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सोशल मीडिया पर विज्ञापनों में सेना के जवानों की फोटो इस्तेमाल नहीं कर सकतीं राजनीतिक पार्टियां

2 वर्ष पहले
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  • चुनाव आयोग ने 10 मार्च को लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया है
  • उम्मीदवारों और पार्टीज के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल के कड़े नियम भी तय किए गये हैं

नई दिल्ली. चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टी और चुनाव में खड़े उम्मीदवारों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल संबंधी नियम कड़े कर दिए हैं। अब राजनीतिक पार्टी और उम्मीदवार अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर असत्यापित विज्ञापन, सेना के जवानों के फोटो, भड़काऊ बातें और फेक न्यूज पोस्ट नहीं कर सकेंगे।

 

10 मार्च को चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की है। लोकसभा चुनाव 11 अप्रैल से लेकर 19 मई के बीच 7 चरणों में होंगे। चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोरा ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।

 

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोरा ने बताया, \'जिला और राज्य स्तर पर  MCMC(मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमिटी) एक्टिव हैं। प्रत्येक स्तर पर एक सोशल मीडिया एक्सपर्ट भी इस कमिटी का हिस्सा होगा। राजनीतिक विज्ञापनों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले MCMC से प्रमाणित करवाना होगा।\'

1) चुनावी खर्च में बताना होगा- सोशल मीडिया कैंपेनिंग पर कितना खर्च किया?

नई गाइडलाइन्स के अनुसार, उम्मीदवारों को अपना नामांकन दाखिल करते समय अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स का विवरण प्रस्तुत करना होगा। चुनाव आयोग उम्मीदवारों के फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर और गूगल खातों पर कड़ी नजर रखेगा।

आचार संहिता के प्रावधान भी सोशल मीडिया के उपयोग पर लागू होंगे। सोशल मीडिया पर कोई भी कंटेट पोस्ट करते समय राजनीतिक दल और उम्मीदवार को आचार संहिता के प्रावधानों को ध्यान में रखना होगा।

कोई भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार अपने प्रचार के लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सेना के किसी भी जवान या अधिकारी की फोटो का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फेक न्यूज पहचानने और तथ्यों की जांच के लिए एक्सपर्ट रखें जाएंगे।

राजनीतिक दल या उम्मीदवार ऐसा कोई भी कंटेट पोस्ट नहीं कर सकते जो चुनाव की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा डाले या देश में शांति, सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करे। 

राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को अपने चुनावी प्रचार-प्रसार के खर्चों के विवरण में सोशल मीडिया पर किए जाने वाले विज्ञापन और प्रचार का खर्च भी शामिल करना होगा।  इस खर्च में इंटरनेट प्रदाता कंपनी को दिया गया पैसा, किसी वेबसाइट पर दिए गए विज्ञापन और पार्टी के लिए कंटेट बनाने वाली टीम की सैलेरी भी शामिल करनी होगी। 

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