इंटरेस्टिंग / खुद से पैदा की गई बिजली से चलता है ये इलेक्ट्रिक डंपर, अब तक कर चुका है 76,000 ली. डीजल की बचत



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  • यह दुनिया के सबसे बड़े इस इलेक्ट्रिक व्हीकल है
  • इसे चार्ज करने की जरूरत ही नहीं पड़ती

Dainik Bhaskar

Aug 29, 2019, 03:28 PM IST

ऑटो डेस्क. इलेक्ट्रिक वाहन अब समय की जरूरत हो गए है। दुनियाभर में लगातार ग्रीन एनर्जी पर काम हो रहा है। अभी इलेक्ट्रिक वाहन की सबसे बड़ी समस्या चार्जिंग को लेकर उसकी सीमाएं हैं। लंबी दूरी तक जाने के लिए इन्हें कई बार चार्ज करने की जरूरत होती है। इसलिए चार्जिंग को सुविधाजनक बनाने की कोशिश जारी है। इसके साथ ही लगातार ऐसी कोशिश भी की जा रही है, जिससे वाहन को कम से कम बार चार्ज करने की जरूरत पड़े। सोलर चार्जिंग वाहन भी इसी कड़ी का एक हिस्सा हैं। लेकिन, अगर हम कहें कि दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक वाहन को तो चार्ज करने की जरूरत ही नहीं पड़ती है। यह खुद ही अपनी जरूरत की बिजली पैदा करके चार्ज हो जाता है।

 

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इलेक्टो डंपर या ई-डंपर एक 45 टन का निर्माण में काम आने वाला वाहन है। यह स्विस पहाड़ियों से चूना पत्थर लाने के काम में आता है। जब यह खाली होता है तो पहाड़ी पर ऊपर जाता है और वहां से 65 टन अयस्क लेकर लौटता है। इसमें रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम लगा हुआ है, जिससे पहाड़ से उतरते समय यह जो भी ऊर्जा उत्पन्न करता है वह स्टोर हो जाती है। इस ऊर्जा से यह पहाड़ी पर चढ़ने के लिए आवश्यक चार्जिंग हासिल कर लेता है। यह क्रम चलता रहता है।

 

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जर्मनी की कंपनी ने इस ई-डंपर को बनाया है। कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि यह ई-डंपर अगर रोजाना 20 चक्कर भी लगाता है तो इससे 200 किलोवाट घंटा यानी 200 यूनिट बिजली पैदा होती है। यह ई-डंपर अप्रैल से काम कर रहा है। इस आधार पर अगर गणना की जाए तो यह अब तक 76,000 लीटर डीजल की बचत कर चुका है। साथ ही कम से कम 200 टन कार्बन डाई ऑक्साइड को भी वातावरण में घुलने से रोक चुका है। फॉर्मूला ई-ड्राइवर लुकास डी ग्रासी ने कहा कि यह पूरी तरह से जादू है कि एक ट्रक खुद बिजली पैदा करके अपने लिए ऊर्जा जुटाता है। वह कहते हैं कि वास्तविक जीवन में यही इलेक्ट्रिक वाहनों का वास्तविक इस्तेमाल है। ये न केवल सस्ते हों, बल्कि अधिक उपयोगी और इको फ्रेंडली हों।

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