• Hindi News
  • Tech auto
  • Read The 10 Big Tech Controversy Controversies Of The 2021 , Mark Zuckerberg And His Company Topped

2021 की टेक कॉन्ट्रोवर्सी:साल के आखिरी दिन पढ़े पूरे साल के 10 सबसे बड़े विवाद, मार्क जुकरबर्ग की कंपनी फेसबुक सबसे ऊपर

नई दिल्लीएक वर्ष पहले

आज साल के अंत में बात टेक प्लेटफॉर्म की दुनिया में हुए टॉप कॉन्ट्रोवर्सी की करते हैं। कोरोनाकाल में जितना ज्यादा इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा उतना ज्यादा ही फेसबुक, वॉट्सऐप, ट्विटर एपल और अमेजन पर विवाद देखने को मिले। तो आज बात इन पर हुए विवाद की करते हैं....

फेसबुक इस साल कॉन्ट्रोवर्सी का चेहरा रहा है। फेक न्यूज, भड़काऊ पोस्ट, ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसे कई दाग इसके दामन पर लगे। फेसबुक इस साल व्हिसलब्लोअर फ्रांसेस हौगेन ने कई गंभीर आरोप लगाए, तो चलिए इस साल हुए फेसबुक से जुड़े टॉप 5 विवादों पर नजर डालते हैं।

1. भारत में चुनावों के दौरान भड़काऊ पोस्ट को बढ़ावा दिया
फेसबुक ने पिछले दो साल की मल्टिपल इंटरनल रिपोर्ट्स में कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए। इसमें कहा गया कि 2019 लोकसभा चुनाव अभियान में 'एंटी-माइनॉरिटी' और 'एंटी-मुस्लिम' बयानबाजी पर रेड फ्लैग में वृद्धि देखी गई थी। जुलाई 2020 की एक रिपोर्ट में इस बात को हाईलाइट किया गया है कि पिछले 18 महीने में इस तरह के पोस्ट में तेजी से वृद्धि हुई। पश्चिम बंगाल सहित आगामी विधानसभा चुनावों में इस तरह की पोस्ट के जरिए लोगों की भावनाओं को आहत करने की आशंका थी।
2. MMR टीकाकरण से जुड़े फेक कंटेंट को बढ़ावा दिया
फेसबुक से जुड़ी एक नई रिसर्च में कहा गया है कि कंपनी ने कोविड-19 महामारी और वैक्सीनेशन से जुड़ी कई फेक प्रोफाइल को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर प्रमोट किया। इसके चलते बीते साल इन प्रोफाइल के 370,000 फॉलोअर्स बन गए। फेसबुक ने अपने अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर जिन ग्रुप को बढ़ावा दिया उनमें ऐक्सपैरिमैंट के नाम पर बच्चों की हत्या करने की बात की जा रही थी। इंस्टाग्राम पर एंड्रयू वेकफील्ड की एक डौक्यूमैंटरी को प्रमोट किया गया, जिसमें MMR टीकाकरण और ऑटिज्म से जुड़े फेक कंटेंट को बढ़ावा दिया गया। इस फेक कंटेंट से लोगों में वैक्सीन के प्रति गलत सोच पैदा हुई।

3. टाइम मैगजीन ने कवर पर लिखा 'डिलीट फेसबुक'
एक अन्य खुलासे में फ्रांसेस हौगेन ने फेसबुक पर आरोप लगाया था कि उसके प्रोडक्ट बच्चों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके बाद टाइम मैगजीन ने भी जुकरबर्ग को निशाने पर लिया था। फेसबुक का विरोध करते हुए मैगजीन ने अपने कवर पर जुकरबर्ग का फोटो लगाकर 'डिलीट फेसबुक' के टेक्स्ट के साथ 'कैंसिल या डिलीट' के ऑप्शन को छापा था।

4. भारत में ‘फेकबुक’ की शक्ल ले चुका फेसबुक
हौगेन ने एक दूसरे खुलासे में बताया है कि भारत में यह प्लेटफॉर्म ‘फेकबुक’ (फर्जी सामग्री की पुस्तक) की शक्ल लेता जा रहा है। इस समूह में ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ भी शामिल है। इसके लिए हौगेन ने इन रिपोर्टों-अध्ययनों के दस्तावेज जुटाए हैं। इनके आधार पर वे लगातार फेसबुक की कार्य-संस्कृति, अंदरूनी खामियों आदि से जुड़े खुलासे कर रही हैं। उनके द्वारा सार्वजनिक किए गए ‘फेसबुक पेपर्स’ के मुताबिक भारत में फर्जी अकाउंट्स से झूठी खबरों के जरिए चुनावों को प्रभावित किया जा रहा है।

5. फेसबुक पर ह्यूमन ट्राफिकिंग का आरोप
इस आरोप को एपल ने लगाया था। एपल ने बताया कि फेसबुक प्लेटफॉर्म्स पर महिलाओं को नौकरानी के तौर पर सऊदी अरब, ईरान, इराक और अफगानिस्तान जैसे मिडिल ईस्ट देशों में प्रोडक्ट की तरह पेश किया जा रहा है। इससे ह्यूमन ट्रैफिकिंग को बढ़ावा मिल रहा है।

