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रिसर्च / समुद्र के पानी से बनाया जा सकेगा हाइड्रोजन फ्यूल, शहरों में बिजली और कारों में होगा इस्तेमाल

Dainik Bhaskar

Mar 20, 2019, 02:22 PM IST


Researchers unveil new method to create hydrogen fuel using seawater
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Researchers unveil new method to create hydrogen fuel using seawater
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गैजेट डेस्क. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने समुद्र के पानी से हाइड्रोजन ईधन बनाने का तरीका विकसित किया है। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में छपी रिपोर्ट के अनुसार बिजली का उपयोग करके समुद्र के पानी से ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को अलग-अलग किया जा सकता है। इस ईधन का इस्तेमाल शहरों में बिजली पहुंचाने और कारों को ऊर्जा देने में किया जा सकेगा।
 

खारे पानी के इस्तेमाल से बचेगा खर्च

पानी से ऑक्सीजन और हाइड्रोजन अलग करके पारंपरिक ईधन के स्थान पर इस्तेमाल हो सकने वाला हाइड्रोजन ईधन पहले से बनाया जा रहा है। लेकिन इस काम में शुद्ध पानी की जरूरत होती है, जो अपने आप में काफी कीमती होता है। रिसर्चर्स का कहना है कि पूरे शहर को रोशन करने और कारों को पॉवर देने के लिए हाइड्रोजन ईधन इस्तेमाल करना अब तक संभव नहीं था, क्योंकि इसके लिए बहुत ज्यादा मात्रा में शुद्ध पानी की जरूरत होगी। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर एच डाई, युन कुआंग और माइकल केनी ने बताया कि कैलिफोर्निया में हमारी जरूरतों जितना शुद्ध पानी मिलना भी थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन नई रिसर्च में बताए तरीके से समुद्र के खारे पानी को ईधन में बदला जा सकेगा।

 

प्रकृति के लिए बेहतर विकल्प

हाइड्रोजन ईधन का इस्तेमाल प्रकृति के लिए भी अच्छा है क्योंकि यह कॉर्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं करता। हाइड्रोजन ईधन को जलाने से सिर्फ पानी उत्सर्जित होता है, जो जलवायु परिवर्तन की समस्याओं को बढ़ाने में सहयोग नहीं देता। जबकि पारंपरिक ईधन से कॉर्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है जो प्रकृति के लिए हानिकारक होता है।

नेगेटिव आयन की परत चढ़ाने से 12 घंटे से हजार घंटे तक बढ़ जाती है उत्पादकता

  1. बिजली की मदद से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ने की प्रक्रिया को इलेक्ट्रोलिसिस कहा जाता है। यह एक आसान और पुराना तरीका है। पानी में रखे दो इलेक्ट्रोड्स से एक पॉवर सोर्स को जोड़ा जाता है। जब पॉवर ऑन की जाती है, तो हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के नेगेटिव सिरे(कैथोड) से बाहर निकलती है जबकि ऑक्सीजन इलेक्ट्रोड के पॉजिटिव सिरे(एनोड) से बाहर आती है। 

  2. इस प्रक्रिया में समुद्र का पानी इस्तेमाल करने पर पानी में मौजूद नेगेटिव आयन वाला क्लोराइड इलेक्ट्रोड के पॉजिटिव सिरे को खराब कर सकता है। स्टैनफोर्ड के रिसर्चर्स ने इस समस्या के समाधान के लिए इलेक्ट्रोड के पॉजिटिव सिरे(एनोड) पर नेगेटिव आयन की परत चढा दी, जिससे एनोड के खराब होने की प्रक्रिया काफी हद तक धीमी हो जाती है।

  3. नेगेटिव आयन की परत के बिना एनोड खारे पानी में सिर्फ 12 घंटे काम कर सकता है। लेकिन परत चढ़ाने के बाद इसे एक हजार घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

    टीम ने सोलर एनर्जी से चलने वाला सिस्टम भी तैयार किया है, जिसमें बिजली की जगह सोलर एनर्जी का उपयोग करके हाइड्रोजन ईधन बनाया जा सकेगा।

  4. इस प्रक्रिया से निकलने वाली हाइड्रोजन का इस्तेमाल ईधन के लिए किया जा सकता है। वहीं इससे निकलने वाली ऑक्सीजन सांस लेने योग्य होती है, इसलिए इसका इस्तेमाल भी ऑक्सीजन टैंक्स बनाने में किया जा सकता है। यह सिस्टम गोताखोरों की कार्यप्रणाली को भी आसान कर सकता है।

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