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टेलीग्राम के फाउंडर का बयान:पेगासस से भी ज्यादा खतरनाक एंड्रॉयड और एपल, मोबाइल ऑपरेटिंग मार्केट में कंपटीशन बढ़ाने की दी सलाह

नई दिल्ली3 महीने पहले
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टेलीग्राम के फाउंडर पावेल ड्यूरोव का कहना है कि वह 2011 से रूस में रहे हैं तभी से उन्हें निगरानी में रहने की आदत हो गई थी। इसी वजह से जब उन्हें पता चला कि पेगासस स्पाइवेयर से उनकी जासूसी की जा रही है, तो यह खबर सुनकर उन्हें किसी तरह की हैरानी नहीं हुई।

ड्यूरोव ने कहा कि उन्हें यह बात पहले से ही पता थी कि उनकी जासूसी 2018 की जा रही है। उनका कहना है कि एंड्रॉयड और एपल पेगासस से भी ज्यादा खतरनाक हैं। ये अपने बिजनेस प्रॉफिट के लिए सरकार की बात मान लेते हैं और उन्हें लोगों का डेटा दे देते हैं।

पेगासस से भी ज्यादा खतरनाक एंड्रॉयड और iOS
इससे भी ज्यादा गौर करने वाली बात यह कि वे गूगल और एपल जैसी कंपनियों के बारे में क्या सोचते हैं। उनका कहना है कि एंड्रॉयड और iOS जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम के सामने पेगासस सिर्फ जासूसी का एक नमूना है। उनका कहना है कि ये प्लेटफॉर्म सरकार के आगे घुटने टेक देते हैं और इससे यूजर्स के प्राइवेसी के साथ खिलवाड़ होता है और सरकार यूजर्स के डेटा का अपने फायदे के लिए मन मुताबिक इस्तेमाल करती हैं।

एंड्रायड या iOS ऑपरेटिंग सिस्टम लोगों की मजबूरी
टेक्नोलॉजी के आने से लोगों के काम आसान हुए हैं। लेकिन इसके बाद सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि इनसे यूजर्स की प्राइवेसी को बड़ा खतरा हो जाता है। कहने का मतलब ये कि यूजर्स को पता होता है कि एंड्रायड या iOS से प्राइवेसी को खतरा है फिर भी इस ऑपरेटिंग सिस्टम को चुनना पड़ेगा। क्योंकि इनके अलावा दूसरे सिस्टम तो बने ही नहीं हैं। इसलिए दूसरा कोई ऑप्शन ही नहीं बचता है।

कंपटीशन से मिलेंगे कई ऑप्शन
ड्यूरोव का कहना है कि वह इस मार्केट में भी कंपटीशन चाहते हैं। ताकि लोगों कई ऑप्शन मिल सके और प्राइवेसी से खिलवाड़ करने वाले सिस्टम से दूरी बनाई जा सके। ड्यूरोव पहले भी एपल और गूगल की आलोचना कर चुके हैं। पिछले साल उन्होंने बेचे गए सभी डिजिटल सामानों पर 30% सेल्स टैक्स लगाने के लिए कंपनियों को फटकार लगाई थी।

एपल और गूगल सभी प्रोडक्ट पर 30% का सेल्स टैक्स लेते हैं
आपको बता दें कि एपल और गूगल दुनिया के हर मोबाइल फोन पर और साथ ही जिन डिजिटल प्रोडक्ट्स पर इनके ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल होता है उन पर 30% का सेल्स टैक्स लेते हैं। जिससे यूजर्स को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती हैं। मार्केट को रेगुलेट करने वाले भी 10 साल मनमाने टैक्स पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।