6.वॉट्सऐप पॉलिसी विवाद
इस विवाद की शुरूआत जनवरी 2021 से हुई जब वॉट्सऐप ओपन करते ही यूजर्स को डिस्प्ले पर एक नया मैसेज मिला। इस मैसेज में वॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी की जानकारी थी और ये भी कहा गया था कि इस पॉलिसी को 8 फरवरी तक एक्सेप्ट करना है, नहीं तो आप वॉट्सऐप इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसी के बाद सोशल मीडिया समेत तमाम जगहों पर कंपनी का विरोध शुरू हो गया। लोगों का कहना था कि ये उनकी प्राइवेसी में सेंध है और कई लोग वॉट्सऐप छोड़ सिग्नल, टेलीग्राम जैसे दूसरे मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करने लगे।

विवाद बढ़ा तो सरकार भी आगे आई। इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय ने वॉट्सऐप को नोटिस जारी कर इस पॉलिसी को वापस लेने को कहा। बढ़ते विरोध को देखते हुए वॉट्सऐप ने पॉलिसी को स्वीकार करने की आखिरी तारीख 8 फरवरी से बढ़ाकर 15 मई कर दी। इसके बाद कंपनी पॉलिसी स्वीकार न करने वाले यूजर्स को रिमाइंडर्स भेजती रहती है।

7.एपल और फेसबुक के बीच विवाद
एपल के ऑपरेटिंग सिस्टम iOS14 अपडेट को लेकर फेसबुक और एपल आपस में भिड़ गए थे। फेसबुक ने एपल पर आरोप लगाते हुए कहा है कि एपल के नए अपडेट से उसके प्लेटफॉर्म पर किए जाने वाले विज्ञापन बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। फेसबुक अपने प्लेटफॉर्म पर पिक्सल टूल की मदद से यूजर्स की ब्राउजिंग हिस्ट्री, सर्च किए गए प्रोडक्ट के हिसाब से टारगेट ऑडियंस को विज्ञापन दिखाता है। iOS14 अपडेट आने से फेसबुक ऐसा नहीं कर पा रहा है। इससे विज्ञापन के जरिए प्रोडक्ट बेचने वालों और कंपनी को नुकसान हुआ है। जिससे उनके बीच विवाद हुआ।

8.गूगल के कन्नड़ को सबसे भद्दी भाषा बताने पर हुआ विवाद
सर्च इंजन गूगल ने कन्नड़ को भारत की सबसे भद्दी भाषा बताया था। जिसके चलते उसे आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। दरअसल, गूगल पर जब भी कोई यूजर ‘ugliest language in India’ (भारत की सबसे भद्दी भाषा) सर्च करता था तो जवाब में ‘कन्नड़ भाषा’ लिखा आता था। इसको लेकर कर्नाटक सरकार ने गूगल कंपनी को नोटिस देने की भी बात कही थी। इसके बाद गूगल ने माफी मांगी

9.किसान आंदोलन के दौरान ट्विटर की मनमानी
ट्विटर और सरकार के बीच 'जंग' इस साल की शुरुआत यानी जनवरी में शुरू हुई थी। किसान आंदोलन की आड़ में गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में निकाले गए ट्रैक्टर मार्च के दौरान दिल्ली में हिंसा हुई थी। उस दौरान ट्विटर पर कई फेक न्यूज और भड़काऊ पोस्ट की गई थीं। इसके बाद सरकार ने ट्विटर से ऐसे अकाउंट्स के खिलाफ एक्शन लेने को कहा जो देश में माहौल खराब करना चाहते हैं और फेक न्यूज फैला रहे हैं। आखिर ट्विटर को 257 अकाउंट्स सस्पेंड करने पड़े लेकिन उसने कुछ देर बाद ही उन हैंडल्स को बहाल कर दिया। इससे बात बिगड़ गई।

इसके बाद 4 फरवरी को सरकार ने ट्विटर को 1157 और अकाउंट्स की लिस्ट सौंपी जो देश के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे थे। सरकार ने तथ्य रखे इनमें से अधिकतर अकाउंट्स पाकिस्तान से जुड़े लोगों के थे या खालिस्तान समर्थकों के थे। इस बार ट्विटर ने सरकार की दी हुई लिस्ट में शामिल सभी ट्विटर हैंडल्स पर कार्रवाई नहीं की बल्कि महज कुछ हैंडल्स को ही ब्लॉक किया। इससे सरकार और ट्विटर और सरकार के बीच तनातनी शुरू हो गई थी।

10. अमेजन पर फेक रिव्यू के आरोप
ब्रिटेन के रेगुलेटर ने अमेजन और गूगल पर फेक रिव्यू करने का आरोप लगाया था। कंपटीशन एंड मार्केट अथॉरिटी रेगुलेटर ने आरोप लगाया कि ये दोनों टेक कंपनियों ने फेक रिव्यू को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। इससे लोगों में भ्रम हुआ। उन तक गलत जानकारियां पहुंच रही हैं। कई बिजनेस संस्था अपने प्रोडक्ट का फेक 5 स्टार रेटिंग और रिव्यू कर देते हैं। इसमें कई नामी-गिरामी कंपनी शामिल होती हैं। जो कानून की परवाह न करते हुए ऐसा काम करती हैं।