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  • Faceapp Now Have A Picture Of 15 Crore Users He Take Your Permission Before Doing This

फेसऐप के पास अब 15 करोड़ लोगों की तस्वीरें, ये बताकर ले रहा है आपका डेटा

एक वर्ष पहले
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  • फेसबुक, स्नैपचैट और टिकटॉक जैसे ऐप्स की प्राइवेसी पॉलिसी भी इसी ऐप जैसी 
  • फेसऐप रशियन कंपनी का, इसलिए डेटा के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है
  • 10 ईयर चैलेंज और प्रिज्मा जैसे ऐप्स से पहले भी आया था फोटो अपलोड का ट्रेंड

गैजेट डेस्क. दुनियाभर में पिछले एक हफ्ते से फेसऐप नाम का एक ऐप तेजी से वायरल हो रहा है। यह डाउनलोड्स के मामले में एंड्रॉयड प्ले स्टोर और ऐपल ऐप स्टोर दोनों पर पहले पायदान पर है। यह रशियन ऐप कितना सुरक्षित है, इस पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। फेसऐप बताता है कि कोई भी व्यक्ति आज से 50 साल बाद कैसा दिखेगा या जवानी में वह कैसा दिखता था। साथ ही इसमें फोटो में चेहरे पर स्माइल जोड़ने, दाढ़ी और बालों की स्टाइल और रंग बदलने जैसा विकल्प भी हैं। यह सब करने के लिए फेसऐप आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करता है। यूजर को बस अपनी तस्वीर अपलोड करनी होती है। यूं तो फेसऐप 2017 में लॉन्च हुआ था, लेकिन यह वायरल अब हुआ है। इस ऐप को एक रशियन कंपनी ने वायरलेस लैब ने बनाया था, जिसके संस्थापक और सीईओ यारोलव गोनशरोव माइक्रोसॉफ्ट में काम कर चुके हैं। रशियन होने के कारण ही इस ऐप से यूजर के डेटा को खतरा होने की बात कही जा रही है।

 

इस ऐप ने डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा के हिमायतियों को चिंता में डाल दिया है। अमेरिका भी इससे घबराया हुआ है। हाल ही में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इसे तुरंत अपने मोबाइल से हटाने और एफबीआई से जांच करवाने की मांग की है। हालांकि वे इस बात से ज्यादा डरे हुए हैं कि ऐप रशियन है। अमेरिका रूस पर उसके चुनावों को इंटरनेट से प्रभावित करने का आरोप लगाता रहा है। मोबाइल ऐप्स से आपका निजी डेटा शेयर होने का खतरा नया नहीं है। फेसबुक और गूगल जैसी बड़ी कंपनियों पर डेटा या हमारी निजी जानकारियों का दुरुपयोग करने का आरोप लग चुका है। ये कंपनियां अरबों रुपए हर्जाना भी भर चुकी हैं। हाल ही में इंटरनेशनल कम्प्यूटर साइंस इंस्टीट्यूट ने गूगल प्ले स्टोर के 88 हजार ऐप्स पर रिसर्च कर यह नतीजा निकाला है कि करीब 1325 ऐप्स ऐसे हैं जो बिना इजाजत के यूजर्स का डेटा चुरा रहे हैं। ये ऐप्स एसडी कार्ड में मौजूद फाइल्स तक जांच रहे हैं। अभी गूगल प्ले स्टोर पर करीब 27 लाख ऐप्स हैं। इनमें से 88 हजार की ही जांच में यह नतीजा आया है।

 

वहीं फिलहाल चर्चा में आया ऐप आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर आधारित है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस या कृत्रिम बुद्धिमत्ता कम्प्यूटर की इंसान की तरह सोचने-समझने की क्षमता को कहते हैं। दुनियाभर में इस पर काम चल रहा है। फेशियल रेकॉग्निशन यानी चेहरे को पहचानने की खूबी भी इसी का हिस्सा है, जो इन दिनों मोबाइल से लेकर एयरपोर्ट तक में इस्तेमाल हो रहा है। फेसऐप चेहरे का ही डेटा इकट्‌ठा कर रहा है, इसलिए भी इसे लेकर चिंता जताई जा रही है।

