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ऑटो सेक्टर में गुजरात अव्वल:देश में बनने वाली हर 3 में से एक पैसेंजर कार 'मेड इन गुजरात', 22 लाख में से 7 लाख गाड़ियां यहीं बनती हैं

अहमदाबाद4 महीने पहलेलेखक: विमुक्त दवे
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  • गुजरात में 10 वर्ष में कार कंपनियों ने 13000 करोड़ रुपए का निवेश किया
  • चार बड़ी कंपनियां मारुति सुजुकी, टाटा, फोर्ड और एमजी मोटर गुजरात में सक्रिय
  • होंडा भी गुजरात में पैसेंजर व्हीकल का प्लांट लगाना चाहती है

पैसेंजर कार के निर्माण में गुजरात अब तेजी से देश का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चर्स (एसआईएएम) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में भारत में 21.75 लाख पैसेंजर कार का उत्पादन हुआ, जिसमें से 7.10 लाख कारों का उत्पादन गुजरात में ही हुआ। इस तरह देखें तो देश में बनने वाली हरेक तीसरी कार 'मेड इन गुजरात' है।

औसतन देखें तो देश में तैयार होने वाली पैसेंजर कारों में लगभग 33% कारों का प्रोडक्शन गुजरात ही करता है। राज्य में फिलहाल चार कंपनियां मारुति सुजुकी, टाटा, फोर्ड और एमजी मोटर्स के कार मैन्युफैक्चरिंग के प्लांट्स हैं। गुजरात सरकार के एक वरिष्ठ आईएएस अफसर ने बताया कि होंडा भी गुजरात में प्लांट बनाने की इच्छुक है और आगामी साल में संभवत: इसका काम शुरू हो जाएगा।

गुजरात में कबसे हुई शुरुआत?

2010 में साणंद में टाटा मोटर्स प्लांट में पहली नैनो कार बनी। उस समय टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा और तब मुख्यमंत्री और वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)
2010 में साणंद में टाटा मोटर्स प्लांट में पहली नैनो कार बनी। उस समय टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा और तब मुख्यमंत्री और वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)
  • 1996 - अमेरिका की ऑटोमोबाइल कंपनी जनरल मोटर्स ने गुजरात के वडोदरा के पास हलोल में प्लांट लगाया।
  • 2010 - तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के समय में टाटा मोटर्स ने साणंद में अपनी ड्रीम कार नैनो का प्लांट लगाया। अब इस प्लांट में टिआगो और टिगोर कारों का प्रोडक्शन भी हो रहा है।
  • 2015 - फोर्ड मोटर इंडिया ने साणंद में अपनी कार का प्रोडक्शन शुरू किया।
  • 2017 - सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन ने बलेनो कार का प्रोडक्शन शुरू किया और 2018 से स्विफ्ट गाड़ियों का प्रोडक्शन भी यहीं हो रहा है।
  • 2017 - बिक्री कम होने और वैश्विक स्तर पर आर्थिक संकट आने पर जनरल मोटर्स ने गुजरात में प्रोडक्शन बंद किया।
  • 2017-18 में चीन की एमजी (मोरिस गैरेज) मोटर ने जनरल मोटर्स का हालोल प्लांट टेकओवर कर अपनी विविध ब्रांड का उत्पादन शुरू किया।
वडोदरा के पास हलोल में एमजी मोटर के प्लांट में कार बन रही है। (फाइल फोटो)
वडोदरा के पास हलोल में एमजी मोटर के प्लांट में कार बन रही है। (फाइल फोटो)

कौन सी कंपनी किस मॉडल की कार बनाती है
टाटा मोटर्स - नैनो, टियागो और टिगोर
फोर्ड मोटर इंडिया - फीगो और एस्पायर
मारूति सुजुकी - स्विफ्ट और बलेनो
एमजी मोटर - हेक्टर, हेक्टर प्लस

