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अमेरिका चुनाव / अमेजन और बोइंग सहित कई बड़ी कंपनियों ने करोड़ों रुपए का चंदा दिया



Many big companies including Amazon and Boeing donated crores of rupees
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Many big companies including Amazon and Boeing donated crores of rupees

  • बिजनेस के लिए श्रेष्ठ घोषित सिएटल शहर के चुनाव : प्रगतिशील राजनेताओं और कॉर्पोरेट हितों के बीच खींचतान

Dainik Bhaskar

Nov 04, 2019, 12:21 PM IST

एलाना सेमुअल्स. अमेरिका के सिएटल में सिटी कौंसिल के चुनाव में कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों ने जबर्दस्त दिलचस्पी दिखाई है। कौंसिल के चुनाव 5 नवंबर को होंगे। परिषद पर वामपंथी झुकाव रखने वाले सदस्यों का बहुमत है। इसलिए व्यावसायिक तबका चाहता है कि अधिक उदार विचार रखने वाले लोगों का समर्थन किया जाए। सिएटल मैग्जीन के स्तंभकार नुटे बर्गर का कहना है, ‘चैम्बर ऑफ कॉमर्स इस चुनाव को कौंसिल पर नियंत्रण करने के अवसर के रूप में देख रहा है’। वाशिंगटन टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रमुख और वेंचर केपिटलिस्ट हीथर रैडमैन कहते हैं, ‘आम धारणा है कि सिटी कौंसिल ठीक से काम नहीं कर रही है’। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट सहित कई कंपनियां एसोसिएशन की सदस्य हैं। 

 

सिएटल शहर के चुनावों की गूंज देशभर में सुनाई पड़ने के आसार हैं क्योंकि अमेरिका के शहरों में प्रगतिशील राजनेताओं और कॉर्पोरेट हितों के बीच संघर्ष चल रहा है। पिछले वर्ष फोर्ब्स पत्रिका ने सिएटल को देश में बिजनेस करने और करिअर के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान घोषित किया था। वहां कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां काम कर रही हैं। शहर में 2014 के बाद रिटेल बिक्री 42% बढ़ी है।

 

टेक्नोलॉजी सेक्टर मौजूदा कौंसिल के निर्वाचित प्रतिनिधियों की कार्यशैली से असहमत है। अमेजन ने सिएटल चैम्बर ऑफ कॉमर्स की राजनीतिक एक्शन कमेटी (पीएसी) को लगभग एक हजार करोड़ रुपए चंदा दिया है। कमेटी एक सीट को छोड़कर सभी सीटों पर नए प्रत्याशियों का समर्थन कर रही है। अमेजन के अधिकारियों ने वर्तमान सदस्यों के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले कई उम्मीदवारों को 35000 रुपए और पीएसी को अधिकतम साढ़े तीन लाख रुपए दिए हैं। पीएसी को चंदा देने वाली अन्य कंपनियों में एक्सपीडिया (35 लाख रु.) और बोइंग (21 लाख रु.) शामिल हैं।

 

सवाल उठता है, टेक्नोलॉजी कंपनियों की भारी धनराशि इन चुनावों पर कितना प्रभाव डाल पाएगी? पिछले वर्ष सिएटल कौंसिल ने आवास योजनाओं और उससे संबंधित कार्यक्रमों के लिए धन जुटाने के वास्तेबड़ी कंपनियों पर प्रति कर्मचारी 19000 रु. टैक्स लगाने का प्रस्ताव पास किया था। इसके बाद कारोबारियों ने कर प्रस्ताव पर जनमतसंग्रह कराने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए थे। कॉर्पोरेट सेक्टर के भारी दबाव में टैक्स प्रस्ताव का समर्थन करने वाले कई पार्षदों ने उसे रद्द करने के लिए वोट दिए। इस तरह सिएटल के व्यापारी समुदाय की जीत हुई और एक कल्याणकारी कार्यक्रम की बलि चढ़ गई। अमेरिका के अधिकतर शहरों में उदारवाद की लहर चलने के कारण बिजनेस समुदाय और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है। प्यू एजेंसी के अनुसार 2017 में शहरी इलाकों में 62% रजिस्टर्ड वोटर डेमोक्रेट थे। 1998 में इनकी संख्या 55% थी। सिएटल के चुनावों से परीक्षा होगी कि क्या बड़ी कंपनियों का पैसा शहरों के उदार लोगों को प्रभावित कर पाएगा।

 

(टाइम और टाइम लोगो टाइम के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क हैं। इनका उपयोग अनुबंध के तहत किया गया है।)

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