भविष्य को पॉल्यूशन फ्री करने की तैयारी:6 महिलाएं ईवी सेक्टर में बदल रहीं देश की तस्वीर, इसके अलग-अलग सेक्टर में निभा रहीं अहम भूमिका

नई दिल्ली9 दिन पहले
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भविष्य इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का है। ये बात तो तय है। ईवी सेक्टर में तेजी से होने वाला इनवेस्टमेंट और ग्रोथ यही दिखाते हैं। ईवी में अपनी धाक जमाने के लिए कई स्टार्टअप शुरू हो चुके हैं। कई महिलाएं भी इस सेक्टर में देश की तस्वीर बदलना चाहती हैं। वे ईवी स्टार्टअप इकोसिस्टम के डिजाइन, एनर्जी मैनेजमेंट एंड स्टोरेज, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, यूजर इंटरफेस एप्लिकेशन जैसे अलग-अलग सेगमेंट में अहम भूमिका निभा रही हैं। सभी का उद्देश्य फ्यूचर को पॉल्यूशन फ्री करना है। आज ऐसी ही 6 महिलाओं से मिलिए...

26 अगस्त, 1970 को पुणे में जन्मीं सुलज्जा ने बृहन महाराष्ट्र कॉलेज ऑफ कॉमर्स, पुणे यूनिवर्सिटी से 1990 में कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद वे MBA की पढ़ाई के लिए पिट्सबर्ग में कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी चली गईं। काइनेटिक कंपनी में जुड़ने से पहले उन्होंने कैलिफोर्निया स्थित इनवेस्टमेंट एनालिस्ट कंपनी बर्रा इंटरनेशनल में 4 साल तक काम किया। 4 मई, 2006 को वे काइनेटिक मोटर कंपनी लिमिटेड में जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर बनाई गईं। इन दिनों वे काइनेटिक इंजीनियरिंग लिमिटेड में वाइस चेयरपर्सन और काइनेटिक ग्रीन एनर्जी एंड पावर सोल्यूशन लिमिटेड में CEO हैं।

महुआ एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL), इंडिया में कन्वर्जेंस एनर्जी में काम कर रही हैं। उन्होंने येल यूनिवर्सिटी से मास्टर किया है। वे इंटरनेशनल क्लाइमेट फाइनेंस और कार्बन मार्केट की एक्सपर्ट हैं। उन्होंने यूरोप, अमेरिका, एशिया और भारत में काम किया है। उनके पास ग्राीन फाइनेंस, अक्षय और कार्बन बाजारों का लगभग दो दशक का अंतरराष्ट्रीय अनुभव है। वह ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टिट्यूट की असिस्टेंट जनरल डायरेक्टर भी रही हैं। यह एक इंटरगवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन है जिसका हेडक्वार्टर सियोल में है। 31 देशों में इसका ऑपरेशन चलता है। अपने करियर की शुरुआत में महुआ वर्ल्ड बैंक में थीं।

मिशिगन के रॉस स्कूल ऑफ बिजनेस से MBA ग्रेजुएशन किया है। साथ ही, कम्प्यूटिंग इंजीनियरिंग में फर्स्ट क्लास से पास हुई। अभी महिंद्रा एंड महिंद्रा में काम कर रही हैं। यहां पर वे ड्राइव बिजनेस इन्फॉर्मेशन, डेटा एनालिस्ट और कस्टमर इनसाइट्स को देखती हैं। वे महिंद्रा ग्रुप की सहायक कंपनी महिंद्रा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड (MEML) में CEO भी हैं। इस कंपनी में करीब 500 एम्पलाई हैं। सुमन महिंद्रा से पहले भी कई ऑटोमोटिव सेक्टर में सीनियर पोजीशन पर काम कर चुकी हैं।

1959 में नागपुर में जन्मी रश्मि ने यहीं के विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की। बाद में पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन की। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उन्हें ऑटोमोटिव रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित कर चुके हैं। रश्मि का कहना है कि महिलाएं डेटा एनालिसिस, सिम्युलेशन, वेलिडेशन और मोबिलिटी में बड़ी भूमिका अदा कर सकती हैं। इसलिए वो इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम में एक लाभदायक भूमिका में नजर आती हैं। वो कंट्रोल सिस्टम और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स में मजबूत पकड़ रखती हैं।

एस्मिटो ऐसी कंपनी है जो स्मार्ट स्वैपेबल बैटरी और व्हीकल इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे प्रोडक्ट पर काम करती है। कंपनी एनर्जी, एलजी लॉजिस्टिक, चार्जिंग सॉल्यूशन जैसी सर्विस भी देती है। इसी कंपनी को लीड कर रही हैं प्रभजोत कौर। वे कहती हैं कि लोगों की जरूरत को हिसाब से टेक्नोलॉजी को डेवलप करना चाहती हैं। ईवी से जुड़े इनोवेशन को लेकर टेक्नोलॉजी को डेवलप करना हमारा पहला लक्ष्य है। इससे हमारा फ्यूचर ब्राइट और क्लीन होगा।

प्रेरणा एयरफोर्स से रिटायर्ड हैं। अब पर्यावरण को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक कंपनी इवोलेट को चला रही हैं। वे कहती हैं प्रोडक्ट चलाने के लिए किसी पुरुष या महिला मायने नहीं रखता है। देश की महिलाएं सभी फील्ड में अपनी पहचान बना रही हैं। हमारे पास दर्जनों प्रोडक्ट की प्लानिंग है। हमने बेस्ट पार्ट उठाकर अपनी एंट्री लेवल सेगमेंट में डाले हैं। ताकि ग्राहकों को सबकुछ बेहतर मिले। जिस ग्राहक को डेली 15 से 20 किलोमीटर का काम पड़ता है, उसके लिए हमने कीमत को कम करके बेस्ट प्रोडक्ट दिया है। हम किसी प्रतिस्पर्धा में नहीं पड़ना चाहते।