2 साल में इंस्टॉल कैपेसिटी 15 लाख तक पहुंच सकती है
राज्य सरकार के उच्चाधिकारियों के अनुसार, गुजरात में कुल मिलाकर 10.90 लाख से अधिक पैसेंजर कार के प्रोडक्शन की क्षमता है। मारुति आने वाले समय में एक दूसरी प्रोडक्शन लाइन इंस्टॉल कर अपना उत्पादन क्षमता में 2.50 लाख कारों की वृद्धि करने जा रही है। इसके अलावा फोर्ड के साथ मिलकर महिंद्रा एंड महिंद्रा भी गुजरात में कार बनाने की योजना पर काम कर रही है। हमारे अनुमान के अनुसार आगामी दो साल में राज्य में कार मैन्युफैक्चरिंग की इंस्टॉल कैपेसिटी 15 लाख तक पहुंच सकती है।

गुजरात में कंपनियों की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी
मारुति सुजुकी - 5 लाख
फोर्ड मोटर कंपनी - 2.40 लाख
टाटा मोटर्स - 2.50 लाख
एमजी मोटर - 1 लाख

मारुति सुजुकी के प्लांट में तैयार की जा रही स्विफ्ट कार। (फाइल फोटो)
मारुति सुजुकी के प्लांट में तैयार की जा रही स्विफ्ट कार। (फाइल फोटो)

गुजरात में ऑटोमोबाइल्स के लिए ईको-सिस्टम बना है
राज्य सरकार के उद्योग मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि गुजरात पहले से ही औद्योगिक राज्य रहा है। यहां बड़ी संख्या में ऑटो पार्ट्स का उत्पादन होता है। इसके अलावा स्किल्ड मेनपॉवर उपलब्ध होने के चलते टाटा, मारुति, सुजुकी, फोर्ड जैसी कार बनाने वाली कंपनियों ने यहां प्लांट लगाए हैं। गुजरात में ऑटोमोबाइल्स के लिए ईको-सिस्टम बना है और उसके चलते ऑटो सेक्टर्स की कंपनियां गुजरात की ओर आकर्षित होती हैं।

2010 से अभी तक में कितना निवेश आया?
गुजरात में कार मैन्युफैक्चरिंग को साल 2009 से गति मिली, जब टाटा मोटर्स ने अपनी ड्रीम कार नैनो के प्लांट के लिए पश्चिम बंगाल में जमीन विवाद के बाद गुजरात आने का निर्णय किया। उस समय पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने टाटा का सख्त विरोध किया था और उसका फायदा गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उठाते हुए टाटा को गुजरात आने का न्योता दिया था। गुजरात में 2010 से अभी तक चार कार उत्पादकों द्वारा करीब 13,000 करोड़ों रुपए का निवेश किया जा चुका है।

फोर्ड5000 करोड़ रुपए
टाटा मोटर्स4,500 करोड़ रुपए
एमजी मोटर्स2,250 करोड़ रुपए
मारुति सुजुकी1,250 करोड़ रुपए

होंडा 1200 करोड़ रुपए का निवेश करेगी
अधिकारियों के बताए अनुसार होंडा का 2-व्हीलर प्लांट गुजरात में हैं। अब कंपनी यहाँ अपना 4-व्हीलर प्लांट भी लगाना चाहती है। इसके लिए सरकार से बात भी चल रही है। होंडा गुजरात में करीब 1200 करोड़ रुपए का निवेश करेगी और कंपनी का नया प्लांट उसके विठ्ठलापुर में स्थित प्लांट के बगल में ही होगा।

बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए अधिक कैपेसिटी के प्लांट बनाए
फोर्ड मोटर इंडिया के स्पोक्सपर्सन कहते हैं कि भारत में हमारी कुल 4.40 लाख वाहनों की उत्पादन क्षमता है, जिसमें से 2.40 लाख कार गुजरात के साणंद स्थित प्लांट में बन सकती हैं। आने वाले समय में बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर हमने अधिक उत्पादन क्षमता वाले प्लांट लगाए हैं। इसके अलावा गुजरात में 2.70 लाख इंजन भी बना रहे हैं। पिछले दो वर्षों से ऑटो सेक्टर की स्थिति खराब है और इसका सीधा असर प्रोडक्शन पर हो रहा है। कोविड के बाद बिक्री को जबर्दस्त झटका लगा था। खासतौर पर अप्रैल से जून के बीच हालात बहुत खराब थे। लेकिन अब स्थिति में सुधार आ रहा है तो आशा है कि आगामी वित्तीय वर्ष तक स्थिति में सुधार आ जाएगा।

साणंद में स्थित फोर्ड मोटर इंडिया के प्लांट में बन रही कार। (फाइल फोटो)
साणंद में स्थित फोर्ड मोटर इंडिया के प्लांट में बन रही कार। (फाइल फोटो)

इलेक्ट्रिक कार का प्रोडक्शन भी गुजरात में हो रहा है
अन्य देशों की तरह भारत सरकार भी इलेक्ट्रिक व्हीकल को प्रोत्साहन दे रही है। देश में फिलहाल टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियां इलेक्ट्रिक कार का उत्पादन कर रही हैं। इसमे टाटा की ई-कार टीगोर उसके साणंद स्थित प्लांट में बन रही है। टाटा मोटर्स के प्रवक्ता ने बताया था कि इलेक्ट्रिक व्हीकल के मामले में टाटा की कारें सबसे ज्यादा बिकती है। वर्तमान में टीगोर और नेक्सन का उत्पादन किया जा रहा है, जिसमें से टीगोर हमारे साणंद के प्लांट में बनती है।

अन्य राज्यों में क्या स्थिति है?
गुजरात में वर्तमान में चार कंपनियों की कारों का प्रोडक्शन हो रहा है। कंपनियों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र, गुजरात से आगे है। महाराष्ट्र में टाटा, फिएट, स्कोडा, मर्सिडीज, बेंज, वॉक्सवैगन और जगुआर जैसी कंपनियों के प्लांट्स हैं। इसके अलावा कर्नाटक में टोयोटा, महिंद्रा रेवा ई-कार बनती हैं। तमिलनाडु में बीएमडब्ल्यू, ह्युंडई, महिंद्रा और फोर्ड मोटर्स इंडिया द्वारा कारों का उत्पादन होता है।

भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी का साया

देश में बीते सात वर्षों के दौरान पैसेंजर कार का उत्पादन बढ़ा है, लेकिन इनमें से पिछले दो वर्षों में मंदी आने से प्रोडक्शन में कमी आई है। सियाम के आंकड़ों देखें तो पता चलता है कि वर्ष 2013-14 में 23.22 लाख कारों का उत्पादन हुआ था, जो 2016-17 में 27 लाख तक पहुंच गया था। हालांकि, वैश्विक मंदी के चलते कारों की बिक्री में घटोतरी होने से कंपनियों ने प्रोडक्शन में कमी करते हुए 2019-20 में 21.75 लाख कारों का उत्पादन किया था। कोरोना के चलते इस साल भी कारों की बिक्री पर काफी विपरीत असर पड़ा है। इसके चलते 2020-21 में कारों का उत्पादन 20 लाख से भी कम रहने का अनुमान है।

वैश्विक स्तर पर कार उत्पादन में भारत चौथे नंबर पर

कारों के प्रोडक्शन के मामले में वैश्विक स्तर पर भारत की बात की जाए तो देश चौथे नंबर पर आता है। ग्लोबल डेटा एजेंसी स्टेटिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार चीन, जापान और जर्मनी के बाद भारत में सबसे ज्यादा कारें बनती हैं। वर्ष 2016 से 2019 के बीच देश में कारों का प्रोडक्शन 16.8% बढ़ा है।

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