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विप्रो ने 300 एम्प्लॉयज को निकाला:चेयरमैन रिशद प्रेमजी बोले- मूनलाइटिंग की परमिशन नहीं, वर्कर्स ने कंपनी को धोखे में रखा

नई दिल्ली4 दिन पहले
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आईटी कंपनी विप्रो (Wipro) ने अपने 300 वर्कर्स को बगैर नोटिस दिए नौकरी से निकाल दिया। कंपनी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रिशद प्रेमजी ने कहा कि ये वर्कर्स विप्रो के साथ विरोधी कंपनी में भी काम कर रहे थे।

प्रेमजी बोले, 'ये बहुत सिंपल है। वर्कर्स ने कंपनी इंटीग्रेशन का उल्लंघन किया। हमने उनकी सर्विसेज टर्मिनेट कर दी।'

विप्रो में मूनलाइटिंग अलाउड नहीं
मूनलाइटिंग यानी सीक्रेटली एक साथ दो जगह पर जॉब करना। इसे साइड जॉब भी कह सकते हैं, लेकिन एम्प्लॉयज इसे राज रखते हैं। कई आईटी और टेक कंपनियां अपने एम्प्लॉइज को विरोधी कंपनियों में काम करने की परमिशन नहीं देती। विप्रो भी उन्हीं में से एक है।

स्विगी में मूनलाइटिंग की परमिशन
स्विगी ने कुछ समय पहले खुद को इंडस्ट्री की ऐसी पहली कंपनी के रूप में बताया था जो अपने वर्कर्स को एक साथ दो या उससे जगह काम करने की परमिशन देती है। वहीं, टेक महिंद्रा के चीफ एग्जीक्यूटिव सीपी गुरबानी ने कहा था कि उन्हें एम्प्लॉयज के एक साथ दो जगह काम करने से कोई प्रॉब्लम नहीं है।

'कंपनी की ट्रांसपेरेंसी को खतरा'- प्रेमजी
प्रेमजी ने कहा कि अगर आप मूनलाइटिंग को डिफाइन करें तो पाएंगे कि कर्मचारी का खुफिया तरीके से दूसरी जॉब करना। ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने के लिए एम्प्लॉयज इसके बारे में ऑफिस या दोस्तों से बात भी नहीं करते।

विरोधी कंपनी में काम करने की बात आप किसी को नहीं बताते। लेकिन, किसी बैंड में काम करना या वीकेंड पर किसी प्रोजेक्ट को करने के बारे में आप बात कर सकते हैं। जाहिर है, उल्लंघन के डर से वर्कर्स नहीं बताते।

प्रेमजी ने कहा, 'जिन वर्कर्स को हमने निकाला, उन्होंने कंपनी को इस बारे में नहीं बताया था। हमारे यहां वर्क करते हुए किसी भी विरोधी कंपनी में काम करने वालों के लिए विप्रो में कोई जगह नहीं। अगर विरोधी कंपनियों को भी इस बारे में पता चलता तो उनका रिएक्शन भी कुछ इसी तरह का रहता।'