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इस फेस्टिवल सीजन TV खरीदने का है मन?:तो पहले LCD,LED,QLED,SLED और OLED में फर्क जान लीजिए; टीवी खरीदने में आएगी काम

नई दिल्लीएक महीने पहले
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यदि आपको LCD,LED,QLED,SLED और OLED डिस्प्ले टाइप टीवी खरीदने का ऑप्शन मिले तो, आप इनमें से कौन सा डिस्प्ले खरीदना पसंद करेंगे। शायद आप सोच में पड़ गए होंगे कि इनमें से किस डिस्प्ले वाले टीवी को घर में लाना सही होगा।

देश में फेस्टिव सीजन की शुरुआत हो गई है इस बीच कई टीवी कंपनियां डिस्काउंट ऑफर की पेशकश करेंगी। यदि आप भी नई टीवी खरीदने का मन बना रहे हैं तो ये जानकारी काम आएगी, क्योंकि टीवी की पिक्चर क्वॉलिटी और कीमत कुछ हद तक उनके डिस्प्ले टाइप पर ही बेस्ड होती है।

1.LCD डिस्प्ले
LCD का फुल फॉर्म लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले होता है। टीवी के सामने की तरफ लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले पैनल लगा होता है। जिसमें कई कलर होते हैं इसकी मदद से टीवी कलर प्रोड्यूस कर लेता है। अब ये कलर आंखों तक पहुंचाने के लिए किसी रोशनी या बैकलाइट की जरूरत होती है। जिसके लिए डिस्प्ले के पीछे नॉर्मल फ्लोरोसेंट लाइटिंग काम आती हैं। जिसे हम CCFL कहते हैं जो कि पूरे पैनल में पीछे की तरफ लगी होती हैं। टीवी ऑन करते ही यह CCFL चमकने लगता है जिसके बाद हमें टीवी पर वीडियो दिखने लगता है।

LCD के डिस्प्ले मोटे होते हैं, साथ ही ब्लैक कलर का लेवल पूरी तरह से ब्लैक नहीं होता है। यदि पिक्चर के किसी कोने में डार्कनेस दिखानी है तो उस सेक्शन के लिए आप लाइट बंद नहीं कर सकते। इसलिए वहां पर हल्का ग्रे कलर दिखाई देता है।

2.LED डिस्प्ले TV सस्ती और टिकाऊ
आज अगर आप TV खरीदने निकलेंगे, तो सबसे ज्यादा ऑप्शन आपको LED TV के ही मिलेंगे। पहली बात तो LED TV सस्ती हैं और दूसरी बात ये कि ये हर साइज में मौजूद हैं। यही बेस लेवल की TV है, जो हर घर में पाई जाती है। 32-इंच की स्मार्ट LED TV 12,000 रुपए से शुरू हो जाती हैं।

LED TV में कलर भी अच्छे होते हैं और व्यूइंग ऐंगल भी बढ़िया होते हैं। मतलब कि अगर आप ठीक TV के सामने न भी बैठें और साइड में बैठकर TV देखें तब भी पिक्चर और कलर वैसे के वैसे ही नजर आएंगे। ब्राइटनेस लेवल और साउन्ड आउटपुट तो अलग-अलग TV मॉडल के लिए अलग-अलग होते हैं। मगर LED TV का कॉन्ट्रास्ट इतना बढ़िया नहीं होता। वो इसलिए क्योंकि इसमें हमेशा एक बैकलाइट जलती रहती है, जिसकी वजह से ब्लैक कलर में भी थोड़ी व्हाइटनेस रहती है।

LED TV असल में टेक्निकली एक LCD TV ही है, जिसके अंदर अब CCFL की जगह LED लाइट इस्तेमाल होती है। सही मायनों में इसे LED-LCD कहना चाहिए। इन TV में जो पिक्सेल होते हैं, वो लिक्विड क्रिस्टल के पैकेट से बनते हैं। अब चूंकि ये क्रिस्टल खुद अपनी लाइट बनाते नहीं है, इसलिए पिक्चर बनाने के लिए इस पर अलग से लाइट मारनी पड़ती है। पहले ये लाइट मारने का काम CCFL करता था और अब ये काम LED से होता है।

