cVIGIL ऐप / यूजर की पहचान को रखा जाएगा गोपनीय, आचार संहिता का उल्लंघन होने पर फोटो और वीडियो से करें शिकायत



cVIGIL app unveiled by election commission for lok sabha elections
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cVIGIL app unveiled by election commission for lok sabha elections
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  • दावा है कि शिकायत का समाधान 100 मिनट के अंदर किया जाएगा, जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम प्लेटफार्म का होगा इस्तेमाल
  • छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मिजोरम और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में इसका इस्तेमाल किया चुका है

Dainik Bhaskar

Mar 11, 2019, 12:57 PM IST

गैजेट डेस्क. लोकसभा चुनाव के दौरान नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए चुनाव अयोग ने पूरे भारत के लिए cVIGIL ऐप को पेश किया है। इस ऐप के जरिए वोटर्स आचार संहिता के उल्लंघन होने पर इस उसकी जानकारी फोटो व वीडियो के मध्यम से चुनाव अधिकारियों को भेज सकेंगे। दावा है कि शिकायत सही पाई जाने पर 100 मिनट के अंदर इसका समाधान कर दिया जाएगा। इससे पहले भी इस ऐप को पायलट प्रोजेक्ट के तहत छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मिजोरम और राजस्थान में हुए विधानसभा चुनावों में किया जा चुका है।

 

cVIGIL App

 

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि एंड्रॉयड बेस्ड cVIGIL मोबाइल ऐप इस्तेमाल करने में बेहद आसान है। यूजर ऐप में फोटो और दो मिनट तक का वीडियो को अपलोड कर सकता है, लेकिन अपलोड करने से पहले यूजर को घटना के बारे में संक्षिप्त में जानकारी देनी होगी। यदि यूजर अपनी पहचान गोपनीय रखना चाहता है, तो यह सुविधा भी ऐप में उपलब्ध है।

 

जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) के द्वारा इन शिकायतों को डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम के जरिए फ्लाइंग स्क्वायड टीम को आवंटित की जाएगी। जिसका समाधान 100 मिनट के अंदर अधिकारियों को करना ही होगा।

 

cVIGIL ऐप कैसे करेगी काम...

  • यूजर आचार संहिता के उल्लंघन की जानकारी देने के लिए फोटो या 2 मिनट तक का वीडियो ऐप पर अपलोड कर सकते हैं।
  • फोटो या वीडियो अपलोड करने से पहले घटना की संक्षिप्त जानकारी भी यूजर को देनी होगी।
  • अपलोड होने के बाद यूजर को एक यूनिक आईडी मिलेगी, जिसके जरिए वे मोबाइल पर ही फॉलोअप ट्रैक कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान शिकायत करने वाले यूजर की पहचान को गोपनीय रखा जाएगा।
  • पहले से रिकॉर्डेड वीडियो या फोटो को अपलोड करने की ऐप इजाजत नहीं देगा, ताकि ऐप का दुरुपयोग होने से रोका जा सके।
  • इसके अलावा cVIGIL ऐप के जरिए रिकॉर्ड किए गए वीडियो या फोटो भी फोन गैलेरी में सेव नहीं होंगे।
  • आचार संहिता के दौरान नेताओं की तरफ से किसी भी तरह के कोई गैरकानूनी दस्तावेज बांटने, भ्रष्टाचार और विवादित बयानों की शिकायत इस ऐप के जरिए कर सकते हैं।
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