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  • Railway officials will be able to trace the speed, fuel pressure and location of the train from the cabin itself, passengers will get benefit

रेमलाट सिस्टम / केबिन से ही ट्रेन की स्पीड, फ्यूल प्रेशर और लोकेशन ट्रेस कर सकेंगे रेलवे अधिकारी; हादसे रुकेंगे और लेट नहीं होगी ट्रेन

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  • रेलवे ने रेमलाट उपकरण इंजनों में लगाना शुरू किया, यह जीपीएस के जरिए काम करेगा
  • दुर्घटना या अन्य तकनीकी समस्या आने पर इस सिस्टम के माध्यम से अधिकारी उचित निर्देश भी दे सकते हैं
  • वर्तमान में रेल रॅडार के माध्यम से ट्रेनों की लोकेशन पता चल जाती है, यह मुख्यतः यात्री ट्रेनों तक ही सीमित होती है

दैनिक भास्कर

Dec 12, 2019, 01:33 PM IST
रेलवे अधिकारी अब कैबिन में बैठकर ट्रैक पर दौड़ने वाली ट्रेनों की स्पीड, लोकेशन, फ्यूल प्रेशर और बैटरी वॉल्टेज का पता लगा सकेंगे। इससे ट्रेन में कोई भी समस्या आने से पूर्व ही उसका निराकरण किया जा सकेगा। यह जानकारी रेलवे के संबंधित विभाग को ही पासवर्ड डालने पर वेबसाइट पर नजर आएगी। इसका फायदा सफर कर रहे यात्रियों को भी होगा। रिमोट मॉनीटरिंग एंड मैनेजमेंट ऑफ लोकोमोटिव्स एंड ट्रेन (आरईएमएमएलओटी) यानी रेमलाट नाम का यह सिस्टम मंडल में लागू हो चुका है। अब से यात्रियों को ट्रेन के आने व जाने की सही जानकारी वेबसाइट पर मिलेगी।

मालगाड़ियों में भी इस सिस्टम की टेस्टिंग की जा रही है

  • रेलवे सूत्रों के अनुसार फिलहाल दो स्टेशनों के बीच रेल दुर्घटना होने पर इंजन की वास्तविक लोकेशन ट्रेस करने में समय लग जाता है। दूरस्थ और ऐसे स्थान जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं हैं और दो स्टेशनों के बीच दूरी भी ज्यादा है, वहां विशेष रूप से समस्या आती है। अकेले इंजन, मालगाड़ी या डेमू-मेमू जैसी छोटी ट्रेनों के साथ परेशानी ज्यादा है।
  • नए सिस्टम के जरिए इंजन की वास्तविक लोकेशन के साथ अन्य जरूरी जानकारी भी किसी भी समय पता की जा सकेगी। जानकारी के अनुसार डीजल इंजन की वर्कशाप जाेधपुर व अजमेर में है। एेसे में इंजन में रेमलाट वहीं से लगकर आ रहा है। नए इंजन में यह उपकरण पहले से ही लगे होते हैं।
  • मंडल में चल रहे 350 डीजल इंजन में यह उपकरण लगभग लग चुका है। गिन-चुने इंजन शेष रह गए हैं, इनमें इसी माह उपकरण लगा दिया जाएगा। ऐसे काम करता है उपकरण: इंजनों में रिमोट मॉनीटरिंग एंड मैनेजमेंट ऑफ लोकोमोटिव्स एंड ट्रेन (आरईएमएमएलओटी) सिस्टम लगाया जा चुका है।
  • छोटे इंजन जो डेमू और मेमू जैसी ट्रेनों में लगाए जाते हैं और मालगाड़ियों में भी इस सिस्टम का परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण के लिए आरईएमएमएलओटी सिस्टम के साथ इंजनों में माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित कंट्रोल सिस्टम भी लगाया गया है।
  • इसमें एंटेना की तरह एक उपकरण लगाया गया है, जो सेटेलाइट को सिग्नल भेजता है। इसके लिए जीएसएम और सीटीएमए नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस सिस्टम के तहत वेबसाइट भी बनाई गई है।

  • नए सिस्टम से काफी लाभ होंगे। ट्रेनों की लोकेशन और गति ट्रेस होने पर समय प्रबंधन पर नजर रखी जा सकेगी, विशेषकर मालगाड़ियों में।
  • इसके अलावा दुर्घटना या पॉवर फैलियर या अन्य तकनीकी समस्या आने पर सिस्टम के माध्यम से अधिकारी उचित निर्देश भी दे सकते हैं
  • इस सिस्टम से ट्रेन के लेट होने के कारणों और उन्हें दूर करने की दिशा में भी मदद मिलने की संभावना है।
  • वर्तमान में रेल रॅडार के माध्यम से ट्रेनों की लोकेशन पता चल जाती है। लेकिन यह मुख्यतः यात्री ट्रेनों तक ही सीमित होती है।
  • नेटवर्क में बाधा से जानकारी मिलने में विलंब भी होता है। नया सिस्टम इंजन में लगने से अकेले इंजन, मालगाड़ी या यात्री गाड़ी की सटीक लोकेशन और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की जा सकेंगी।

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