3.OLED स्क्रीन TV बेहतर ऑप्शन
TV में इस समय की सबसे बढ़िया डिस्प्ले टेक्नॉलॉजी OLED है। OLED का मतलब है ऑर्गैनिक लाइट इमिटिंग डाइओड (Organic Light-Emitting Diode)। LED-LCD डिस्प्ले के उलट इस डिस्प्ले में हर एक पिक्सल के पास अपनी खुद की लाइट होती है। साथ ही हर एक पिक्सल जरूरत के हिसाब से बंद भी हो सकता है। इसलिए OLED स्क्रीन में डीप ब्लैक मिलता है और बहुत ही शानदार का कॉनट्रास्ट मिलता है।
OLED पैनल के ऊपर अंदर से लाइट मारने की जरूरत नहीं होती, इसलिए इनके कलर भी एकदम धांसू होते हैं। और इसी वजह से OLED TV बहुत पतली स्क्रीन के साथ आती हैं। व्यूइंग ऐंगल और पिक्चर क्वॉलिटी में ये बाक़ी स्क्रीन टेक्नोलॉजी में बहुत आगे हैं मगर LCD-LED TV की तरह इनका ब्राइट्नेस लेवल इतना ज़्यादा नहीं होता। मगर चूंकि TV ज़्यादातर कमरे में ही रखी जाती हैं, इसलिए ब्राइट्नेस इतना मैटर नहीं करती।

अब चूंकि OLED स्क्रीन इतनी जबरदस्त होती हैं, तो इनका दाम भी बहुत ज़्यादा होता है। OLED TV ज्यादातर 55-इंच या उससे भी बड़े साइज में आती हैं और इनको खरीदने के लिए कम से कम एक लाख रुपए खर्च करने पड़ेंगे। महंगे वाले मॉडल का दाम 5 लाख रुपए तक जाता है।

क़ीमत के अलावा भी OLED स्क्रीन की एक दिक्कत है। वो ये है कि बहुत लंबे टाइम के बाद इसके कलर और वाइब्रन्सी घटने लगती है। इसकी वजह स्क्रीन में लगा हुआ ऑर्गैनिक मटेरियल है, जो टाइम के साथ बर्न-आउट होने लगता है। यानी कि इस्तेमाल के कुछ सालों के बाद कलर उतने अच्छे नहीं रह जाएंगे, खास तौर पर नीला कलर। वैसे नए TV मॉडल में इसमें सुधार किया गया है और स्क्रीन-टाइम को 1 लाख घंटे तक खींच दिया गया है। यानी कि अगर आप आज एक OLED TV को चलाकर छोड़ दें तो ये 11 साल तक चलेगी।

4.QLED स्क्रीन TV, LED से बेहतर, OLED से सस्ता

OLED बहुत महंगी होती हैं। तो ऐसे में QLED मिडल रेंज वाली है। ये LED से बेहतर है और दाम में OLED से सस्ती है। QLED TV छोटे साइज में नहीं आती। इनका साइज 43-इंच से शुरू होता है और दाम 50,000 रुपए के आस-पास होता है। अलग-अलग ब्रैंड के TV मॉडल अलग-अलग फीचर के साथ आते हैं, जिनकी वजह से इनकी कीमत के साथ-साथ इनकी पिक्चर क्वॉलिटी में भी फर्क होता है।

QLED का मतलब है Quantum dot (क्वांटम डॉट) LED। ये LED स्क्रीन की ही तरह हैं बस इनमें एक चीज एक्स्ट्रा है। पीछे लगी हुई LED बैकलाइट और आगे लगी हुए LCD पैनल के बीच में नैनो पार्टिकल की एक लेयर लगाई जाती है, जिसे क्वांटम डॉट फिल्टर कहते हैं। इसकी वजह से स्क्रीन में ज्यादा अच्छे कलर और ज़्यादा अच्छा कॉनट्रास्ट मिलता है। बहरहाल OLED की तरह QLED स्क्रीन एक-एक पिक्सेल बंद नहीं कर सकती इसलिए इन पर इतने डीप ब्लैक तो नहीं मिलते मगर इनका ब्राइटनेस लेवल जबरदस्त होता है।

5.SLED स्क्रीन TV नई टेक्नोलॉजी होगी
SLED टेक्नोलॉ​जी आपको इस समय केवल रियलमी की SLED TV में देखने को मिलेगी। वो इसलिए क्योंकि इस टेक्नोलॉ​जी के पीछे SPD टेक्नोलॉ​जी के चीफ साइंटिस्ट के साथ खुद रियलमी है। एक LED TV में जहां लाइट सोर्स के तौर पर LCD पैनल पर नीली लाइट मारी जाती है, SLED TV में RGB लाइट मारकर इसे सेफ लाइट में बदला जाता है। रियलमी का कहना है कि SLED स्क्रीन नीली लाइट को कट करके आंखों को नुकसान से बचाती है और साथ में एक नॉर्मल LED TV से कहीं ज़्यादा कलर भी दिखाती है। रियलमी की 55-इंच की SLED TV 40,000 रुपए की है।

6.फ्यूचर की TV स्क्रीन टेक्नोलॉ​जी
LED, QLED और OLED स्क्रीन की अपनी-अपनी खासियत हैं और अपनी-अपनी कमियां। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए माइक्रो-LED और मिनी-LED बनाई जा रही हैं। आइडिया ये है कि TV स्क्रीन में OLED जैसी खूबी हो मगर LED जितनी सस्ती हो। खैर इनको आने में तो अभी समय लगेगा।

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