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आंदोलन / हांगकांग की आजादी के खिलाफ चीन के प्रतिबंधों का नतीजा है यह बगावत



rebellion is the result of china restrictions against hong kong independence
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rebellion is the result of china restrictions against hong kong independence

  • पर्यटन, लग्जरी कारोबार, सर्विस इंडस्ट्री को नुकसान
  • धीमी विकास दर के कारण चीन कड़ी कार्रवाई से बच रहा

Dainik Bhaskar

Aug 19, 2019, 12:57 PM IST

फेलिज सोलोमन
हांगकांग में लगातार तीन माह से चल रहा आंदोलन शहर की आत्मा के खिलाफ चीन द्वारा छेड़े गए युद्ध के उग्र प्रतिरोध का नतीजा है। राष्ट्रपति शी जिन पिंग की सरकार ने सामाजिक नियंत्रण के माध्यमों का चुपचाप उपयोग किया है। अदालतों, स्कूलों, कॉलेजों, मीडिया और अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण की शुरुआत कर दी गई। लोगों को लगा कि शहर का अनूठा चरित्र और सभी तरह की स्वतंत्रता धीरे-धीरे खत्म हो रही है। आखिरकार चीन को हांगकांग सौंपे जाने की सालगिरह (1 जुलाई) पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा। हांगकांग के अंतिम ब्रिटिश गवर्नर क्रिस पैटन कहते हैं, ‘शी जिन पिंग जिस तरह चीन में असंतोष का दमन करते हैं, वैसा ही शहर में हो रहा है। स्वतंत्र अभिव्यक्ति, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को ध्वस्त करने और कानून के शासन का खात्मा होने से लोग बेचैन हैं’।
 

मौजूदा आंदोलन भगोड़ों और आरोपियों के मुख्यभूमि चीन भेजने के विधेयक के विरोध में भड़का है। असंतोष की लहर से पर्यटन, लग्जरी कारोबार और सर्विस इंडस्ट्री को ज्यादा नुकसान हुआ है। हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज जनवरी के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकन चैम्बर ऑफ कॉमर्स, हांगकांग के प्रेसिडेंट तारा जोसेफ ने सरकार से निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए कदम उठाने कहा है। बीजिंग से अधीरता के संकेत भी मिल रहे हैं। वह तेजी से गलत खबरें फैला रहा है। सरकार मौजूदा संकट को विदेशी ताकतों की दखलंदाजी मानती है। उसका दावा है, अमेरिका की अलगाववादियों से सांठगांठ है।
 

अगस्त के दूसरे सप्ताह में चीन से गंभीर चेतावनियां आने लगीं। हांगकांग में चीन के सर्वोच्च अधिकारी यांग गुआंग ने आगाह किया है कि ‘अशांति में आतंकवाद के चिन्ह दिखाई पड़ रहे हैं’। अगर विरोध का फैलाव होता है तो हांगकांग सरकार पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए बुला सकती है। 1989 में थ्येन ऑनमन चौक की रैलियों के बाद चीन का पहला व्यापक विरोध हांगकांग में सामने आया है। इस विरोध का अंत निहत्थे लोगों की हत्याओं के रूप में हुआ था। कई लोगों का विश्वास है कि धीमी आर्थिक विकास दर और अमेरिका से व्यापार युद्ध के बीच चीन 1989 के दोहराव से बच सकता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मामले में चीन की आलोचना करने से इनकार किया है। उन्होंने रिपोर्टरों से कहा, उम्मीद है मामला शांति से सुलझ जाएगा।
(साथ में एमी गुनिया, चार्ली कैम्पबेल, मेडेलिन रोशे, जॉन वालकॉट)


वादे भुलाने और आजादी पर अंकुश की कहानी 
हांगकांग के इस मोड़ पर पहुंचने की कहानी वादे भुलाने से जुड़ी है। 1997 में जब शहर ब्रिटेन से चीन के आधिपत्य में आया तो समझौते को- एक देश, दो सिस्टम नाम दिया गया था। 50 वर्ष के लिए क्षेत्र की स्वायत्तता बनाए रखने की गारंटी दी गई थी। हांगकांग पूर्व और पश्चिम के बीच सभी तरह के कारोबार का रास्ता है। उसकी साफ-सुथरी सरकार, स्वतंत्र न्यायपालिका, धर्म और अभिव्यक्ति की आजादी पर नागरिक गर्व करते हैं। पिछले 22 वर्षों में लोगों ने हांगकांग की मूल भावना को सुरक्षित रखने के लिए कई बार विरोध जताया है। 2003 में नेशनल सिक्योरिटी विधेयक के खिलाफ 5 लाख लोग सड़कों पर उतरे थे। 2012 में छात्रों ने स्कूल, कॉलेजों के कोर्स में परिवर्तन का विरोध किया था।

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