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अमेरिकी चुनाव / भारतीय मूल की कमला हैरिस का एजेंडा ट्रम्प के लिए कड़ी चुनौती बनेगा



US election: Indian-origin Kamala Harris's agenda will be a tough challenge for Trump
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US election: Indian-origin Kamala Harris's agenda will be a tough challenge for Trump

Dainik Bhaskar

Oct 06, 2019, 06:49 PM IST

मोली बॉल

कई कमजोरियों के बावजूद भारतीय मूल की कमला हैरिस को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी के लिए मजबूत दावेदार माना जा रहा है। कई लोग उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को कड़ी चुनौती देने वाले नेता के रूप में देखते हैं। उन्हें अपने माता-पिता से विरासत में एक्टिविज्म मिला है। वे अपनी थीम को मध्यम वर्ग की समस्याओं के हल का रास्ता बताती हैं। लेकिन, वे लोगों का ध्यान ज्यादा नहीं खींच पाई हैं। कई डेमोक्रेट समर्थक सोचते हैं, जब वोटर स्पष्टता और महत्वाकांक्षी दृष्टि की अपेक्षा कर रहा है तब उनका एजेंडा अस्पष्ट और वादा ना करने वाला है। जनवरी में शानदार शुरुआत के
बाद हैरिस का अभियान धीमा पड़ गया है। वैसे, वे उम्मीदवारी की दौड़ में बनी हुई हैं। राष्ट्रीय और राज्य सर्वेक्षणों में उनकी लोकप्रियता 5-6 अंक के बीच है।

हैरिस की छवि अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले योद्धा की

  1. आलोचकों का कहना है, महत्वपूर्ण नीति विषयक मसलों जैसे स्वास्थ्य सेवा, इमिग्रेशन पर उनका रुख डांवाडोल और अस्पष्ट है। उनके अधिकतर भाषणों में एकता पर जोर रहता है। डेमोक्रेटिक पार्टी के पांच सर्वोच्च दावेदारों के बीच उनकी रेटिंग में निरंतरता है। उन्होंने, 30 सितंबर तक 82 करोड़ रुपए से अधिक चंदा जुटा लिया था। उनके सहयोगियों को उम्मीद है, हैरिस को वोटरों के बदलते फोकस से फायदा मिलेगा। किस्मत थोड़ा साथ दे तो वे उम्मीदवार बन सकती हैं। 

  2. इधर, पार्टी के कई बड़े दावेदारों में कुछ कमजोरी नजर आने लगी है। पूर्व उपराष्ट्रपति जो बाइडन सबसे आगे हैं लेकिन बहस में कमजोर प्रदर्शन के कारण वे बाहर हो सकते हैं। इस स्थिति में एलिजाबेथ वारेन और बर्नी सेंडर्सप्रमुख दावेदार होंगे। वामपंथी रुख की वजह से दोनों को मुख्यधारा के डेमोक्रेट समर्थकों के विद्रोह का सामना करना पड़ सकता है। फिर विकल्प के तौर पर हैरिस उभरती हैं। वे व्यावहारिक आदर्शवादी हैं। उनका राजनीतिक कौशल संदेह से परे है। उनकी छवि अड़े रहने की बजाय समस्याओं को सुलझाने की है। बहुत लोग उन्हें अन्याय के खिलाफ आक्रामकता से लड़ने वाले योद्धा के रूप में देखते हैं।

  3. 54 वर्षीय अश्वेत महिला होने के कारण उनका दावा मजबूत है क्योंकि डेमोक्रेट समर्थक विविधता और नए चेहरों के लिए बेचैन हैं। पांच प्रमुख दावेदारों में पीट बटीगिएग भी शामिल हैं। लेकिन हैरिस महिला और एकमात्र अश्वेत हैं। वे 70 वर्ष से अधिक आयु के तीन दावेदारों से 15 वर्षयुवा हैं। कानून का पालन कराने की भूमिका से जुड़ी उनकी पृष्ठभूमि उन्हें और मजबूत दावेदार बनाती है। वैसे, डिस्ट्रिक्ट अटार्नी और स्टेट अटार्नी जनरल के रूप में उनका रिकॉर्ड उन पर भारी भी पड़ सकता है। वे आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक उदार बनाने की वकालत करती रही हैं। दूसरी तरफ नए राजनीतिक माहौल में वोटर हैरिस को ऐसे नेता के रूप में देख सकते हैं जो राष्ट्रीय मंच पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को आंख मिलाकर चुनौती दे सकता है।

  4. हैरिस राष्ट्रपति के बारे में कहती हैं, इस व्यक्ति ने कानून के शासन को पूरी तरह कुचल दिया है। 2016 में संसद सदस्य चुने जाने के बाद से हैरिस ने सीनेट में ट्रम्प सरकार के अधिकारियों से तीखी पूछताछ के लिए ख्याति पाई है। उन्होंने वर्तमान अटार्नी जनरल विलियम बर, पूर्व अटार्नी जनरल जेफ सेसंस और सुप्रीम कोर्ट के लिए नामजद जज ब्रेट केवेना को अपने सवालों से परेशान कर दिया था। ट्रम्प के खिलाफ महाअभियोग की प्रक्रिया शुरू होने पर कई लोग उन्हें सीनेट में प्रोसीक्यूटर की भूमिका में देखना चाहते हैं।

  5. चुनाव अभियान की थीम रात तीन बजे से जुड़ी

    कई बार कमला हैरिस आधी रात के बाद जाग पड़ती हैं। वे सोचती हैं, मेरी सौतेली बेटी अपने न्यूयॉर्क अपार्टमेंट में कैसी होगी? कई बार उनके लिए यह समय पिछले दिन की घटनाओं का जायजा लेने का अवसर होता है। वाटरलू, आयोवा में सभा के बाद स्टेज के पास बैठी हैरिस बताती हैं, ‘मैं चिंतित हूं। मैं चिंता करते हुए पैदा हुई। मेरी मां और दादी भी चिंता में डूबी रहती थीं। यह मेरे खून में है’। सोते-सोते झटके से जाग पड़ना हैरिस के चुनाव अभियान की थीम बन चुका है। वे अपने भाषण में पूछती हैं, अमेरिकी जनता की नींद तड़के तीन बजे किन कारणों से टूटती है। फिर वे जनता की चिंता बताती हैं, नौकरी बचाने की चुनौती, स्वास्थ्य सेवाओं का संकट, बढ़ते आंधी, तूफान। हैरिस कहती हैं, रात तीन बजे के समय का जिक्र उनके अभियान की रीढ़ की हड़्डी है।

  6. कमला की मां भारतीय हैं

    कमला हैरिस के माता-पिता कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले में पढ़ाई करने बाहर से अमेरिका आए थे। हैरिस की मां श्यामला गोपालन भारत और पिता डोनाल्ड हैरिस जमैका से आए हैं। दोनों नागरिक अधिकार आंदोलनों में सक्रिय रहे। वे अश्वेतों की जागरुकता और आजादी पर चर्चा करने वाले छात्रों के एक समूह से जुड़े थे। मां की मौत 2009 में कैंसर से हो गई।
     

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