1) 1325 ऐप्स ऐसे हैं जो बिना इजाजत के यूजर्स का डेटा चुरा रहे हैं

  • 10 करोड़ से ज्यादा बार गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा चुका है 
  • 121 देशों में ऐपल ऐप स्टोर पर पहले पायदान पर बना हुआ है 
  • 12.5 लाख से ज्यादा इंस्टाग्राम पोस्ट हैं इस ऐप से जुड़े हुए 
  • 22 हजार से ज्यादा ट्वीट हर घंटे हो रहे हैं एजचैलेंज और फेसऐप से जुड़े हुए 
  • 97% तक रुचि बढ़ी भारत में लोगों की फेसऐप में, गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक

1. फेसऐप आपके द्वारा अपलोड की गई तस्वीरों को अपने पास रख सकता है और उनका अपनी मर्जी से इस्तेमाल कर सकता है। आपका फोटो एल्बम भी सिंक हो जाता है। अब अपडेटेड वर्जन में फेसऐप पहले ही बता रहा है कि वह आपकी अपलोड की हुई तस्वीर और बदली हुई तस्वीर को अपने सर्वर पर रखेगा। हालांकि फेसऐप के सीईओ का दावा है कि तस्वीर 48 घंटे से ज्यादा सर्वर पर नहीं रखी जाएगी।

 

इससे खतरा: फेसऐप प्राइवेसी पॉलिसी के मुताबिक वह आपकी तस्वीरों को कैसे भी इस्तेमाल कर सकता है। आप फोटो में बदलाव करने, उसका कहीं भी, कैसे भी इस्तेमाल करने की अनुमति दे रहे हैं। कंपनी आपकी तस्वीरों का कमर्शियल इस्तेमाल कर सकती है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसके लिए आपको रॉयल्टी नहीं दी जाएगी।

फेसऐप से डेटा सुरक्षा का मामला केवल चर्चा में आया है। ऐसे बहुत सारे ऐप्स हैं, जो हमसे करीब 250 तरह की परमीशन लेती हैं और हमारा डेटा इस्तेमाल करते हैं। इनमें फेसबुक और गूगल जैसी नामी-गिरामी कंपनियों के ऐप्स भी शामिल हैं। सायबर एक्सपर्ट और एथिकल हैकर जितेन जैन बताते हैं कि जब आप कोई ऐप इंस्टॉल करते हैं तो एक प्रकार से उनका कॉन्ट्रैक्ट डिजिटली साइन कर लेते हैं। कई ऐप्स आपकी लोकेशन, कॉन्टैक्ट्स और एसएमएस आदि देखने की परमीशन मांगते हैं। सोचने वाली बात यह है कि एक फोटो ऐप को आपके एसएमएस देखने की क्या जरूरत है? हाल ही में यह भी सामने आया है कि गूगल, एलेक्सा और सीरी से हम जो बातें कह रहे हैं, वे कंपनियां अपने पास सुरक्षित रख रही हैं और विश्लेषण के लिए थर्ड पार्टी को दे रही हैं।

5) फेसऐप की इन शर्तों से है फोटो के दुरुपयोग का खतरा, इससे मिलती-जुलती प्राइवेसी पॉलिसी कई ऐप्स की हैं

2. 

फेसऐप की प्राइवेसी पॉलिसी में उल्लेख है कि वह आपके द्वारा दी गई जानकारियों को किसी भी दूसरे देश के साथ साझा कर सकता है। साथ ही यह भी कहा गया है कि फेसऐप जानकारी की सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित नहीं कर सकता है। आपके डिवाइस (मॉडल, आईएमईआई नंबर), लोकेशन जैसी जानकारी थर्ड पार्टी से साझा कर सकता है।

 

इससे खतरा: आपकी जानकारी कई माध्यमों से होते हुए गलत हाथों में पड़ सकती है। जैसे आपकी तस्वीर का गलत इस्तेमाल हो सकता है। आपकी निजी जानकारी को विज्ञापनदाताओं के साथ साझा किया जा सकता है। फेसबुक के जरिये इस पर लॉइगिन करते हैं तो फेसऐप आपका ईमेल और कॉन्टेक्ट्स हासिल कर लेता है।

