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टेक्नोलॉजी / दिल्ली के छात्रों ने बनाया ऐसा ऐप जो नापेगा एयर पॉल्यूशन का लेवल, अमेरिकी सोसायटी ने दिया 1.10 लाख का इनाम



three indian students develop app to measure delhi air quality index
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three indian students develop app to measure delhi air quality index

Dainik Bhaskar

Nov 05, 2018, 04:07 PM IST

गैजेट डेस्क. दिल्ली के भारती विद्यापीठ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के तीन छात्रों ने मिलकर एक ऐसी मोबाइल ऐप बनाई है, जिसकी मदद से एयर पॉल्यूशन का लेवल चेक किया जा सकता है। इस ऐप का नाम 'Air Cognizer' है जिसे तन्मय श्रीवास्तव, कनिष्क जीत और प्रेरणा खन्ना ने मिलकर बनाया है। इसके लिए इन तीनों को अमेरिका की 'मारकोनी सोसायटी' ने 1,500 डॉलर (करीब 1.10 लाख रुपए) का इनाम भी दिया है।

सिर्फ स्मार्टफोन के जरिए ही पता चल जाएगा

  1. Air Cognizer ऐप की मदद से एयर पॉल्यूशन का लेवल पता करने के लिए किसी तरह की किसी एक्स्ट्रा डिवाइस की जरूरत नहीं होगी, बल्कि सिर्फ स्मार्टफोन पर ही इसे डाउनलोड कर चेक कर सकेंगे। ये ऐप गूगल प्ले स्टोर पर डाउनलोड के लिए मौजूद है।

  2. इस ऐप की मदद से एयर पॉल्यूशन लेवल चेक करने के लिए यूजर को बस आसमान की फोटो क्लिक करनी होगी और उसे अपलोड करना होगा। जिसके बाद मशीन लर्निंग के जरिए यूजर को अपने एरिया का 'एयर क्वालिटी इंडेक्स' पता चल जाएगा।

एयर पॉल्यूशन का अनुमान लगाने वाली वेबसाइट को दूसरा पुरुस्कार

  1. दरअसल, अमेरिका की मारकोनी सोसायटी ने भारत में 2017 में आईआईटी-दिल्ली के साथ मिलकर 'सेलेस्टिनी प्रोग्राम' शुरू किया था। इस साल दिल्ली-एनसीआर में एयर पॉल्यूशन की बढ़ती समस्या और रोड सेफ्टी की थीम रखी गई थी, जिसके लिए तीन-तीन लोगों की टीम बनाई गई थी।

  2. इस कॉन्टेस्ट में पहला पुरुस्कार भारती विद्यापीठ कॉलेज के तन्मय श्रीवास्तव, कनिष्क जीत और प्रेरणा खन्ना को मिला। जबकि दूसरा पुरुस्कार चंडीगढ़ की यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (UIET) के दिव्यम मदान और राधिका दुआ को मिला, जिन्होंने एक ऐसी वेबसाइट बनाई थी जो दिल्ली में होने वाले अगले 24 घंटे के  एयर पॉल्यूशन के लेवल का अनुमान लगाती है।

  3. वहीं, तीसरा पुरुस्कार भी भारती विद्यापीठ कॉलेज के सिद्धार्थ तालिया, निकुंज अग्रवाल और समरजीत कौर को मिला, जिन्होंने Raspberry Pi  और Xbee रेडियो मॉड्यूल टेक्नीक की मदद से एक ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रोटोटाइप तैयार किया है जो संभावित खतरों का पता लगाकर व्हीकल-टू-व्हीकल ट्रांसमिट करता है।

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