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चुनावी धांधली रोकेगा cVIGIL ऐप:फोटो-वीडियो की मदद से गड़बड़ियों को रोक पाएंगे वोटर्स, चुनाव आयोग 100 मिनट में लेगा एक्शन

नई दिल्ली5 महीने पहले

चुनाव आयोग ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव समय पर ही होंगे। आयोग ने बताया कि चुनाव के दौरान लोग सी-विजिल (cVIGIL) ऐप का इस्तेमाल करें। अगर चुनाव में धांधली हो रही है तो लोग इसके जरिए शिकायत करें और हम एक्शन लेंगे। इस ऐप को आयोग ने 3 साल पहले 2019 में लॉन्च किया था। आइए इस ऐप के बारे में जानते हैं।

क्या है सी-विजिल ऐप?
चुनाव आयोग ने सी-विजिल ऐप को चुनावों में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए तैयार किया है। इस ऐप की मदद से वोटर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन की जानकारी दे सकते हैं। इस ऐप को सभी एंड्रॉयड और iOS यूजर्स के लिए तैयार किया गया है। ऐप पर शिकायत करने के लिए यूजर को स्मार्टफोन के कैमरे और GPS एक्सेस की जरूरत होती है। चुनाव आयोग पिछले 3 सालों से इस ऐप का इस्तेमाल सभी तरह के चुनावों में कर रहा है।

ऐसे चुनाव को पारदर्शी बनाएगा सी-विजिल

  • जिस राज्य में चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू हो जाती है। वहां के लोग इस ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • चुनाव आयोग के मुताबिक चुनाव तारीखों का ऐलान होने के बाद से वोटिंग खत्म होने तक, कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत सी-विजिल ऐप के जरिए चुनाव आयोग को भेज सकता है।
  • आचार संहिता के दौरान नेताओं की तरफ से किसी भी तरह के कोई गैरकानूनी दस्तावेज बांटने, भ्रष्टाचार और विवादित बयानों की शिकायत इस ऐप के जरिए कर सकते हैं।
  • सी-विजिल ऐप पर शिकायतकर्ता जो भी वीडियो या फोटो अपलोड करेंगे वो 5 मिनट के अंदर स्थानीय चुनाव अधिकारी के पास चला जाएगा।
  • शिकायत सही है तब 100 मिनट के अंदर ही उस समस्या का समाधान किया जाएगा।
  • मई 2019 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान इस ऐप का इस्तेमाल पहली बार किया गया था। उसके बाद से लगातार ऐप का इस्तेमाल चुनावों में किया जा रहा है।

सी-विजिल ऐप से कैसे करें शिकायत?

जो लोग सी-विजिल ऐप से किसी की शिकायत करना चाहते हैं। उन्हें इस ऐप को इन्स्टॉल करना होगा। ऐप इन्स्टॉल होने के बाद आपको रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके लिए शिकायतकर्ता को नाम, पता, राज्य, जिला, विधानसभा और पिनकोड की जानकारी देनी होगी। एक OTP की मदद से इसका वैरिफिकेशन किया जाएगा। अब शिकायत करने के लिए फोटो या कैमरे को सिलेक्ट करें। शिकायतकर्ता 2 मिनट तक का वीडियो ऐप पर अपलोड कर सकता है। फोटो और वीडियो से जुड़ी डिटेल के लिए एक बॉक्स भी मिलता है, जहां उसके बारे में लिखा जा सकता है।

चुनाव आयोग के मुताबिक जो फोटो या वीडियो अपलोड किया जाता है, उससे उस जगह की लोकेशन भी पता चल जाती है। फोटा या वीडियो अपलोड होने के बाद यूजर को एक यूनीक आईडी मिलेगी। इसके जरिए वे मोबाइल पर ही फॉलोअप ट्रैक कर सकते हैं। शिकायतकर्ता की पहचान को गोपनीय रखा जाता है। हालांकि ऐप पर पहले से रिकॉर्ड वीडियो या फोटो अपलोड नहीं कर सकते। इतना ही नहीं, ऐप से रिकॉर्ड किए गए वीडियो या फोटो फोन गैलरी में सेव नहीं होंगे।