गाड़ी को डी-कोड करने की थी। इस SUV को डी-कोड करने में उसे तीन मिनट लगे और वह हाथ में आईपॉड लेकर जाता हुआ नजर आता है।
  • तीसरा चोर : एक i20 कार में था, जो भोपाल नंबर की थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ये कार करीब दो साल पहले उज्जैन में बेची गई थी। इसकी पड़ताल के लिए टीम उज्जैन रवाना हो गई है।

अब समझिए कैसे इतनी एडवांस्ड कारों की चोरी हो जाती है?
हमें अक्सर ऐसा लगता है कि की-लेस एंट्री वाली कार नॉर्मल चाबी लगाने वाली कारों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होती है। हालांकि, टेक्नोलॉजी जितनी एडवांस्ड हो रही है, चोर भी उतने एडवांस्ड होते जा रहे हैं। हम इन चोरों को हैकर्स भी कह सकते हैं। वे हाईटेक और एडवांस्ड कार को चुराने के लिए ये 3 तरीकों का इस्तेमाल करते हैं...

कार चुराने का तरीका नंबर-1
फ्रीक्वेंसी मेथड की मदद

जब हम की-लेस एंट्री वाली कार के रिमोट या चाबी का बटन दबाते हैं, तब रिमोट से एक फ्रीक्वेंसी या रेडियो वेव्स निकलती है। फ्रीक्वेंसी 300 से 400 मेगाहर्ट्ज के बीच होती है। ये कार के अंदर लगे रिसीवर तक पुहंचती है, जिसके आधार पर वो एक्शन लेता है। इस केस में चोर फ्रीक्वेंसी रीडर की मदद से उस फ्रीक्वेंसी को रीड कर लेते हैं। जब आप कार से दूर जाते हैं तो उसी फ्रीक्वेंसी को कार में अप्लाई करके चोरी कर लेते हैं।

कार चुराने का तरीका नंबर-2
रिले मेथड की मदद

ये कार चोरी करने का सबसे एडवांस्ड तरीका है। इसमें की-लेस एंट्री के रिमोट की सबसे बड़ी कमी का इस्तेमाल किया जाता है। की-लेस एंट्री के रिमोट का नेचर होता है कि वो लगातार फ्रीक्वेंसी छोड़ता रहता है। यही वजह है कि जब भी आप कार के पास जाते हैं तो कार अनलॉक हो जाती है। रिले मेथड से कार की चोरी करते वक्त एक चोर आपके घर के पास खड़ा होता है और वो उस फ्रीक्वेंसी को डिवाइस की मदद से रीड करता है। वहीं, दूसरा चोर कार के पास खड़ा होता है। उसके पास एक ऐसा डिवाइस होता है जो फ्रीक्वेंसी को रिसीव करके उसे कन्वर्ट करता है, जिससे कार का दरवाजा खुल जाता है।

कार चुराने का तरीका नंबर-3
OBD मेथड की मदद

भारत में ऑनबोर्ड डायग्नोस्टिक (OBD) मेथड से सबसे ज्यादा कार चुराई जाती हैं। सभी कारों के डैशबोर्ड में एक OBD पोर्ट होता है। चोर कार के अंदर पहुंचकर इस पोर्ट से लैपटॉप को कनेक्ट करता है। फिर कार के पूरे सिस्टम को डायग्नोस्ट कर देता है। यानी कार के सिक्योरिटी सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करके आसानी से उसे चुरा लेते हैं।

कार को चोरी से बचाने का तरीका
कार की हाईटेक चोरी को फैराडे स्लीव्स की मदद से रोका जा सकता है। ये सिग्लन वैरियर का काम करता है। आप अपनी कार के की-लेस एंट्री रिमोट को इसके अंदर रख सकते हैं। इससे सिग्नल आर-पार नहीं जाएंगे। ऐसे में रिले मेथड से चोरी करना मुश्किल काम हो जाएगा। OBD पोर्ट का प्लेसमेंट टेक्निशियन की मदद से कहीं और कर दीजिए। ताकि कार के अंदर कोई चोर पहुंच भी जाए तब उसे पोर्ट मिले ही नहीं। इसके अलावा इन 5 एक्सेसरीज का भी इस्तेमाल करें...

