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यूएस / माइक्रोसॉफ्ट ने नया स्टोरेज डिवाइस बनाया, डिजिटल इंफॉर्मेशन को डीएनए के रूप में सेव करता है

Dainik Bhaskar

Mar 22, 2019, 04:55 PM IST


Microsoft new device to store digital information as DNA
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Microsoft new device to store digital information as DNA
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  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तकनीक से 70 सालों तक रहता है डेटा सुरक्षित
  • इसमें सिंथेटिक डीएनए का इस्तेमाल होता है, जिसे लैब में बनाया जाता है

गैजेट डेस्क. लंबे समय तक डेटा को सुरक्षित रखना हमेशा से ही चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है, लेकिन दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने ऐसा स्टोरेज डिवाइस तैयार कर लिया है जो डेटा को डीएनए के रूप में स्टोर करेगा। यह डिवाइस एक खास सॉफ्टवेयर की मदद से किसी भी डिजिटल डेटा को डीएनए में कन्वर्ट कर स्टोर करेगा, जिसे यूजर अपनी आवश्यकता अनुसार देख सकेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रक्रिया से 70 सालों से डेटा को सुरक्षित रखा जा सकता है।

 

आसानी से वापस पढ़ा जा सकता है डेटा

  1. यह फुली ऑटोमेटेड सिस्टम से डेटा को डीएनए के रूप में स्टोर करेगा जिसे आसानी से दोबारा पढ़ा जा सकता है। इसे टेक्नोलॉजी के मदद से रिसर्च लैब को कमर्शियल डेटा सेंटर के रूप में  बदला जा सकता है।

  2. इस सिस्टम को यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के साथ पार्टनरशिप कर तैयार किया गया है। इसमें 'हैलो' शब्द को डीएनए के रूप में स्टोर किया गया, जिसे 21 घंटे बाद दोबारा डिजिटल डेटा के रूप में कन्वर्ट कर पढ़ा गया।

  3. माइक्रोसॉफ्ट के प्रिंसिपल रिसर्चर कारिन स्ट्रास ने बताया कि हम इस सिस्टम का जल्द से जल्द प्रोडक्शन करना चाहते हैं, जिससे यह उन लोगों के काम आ सके जो क्लाउड स्टोरेज सर्विस पर निर्भर है। इसमें बिट को डेटा सेंटर भेजकर स्टोर किया जा सकेगा और अपनी सुविधा अनुसार देखा जा सकेगा।

  4. रिसर्चर ने कहा कि हमने इस तकनीक के माध्यम से अभी तक एक जीबी तक का डेटा स्टोर किया है, जिसमें बिल्लियों की तस्वीरें, पॉप वीडियो और रिकॉर्डिंग शामिल है, जिसे बिना किसी परेशानी के दोबारा पढ़ा जा सकता है।

  5. यह ऑटोमेटेड डीएनए स्टोरेज सिस्टम एक विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से 0 और 1 डिजिटल डेटा को  As, Ts, Cs और Gs में कन्वर्ट करता है और इसे डीएनए ब्लॉक में बदल देता है।

  6. इसके बाद इसे बेहद सस्ते लैब इक्विपमेंट का इस्तेमाल कर लिक्विड और केमिकल से बने डीएनए ब्लॉक को स्टोरेज वेसल में रखा जाता है।

  7. जब भी सिस्टम को इस इंफोर्मेशन को दोबारा पढ़ना हो तो फिर से केमिकल का इस्तेमाल कर डीएनए को माइक्रोफ्लूडिक पंप से इसे सिस्टम में भेजा जाता है जो डीएनए को पढ़ता है और कंप्यूटर लैंग्वेज में कन्वर्ट करता है।

  8. इस पूरी प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए डीएनए मॉलिक्यूल को लैब में बनाया जाता है जिसमें सूचना स्टोर की जाती है। यह किसी इंसान या जानवर का डीएनए नहीं है। इसे सिस्टम में भेजने से पहले इंक्रिप्टेड किया जाता है।

  9. कंपनी अब ऐसे सिस्टम को बनाने पर काम कर रही है जो डीएनए को डिजिटल फॉर्मेट में कन्वर्ट किए बिना पढ़ सके।

  10. पहले सूचनाओं को छोटे से जगह में कलेक्ट करने का सबसे अच्छा और सबसे सस्ता तरीका मैग्नेटिक टेप (Floppy)था, जो सूचनाओं को 30 साल तक रख सकता है। वहीं डीएनए स्टोरेज तकनीक की मदद से हम डेटा को लगभग 70 साल से ज्यादा समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।

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