अगर कोई विदेशी ऐप भारत में किसी यूजर की निजता का उल्लंघन करते हैं तो उस पर लगाम कसने के लिए देश में कोई कानून नहीं है। 2019 लोकसभा चुनावों के नतीजों के कुछ ही दिन बाद सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि देश को 'पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल' की बहुत आवश्यकता है। इस बिल का पिछले 15 सालों से इंतजार हो रहा है। इसके ड्राफ्ट के मुताबिक कोई भी ऐप डेटा का इस्तेमाल सिर्फ उसी काम के लिए कर पाएगा, जिसके लिए उसे बनाया गया है। उदाहरण के लिए फेसऐप तस्वीरों का इस्तेमाल केवल बुढ़ापा दिखाने के लिए कर सकता, इसके अलावा नहीं। सायबर एक्सपर्ट जितेन जैन कहते हैं कि फिलहाल यूजर्स को ही सुरक्षा का ध्यान रखना होगा। एंड्रॉयड यूजर सेटिंग्स में ऐप्लीकेशन मैनेजर पर जाकर हर ऐप को दी गईं परमीशन देख सकते हैं।

3. 

फेसऐप की सर्विस की शर्तों के मुताबिक आप उन्हें उनकी तस्वीरों का वर्ल्डवाइड लाइसेंस मुफ्त में दे रहे हैं। अगर पूरा फेसऐप या इसका एक हिस्सा बेच दिया जाता है, तो आपकी जानकारियां और तस्वीरें खरीददार के पास जा सकती हैं। यदि आप अपना अकाउंट डिलीट भी कर देंगे तो भी फेसऐप को आपकी जानकारी अपने पास स्टोर रखने का अधिकार है।

 

इससे खतरा: चूंकि फेसऐप रशियन कंपनी का है और इसका ऑफिस अमेरिका में है, इसलिए आपके कंटेंट, फोटो या अन्य जानकारी के दुरुपयोग को लेकर कोई कानूनी कार्रवाई करना मुश्किल होगा। भारत में तो फिलहाल डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा के लिए कोई कानून है भी नहीं।

पिछले साल फेसबुक पर 10 ईयर चैलेंज सामने आया था, जिसमें लोग अपनी मौजूदा व 10 साल पुरानी तस्वीर पोस्ट कर रहे थे। इसी तरह तस्वीर को पेंटिंग जैसा बनाने वाली प्रिज्मा ऐप भी वायरल हुआ था। एक्सपर्ट मानते हैं कि इस तरह दुनियाभर के लोगों की तस्वीरें इकट्‌ठी कर टेक कंपनियां चेहरा पहचानने वाली आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) तकनीक को और एक्युरेट करने में इस्तेमाल कर सकती हैं। दुनियाभर में फेस रेकॉग्निशन तकनीक तेजी से इस्तेमाल हो रही है। उदाहरण के लिए भारत में ही कई एयरपोर्ट्स पर चेहरे को ही बोर्डिंग पास मानकर प्रवेश देने की शुरुआत हो रही है। इसमें व्यक्ति के चेहरे का मिलान एआई से आधार कार्ड की फोटो से हो रहा है। हाल ही में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने भी फेस बेस्ड एआई पर काम करने के लिए टेंडर निकाला है।

शोधकर्ता साबित कर चुके हैं कि हाई रेजॉल्यूशन तस्वीरों और अन्य कई तरीकों से फेशियल रेकॉग्निशन (चेहरा पहचानने की तकनीक) को मूर्ख बनाया जा सकता है। हाल ही में सामने आया है कि लंदन पुलिस की फेशियल रेकॉग्निशन तकनीक 80 फीसदी बार नाकाम साबित हो रही है। दुनिया के कई देशों की पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। इस टेक्नोलॉजी को मजबूत बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा डेटा की जरूरत है। फेसऐप जैसी कंपनियों को तस्वीरों का ऐसा ही डेटा लाखों-करोड़ों लोग मुफ्त में दे रहे हैं। जितेन कहते हैं कि हमारे चेहरों से जुड़ा डेटा सरकार तक सीमित रहे, तब तो ठीक भी है। लेकिन प्राइवेट कंपनियों को ऐसा डेटा देना देश और व्यक्ति दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

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