1. व्हील लॉक (1000 रुपए से शुरू)
पार्किंग पुलिस अक्सर इस लॉक का इस्तेमाल करती है। यह मेटल से बने होते हैं और काफी मजबूत होते हैं, इसे तोड़ना या काटना इतना आसान नहीं होता। इसका प्लस पॉइंट यह है कि गाड़ी के बाहर से ही नजर आ जाता है। ऐसे में कोई चोर आपकी गाड़ी चुराने के बारे में सोच रहा है तब शायद अपना विचार बदल दे। ये ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन भी आसानी से मिल जाता है।

2. स्टीयरिंग व्हील लॉक (600 रुपए से शुरू)
यह लॉक कई तरह की डिजाइन में उपलब्ध हैं लेकिन सभी का काम स्टीरिंग को घूमने से रोकना है। कुछ नए स्टीयरिंग लॉक में अलार्म का फीचर भी मिलता है, जैसे ही इन्हें कोई खोलने की कोशिश करेगा तो अलार्म बज उठेगा। कुछ ऐसे लॉक भी बाजार में उपलब्ध हैं, जो स्टीयरिंग के साथ-साथ ब्रेक या एक्सीलेरेटर पेडल को भी लॉक कर देता है।

3. पैडल लॉक (700 रुपए से शुरू)
स्टीयरिंग व्हील की तरह ही पैडल लॉक भी एक्सीलेरेटर और ब्रेक लॉक करने के काम आता है। यह गाड़ी में लगा हो तो कोई भी चोर आपकी गाड़ी को आसानी से नहीं चुरा पाएगा। इनमें से किसी एक लॉक को भी यूज किया जा सकता है या ज्यादा सेफ्टी के लिए एक से ज्यादा सेफ्टी के लिए एक से ज्यादा लॉक भी यूज किए जा सकते हैं।

4. हुड लॉक (500 रुपए से शुरू)
कई केस में जब चोर गाड़ी नहीं चुरा पाता है तो इंजन या बैटरी को निशाना बनाता है। ऐसे में हुड लॉक बेहद काम के साबित हो सकते हैं। अगर गाड़ी में हुड लॉक लगा है तो चोर तमाम कोशिश करने के बाद भी गाड़ी के हुड को खोल ही नहीं पाएगा, जिससे गाड़ी की बैटरी, इंजन और अन्य पार्ट सुरक्षित रहेंगे।

5. गियर शिफ्ट लॉक (500 रुपए से शुरू)
गाड़ी चोरी होने से बचाने के लिए गियर शिफ्ट लॉक भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह गियर शिफ्टर को पूरी तरह से लॉक कर देता है। ऐसे में अगर चोर गाड़ी में घूस भी जाता है और इंजन स्टार्ट भी कर लेता है तो गाड़ी आगे नहीं बढ़ा पाएगा। गियर शिफ्ट लॉक काफी मजबूत होते हैं, इन्हें आसानी से तोड़ना और काटना मुश्किल टास्क होता है।

कार चोरी होने पर बीमा क्लेम करने की प्रोसेस

यदि आपकी कार चोरी हो जाती है तब सबसे पहले अपने एरिया के पुलिस स्टेशन में उसकी FIR करवाएं। इसकी एक कॉपी बीमा कंपनी को सौंप दें। अब पुलिस आपकी कार की सर्चिंग शुरू कर देगी। यदि वो कार को ढूंढने में नाकाम होती है तो एक फाइनल रिपोर्ट जारी करके केस को बंद कर देती है। इस रिपोर्ट को संबंधित इलाके के मजिस्ट्रेट के सामने लगाई जाती है। वहीं से रिपोर्ट की कॉपी शिकायतकर्ता को मिलती है। इंश्योरेंस कंपनी इसी कॉपी के आधार पर क्लेम देती है। आपकी गाड़ी के लास्ट इंश्योरेंस में जो भी इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (IDV) होती है उतना पैसा आपको मिल जाएगा। इस पूरी प्रोसेस में 2 महीने या उससे भी ज्यादा का वक्त लग सकता है।