रिपोर्ट / 2022 तक हर चार में से तीन फोन में होगा एआई बेस्ड चिपसेट

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Apr 15, 2019, 06:40 PM IST

गैजेट डेस्क. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक अब सिर्फ रोबोटिक्स तक ही सीमित नहीं रह गई है, स्मार्टफोन में भी इसका जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। काउंटरप्वाइंट की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक 2022 तक हर चार में से तीन स्मार्टफोन में डेडिकेटेड ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोसेसर होगा। वहीं एआई बेस्ड स्मार्टफोन की बिक्री 125 करोड़ यूनिट तक पहुंच जाएगी, जबकि 2018 में 19 करोड़ एआई बेस्ड फोन ही बिके।

एपल और हुवावे ने सबसे पहले इस्तेमाल की एआई चिप

काउंटरप्वाइंट के एसोसिएट रिसर्च डायरेक्टर गारेथ ओवेन का कहना है कि वॉयस असिस्टेंट तकनीक डिवाइस बेस्ड प्रोसेसिंग की पहली उपयोगी एप्लीकेशन में से एक है।

हुवावे और एपल पहली ऑरिजनल इक्युपमेंट मैनुफैक्चरर है, जिन्होंने किरिन 970 और ए11 जैसे एआई बेस्ड प्रोसेसर से लैस डिवाइस बनाए। दोनों ने सितंबर 2017 में एआई प्रोसेसर से लैस स्मार्टफोन को लॉन्च किया था।

रिपोर्ट के अनुसार दो साल के अंतराल में बाकी कंपनियों ने भी एआई चिपसेट बेस्ड डिवाइस के कॉन्सेप्ट को फॉलो किया है। उदारहण के तौर पर क्वालकॉम, स्नैपड्रैगन 855 हेक्सागन डीएसपी में एआई टेंसर एक्सलेरेटर बाजार में उतार चुका है।

इसका मुख्य उद्देश्य एआई प्रोसेसिंग परफॉर्मेंस को बढ़ाना और पावर की खपत को कम करना है। हालांकि ये एआई प्रोसेसिंग कि वास्तविक आवश्यकता के अनुसार संतुलित होना चाहिए जो फिलहाल नहीं है।

ओवेन ने कहा कि आज कई वॉयस प्रोसेसिंग, क्लाउड पर आधारित है। हालांकि वॉयस असिस्टेंट फीचर कमांड को प्रोसेस कर काफी तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम होंगे। यह गोपनीयता की चिंताओं को भी हल करता है।

स्मार्टफोन कुछ समय से एआई कैपेबिलिटी का लाभ उठा रहे हैं। हालांकि अब प्रोसेसिंग या तो क्लाउड में किया जाता है या तो कम्प्यूटर चिप से लैस डिवाइस में वितरित किया जाता है जैसे- सीपीयू और जीपीयू। 

एआई तकनीक से कंपनियां स्मार्टफोन इस्तेमाल करने के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है और मशीन लर्निंग कैपेबिलिटी में सुधार के लिए आगे बढ़ रही है।

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