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घटनाक्रम / पांच वर्ष में 6800 लोगों की मृत्यु, अमेरिका में पुलिस के हाथों मौतों के 1.7% मामलों में ही मुकदमा



6800 deaths in five years 1.7 percent of deaths at the hands of police in us
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6800 deaths in five years 1.7 percent of deaths at the hands of police in us

  • कम प्रकरणों में सजा तो होती है पर बहुत कम
  • पुलिस यूनियन मुकदमा न चलाने के लिए जांच कर्ताओं को प्रभावित करती हैं।

Dainik Bhaskar

Aug 31, 2019, 07:18 PM IST

मेलिसा चान
पिछले कुछ वर्षों का घटनाक्रम बताता है कि अमेरिका में पुलिस के हाथों नागरिकों की मौतों के बहुत कम मामले अदालतों तक पहुंचते हैं। घातक पुलिस मुठभेड़ों पर नजर रखने वाले रिसर्च ग्रुप-मैपिंग पुलिस वायोलैंस के अनुसार 2013 से 2018 के बीच पुलिस के हाथों दुर्घटनावश या इरादतन 6800 व्यक्ति मारे गए। किल्ड पुलिस डॉट नेट ने बताया कि 2017 और 2018 में पुलिस ने देश में 2300 से अधिक लोगों पर जानलेवा गोलीचालन किया। वाशिंगटन पोस्ट ने इसी अवधि में ऐसी घटनाओं की संख्या 1978 बताई है।

पुलिस मुठभेड़ों में नागरिकों के घायल होने और मरने के व्यापक राष्ट्रीय आंकड़े नहीं मिलते हैं। मैपिंग पुलिस वायोलेंस साइट के संस्थापक सैमुअल सिनायांगे बताते हैं, हमने जितने मामले बताए हैं, उनमें से केवल 1.7% मामलों में ही किसी पुलिसकर्मी पर मुकदमा चलाया गया है। यह साइट खबरों, पुलिस रिपोर्ट, सोशल मीडिया और अन्य स्रोतों से आंकड़े जुटाती है।

पुलिस हिंसा में मौतों और न्याय की स्थिति को समझने के लिए कुछ उदाहरणों पर गौर कर सकते हैं। जुलाई 2014 में न्यूयॉर्क शहर के एक पुलिस अधिकारी डेनियल पेंटेलियो ने 43 वर्षीय एरिक गारनर को जमीन पर गिराकर मार डाला था। गारनर अश्वेत था। उसकी मौत दम घुटने से हुई थी। अंतिम सांस लेने से पहले वह बार-बार कह रहा था, मैं सांस नहीं ले सकता हूं। 16 जुलाई को फेडरल जांचकर्ताओं ने ऐलान किया कि वे गारनर को मारने वाले पुलिस अफसर के खिलाफ नागरिक अधिकारों के हनन का आरोप नहीं लगाएंगे। ग्रेंड ज्यूरी ने भी मुकदमा चलाने से इनकार कर दिया। पांच वर्ष तक पेंटेलियो को 85000 डॉलर वेतन मिलता रहा। वह डेस्क ड्यूटी पर रहा। 19 अगस्त को पुलिस कमिश्नर ने उसे निकाल दिया। गारनर की बेटी एमेराल्ड स्नाइप्स गारनर कहती हैं,  यह फैसला पांच वर्ष पहले होना था।

104 में से 36 पुलिस अफसरों को सजा
पुलिस अफसरों पर मुकदमा चलने की स्थिति में दुर्लभ मामलों में सजा होती है। रिटायर्ड पुलिस अफसर और अपराधशास्त्री फिलिप स्टिंसन कहते हैं, 2005 के बाद ड्यूटी के दौरान घातक शूटिंग में हत्या के लिए 104 पुलिस अधिकारी गिरफ्तार किए गए थे। इनमें से केवल 36 को सजा हुई है। शोधकर्ताओं के अनुसार अगर अधिकारी को सजा भी हुई तो नागरिकों की तुलना में कम होगी। पुलिस के खिलाफ मुकदमों की पैरवी करने वाले वकीलों का कहना है, इसके कई कारण हैं। पुलिसकर्मियों की शक्तिशाली यूनियन निर्वाचित जिला जांचकर्ताओं को आरोपों की छानबीन से हतोत्साहित करती है।

ज्यूरी के सदस्य भी पुलिस कर्मियों द्वारा ड्यूटी के समय खतरनाक मौकों पर कुछ क्षणों में लिए गए फैसलों पर सवाल उठाने से बचते हैं। समाज में ऐसे लोगों की संख्या कम नहीं है जो पुलिस को अच्छा मानते हैं। इनमें से एकाध व्यक्ति को ज्यूरी में जगह मिल जाती है। राष्ट्रीय पुलिस अधिकारी स्मारक फंड और फेडरल जांच ब्यूरो के अनुसार पिछले दस सालों में 1500 से अधिक पुलिस अधिकारी ड्यूटी के दौरान मारे गए और हजारों घायल हुए। 2018 में ड्यूटी करते हुए 55 अफसरों की हमले से मौत हो गई। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 1980 में पुलिस अधिकारियों के लिए बल प्रयोग के कुछ मापदंड तय किए थे। उसमें कहा गया है, यदि अधिकारियों को भरोसा हो जाए कि उन्हें या दूसरे लोगों को गंभीर खतरा है तो जानलेवा बलप्रयोग वाजिब है। पुिलस हिंसा के कई मामलों में प्रभावित परिवारों  की ओर से पैरवी कर चुके वकील बेन क्रंप का कहना है, यह अमेरिका की सर्वोच्च अदालत से जेल से बाहर निकलने का पास है।

अमनेस्टी इंटरनेशनल अमेरिका की 2015 की रिपोर्ट में बताया गया कि कोई भी राज्य इस अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन नहीं करता जिसके तहत अधिकारियों पर अपने या दूसरे लोगों के जीवन की रक्षा के लिए अंतिम उपाय के रूप में जानलेवा बलप्रयोग का अधिकार है। फरवरी में कैलिफोर्निया राज्य विधानसभा में पेश एक विधेयक में अधिकारियों को उचित विकल्प न होने की स्थिति में ही घातक बल के इस्तेमाल की अनुमति  देने का प्रावधान किया गया है। कई पुलिस यूनियनों नेे इसका विरोध किया है।
 

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