स्टडी / एंड्रॉयड डिवाइस में मौजूद प्री-इंस्टाल ऐप तक पहुंच रही है सारी पर्सनल इंफॉर्मेशन



users have limited control over personal information connected by pre installed app
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users have limited control over personal information connected by pre installed app

  • 130 देश के 2,748 यूजर्स और 214 वेंडर स्टडी में किए गए शामिल
  • दावा- प्री-इंस्टॉल ऐप के लिए नहीं उठाए जाते कड़े सुरक्षा कदम

Dainik Bhaskar

Mar 26, 2019, 04:00 PM IST

गैजेट डेस्क. नए एंड्रॉयड मोबाइल डिवाइस में मौजूद प्री-इंस्टॉल ऐप और प्रोग्राम यूजर्स की पर्सनल इंफॉर्मेंशन तक पहुंचने में काफी हद तक कामयाब होती है, जिनपर ज्यादातर यूजर्स का ध्यान ही नहीं जाता। इसका खुलासा आईएमडीईए नेटवर्क इंस्टीट्यूट और स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी के द्वारा की गई स्टडी में हुआ, जिसमें 2,748 एंड्रॉयड डिवाइस यूजर्स शामिल थे। 

प्री-इंस्टॉल ऐप के सिक्योरिटी चेक में होती है लापरवाही

  1. स्टडी में इस बात की जानकारी नहीं दी गई कि यूरोपियन संघ का जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन लॉ, एंडॉयड डिवाइस की प्री-इंस्टॉल ऐप पर कितनी और किस हद तक निगरानी रखता है।

  2. एंड्रॉयड का ओपन सोर्स नेचर होने की वजह से स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी इसके ऑपरेटिंग सिस्टम को अपने अनुसार कस्टमाइज करती है। कंपनियां यूजर को फोन देने से पहले ही इसके ओएस में अलग अलग तरह की ऐप जोड़ देती है।

  3. स्टडी में पाया गया कि डिवाइस में पहले से मौजूद ऐप यूजर की पर्सनल इंफॉर्मेशन तक पहुंचने के लिए यूजर से अनुरोध करती है और पर्सनल डिटेल तक पहुंच जाती है जहां, गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड की गई ऐप नहीं पहुंच पाती। यह यूजर की प्राइवेसी और सिक्योरिटी के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है।

  4. स्टडी में पाया गया कि गूगल भी प्री-इंस्टॉल ऐप की सिक्योरिटी चेक करने के लिए कोई कठोर कदम नहीं उठाता है, जो वह प्ले स्टोर वर्जन ऐप के लिए करता है। अक्सर देखा गया है कि प्री-इंस्टॉल ऐप को अनइंस्टॉल भी नहीं किया जा सकता।

  5. स्टडी के सह-लेखक जुआन ने बताया कि पारदर्शिता और नियमों की कमी के कारण इन ऐप की कोई निगरानी नहीं करता।

  6. इसपर गूगल ने सफाई पेश करते हुए कहा कि हम अपने सभी मैनुफैक्चर को एक खास टूल प्रदान करते हैं, जिससे वह यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनका सॉफ्टवेयर गूगल की गोपनियता और सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है या नहीं।

  7. गूगल के एक प्रवक्ता का कहना है कि हम सहयोगियों को 

    प्री-इंस्टॉल ऐप की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट नीति प्रदान करते हैं और नियमित रूप से संभावित खतरें के बारे में पहले ही जानकारी दे देते हैं। हालांकि अब पहले से इंस्टॉल ऐप की जांच को बढ़ा दिया गया है।

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