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नए साल में 3.25 लाख करोड़ के कनेक्टेड डिवाइस खरीदेंगे भारतीय, ये आंकड़ा देश के रक्षा बजट से भी ज्यादा

2 वर्ष पहले
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  • वायरलेस बड्स कैटेगरी में एपल को मिली सफलता के बाद सेगमेंट में कई कंपनियों ने एंट्री की
  • टैबलेट पीसी और फीचर फोन कैटेगरी में 2020 में भी गिरावट देखने को मिल सकती है

1) स्मार्ट स्पीकर बना रहा भारतीयों का पसंदीदा गैजेट

मार्केट रिसर्च फर्म टेकआर्क ने अपनी पहली 'इंडिया कनेक्टेड डिवाइस रिपोर्ट' में बताया कि कनेक्टेड डिवाइस की सेल्स में स्मार्टफोन वैल्यू और वॉल्यूम दोनों में ही हमेशा की तरह शीर्ष पर होगा। भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2019-2020 के डिफेंस बजट 3,05,296 लाख करोड़ करने का ऐलान किया है यानी 2020 में कनेक्टेड डिवाइस बिकने का आंकड़ा देश के रक्षा बजट से भी ज्यादा का है।

टेकआर्के के चीफ एनालिस्ट और फाउंडर फैज़ल कावूसा ने बताया कि यूजर्स तेजी से कनेक्टेड सॉल्यूशन की ओर बढ़ रहे है जो न सिर्फ उन्हें स्मार्ट बना रहा है बल्कि उनकी दिनचर्या में भी उपयोगी साबित हो रहा है। यह दो तरह के ट्रेंड के आधार पर बढ़ रहा है। पहला, स्मार्टफोन के आसपास एक कनेक्टेड माहौल तैयार होना और दूसरा स्मार्ट टीवी और स्पीकर्स में इसकी कनेक्टिविटी उपलब्ध होना।

स्मार्ट वियरेबल सेगमेंट में वायरलेस बड्स की सेल्स कई गुना तेजी से बढ़ रही है। इस कैटेगरी में एपल को मिली सफलता के बाद कई अन्य ब्रांड ने एंट्री की। हाल ही में चीनी कंपनी रियलमी ने अपने ट्रूली वायरलेस बड्स बाजार में लॉन्च किए।

इसी तरह स्मार्ट स्पीकर की सेल्स में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। यह न सिर्फ एक डिवाइस के तौर पर पॉपुलर हो रहा है बल्कि यह लोगों को उपयोगी कंटेंट भी मुहैया कर रहा है। इसमें मिलने वाला वॉयस कमांड फीचर जैसे एलेक्सा और गूगल असिस्टेंट लोगों के काम आसान बना रहे हैं।

वहीं टैबलेट पीसी और स्मार्ट फीचर फोन कैटेगरी में 2020 में भी लगातार गिरावट देखने को मिल सकती है। अन्य कनेक्टेड डिवाइस की तुलना में स्मार्ट होम डिवाइस की उपयोगिता तेजी से बढ़ रही है। इसमें स्मार्ट बल्ब, फैन और घरों में इस्तेमाल होने वाले स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स सामान शामिल हैं। 

2020 में कनेक्टेड कंज्यूमर डिवाइस सेलुलर और वाई-फाई कनेक्टिविटी से जरिए चलेंगे। हालांकि सरकार को ऐसे उपकरणों के मानकीकरण और क्वालिटी कंट्रोल को सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए और यूजर्स के हितों में वर्तमान गुणवत्ता जांच और संतुलन से आगे बढ़ना चाहिए, ताकि इन्हें हैकर्स से बचाया जा सके।