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महिलाओं को अश्लील कॉल और मैसेज करने वालों में 11% लोग जान-पहचान वाले

एक वर्ष पहले
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गैजेट डेस्क. मोबाइल एप ट्रूकॉलर के 2,150 महिलाओं पर करवाए गए सर्वे में सामने आया है कि देश में तीन में से एक महिला को नियमित रूप से अश्लील फोन या मैसेज आते है। जिनमें 11% लोग उनकी जान पहचान वाले होते हैं। हालांकि ये मामले 2017 के मुकाबले 2018 में कम हुए हैं। सर्वे में शामिल महिलाओं ने बताया कि 52% को सप्ताह में एक बार अश्लील कॉल या मैसेज आते हैं, जबकि 2017 में 78% महिलाओं को इस तरह के कॉल मैसेज आते थे। वहीं, 2018 में 45% को अनचाहे वीडियो और फोटो भेजे गए, जबकि 2017 में 82% के साथ ऐसा हुआ। सर्वे के अनुसार ऐसे मामलों में 38% महिलाएं ही पुलिस में शिकायत करती हैं।

1) 92% महिलाएं ब्लॉक कर देती हैं नंबर

62% महिलाएं उस अनजान कॉलर को सर्च करने की कोशिश करती हैं। 16% महिलाएं सोशल मीडिया पर इसका जिक्र करती हैं, स्क्रीन शॉट और नंबर शेयर करती हैं। 1% अपने परिवार के किसी पुरुष सदस्य या दोस्त को कॉल रिसीव करने कहती हैं। 11% अपना नंबर बदल देती हैं। 32% ऐसे कॉल को नजरअंदाज करती हैं। वहीं 92% महिलाएं सीधे नंबर ब्लॉक कर देती हैं।

महिलाओं को फोन या सोशल मीडिया पर उनकी मर्जी के बिना दोस्ती के लिए कहना उत्पीड़न का मामला है। निजता में दखल देना अपराध माना जाता है। बार-बार टैक्स्ट मैसेज भेजना, मिस्ड कॉल करना, फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना, महिला के स्टेटस अपडेट पर नजर रखना और सोशल मीडिया पर उसके पीछे लगे रहना आईपीसी की धारा 354डी के तहत दंडनीय अपराध है। 

सर्वे के मुताबिक महिलाओं को अश्लील कॉल या मैसेज करने वालों में 74% अनजान कॉलर होते हैं। 23% स्टॉकर होते हैं, वहीं 11% लोग महिला की पहचान वाले होते हैं।

5) फोन पर बिना मर्जी दोस्ती के लिए कहना भी अपराध है

साइबर स्पाइंग आईटी एक्ट की धारा 66ई के तहत अपराध है जिसमें चेंजिंग रूम या वॉशरूम में कैमरे लगाकर वीडियो बनाना आता है। भारत में साल 2016 में इसके 159 मामले दर्ज किए गए हैं। 

दिल्ली में 28% महिलाओं को हर सप्ताह यौन उत्पीड़न से जुड़े कॉल या मैसेज आते हैं। जो बाकि किसी भी राज्य की तुलना में सबसे ज्यादा है।

साइबर पोर्नोग्राफी के जरिए ब्लैकमेल या बदनाम करने के लिए अश्लील फोटो या वीडियो को ऑनलाइन शेयर करना या फोटो के साथ छेड़छाड़ कर वायरल करना इसमें आता है। आईटी एक्ट की धारा 67 और 67ए के तहत केस दर्ज किया जाता है। 2016 में भारत में ऐसे 930 केस दर्ज किए गए हैं। 

इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक देश में 50 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं जिनमें 30% यानी 14.3 करोड़ महिलाएं हैं। एनसीआरबी के मुताबिक 2016 में देश में महिलाओं के खिलाफ साइबर क्राइम के 930 मामले दर्ज किए गए थे। 

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