एजुकेशन को बेहतर बनाने के लिए तैयार होंगे 5 साल में 100 यंग लीडर्स

Chandigarh News - सांझी सिख्या का मतलब मिलजुल कर सीखना और शेयर करना। यह एक एनजीओ है, जो पिछले साल जून से यूथ के मिलकर एजुकेशन आैर उसके...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:30 AM IST
Chandigarh News - 100 young leaders in 5 years will be ready to improve education
सांझी सिख्या का मतलब मिलजुल कर सीखना और शेयर करना। यह एक एनजीओ है, जो पिछले साल जून से यूथ के मिलकर एजुकेशन आैर उसके सिस्टम पर काम कर रही है। यह बताया एनजीओ के डायरेक्टर व मेंबर सिमरनप्रीत सिंह ने। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) में एक हफ्ते से चल रहे पंजाब यूथ लीडर प्रोग्राम (पीवाईएलपी)के तहत 11 युवाओं को पंजाब की हिस्ट्री, कल्चर, लिट्रेचर आदि की ट्रेनिंग दी गई। इस पीवाईएलपी को आज यानि 14 जुलाई को पेक के ऑडिटोरियम में लॉन्च किया जाएगा। इस दौरान एक प्ले भी खेला जाएगा जो पंजाब पर ही आधारित होगा। इसके बाद ये युवा फतेहगढ़ साहिब के गांव के गवर्नमेंट स्कूल में जाकर टीचर्स, सरपंच और पेरेंट्स के साथ मिलकर वहां की एजुकेशन पर काम करेंगे। और उन समस्याओं का मिलजुल कर हल निकालेंगे जो वहां के बच्चों को पढ़ाई के दौरान आ रही हैं।

एनजीओ बनाने का आइडिया कैसे आया। इस सिमरनप्रीत ने बताया-मेरा जन्म अागरा में हुआ, लेकिन मेरे दादा-दादी पश्चिमी पंजाब से यहां आकर बसे थे। पंजाब घूमते हुए देखा कि यहां के युवा ड्रग्स का नशा करते हैं। इकॉनोमी बिगड़ने के कारण लोग विदेश जाना प्रेफर करते हैं। इन्हीं समस्याओं को देखकर लगा कि ये सब हो क्यों रहा है? यहां कोई रहना क्यों नहीं चाहता। 2017 में अलग-अलग शहर के छह लोग मैं, रजत, इशप्रीत कौर, अंकित छाबड़ा, शिव पूजन मिले। सब अलग काम कर रहे थे पर सोच एक थी। सिमरनप्रीत बताते हैं-हमने अपनी जॉब छोड़ी और रियलिटी चेक के लिए पंजाब ट्रेवल पर निकले। 10 डिस्ट्रिक्ट बठिंडा, अमृतसर, मोगा, लुधियाना, जालंधर, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब आदि जगह पर गए। लोगों से बात की और लंबी रिसर्च के बाद 2018 में सांझी सिख्या बनाकर उम्मीद, हौसले और संभावनाओं पर काम करना शुरू किया। हम पांच साल में 100 यंग लीडर्स तैयार करेंगे।

यूथ अपने करिअर के अलावा अगर कम्युनिटी की समस्याओं को हाथ में लेकर समाज को बदलने के लिए कैसे तैयार हो रहा है... जानिए सांझी सिख्या एनजीओ से जुड़ी इस खबर में...

पांच साल में सौ यंग लीडर्स तैयार करने हैं

मंत्रा सोशल सर्विस एक एनजीओ है बैंगलोर की, जो प्राइमरी एजुकेशन पर काम कर रही है। यहां से हमने सीटीपी (क्लस्टर ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम) सीखा। और इसे पंजाब के स्कूल में इम्प्लीमेंट किया। हमारा मकसद अगले पांच साल में सौ यंग लीडर्स तैयार करना है, जिसके लिए मुंबई दिल्ली, बैंगलोर, यूके, यूएस, कनाडा आदि दो सौ एप्लिकेशन आई। अभी हमने 11 लोगों को चुना हैं।  सिमरनप्रीत सिंह, डायरेक्टर व मेंबर

इन पर रहता है फोकस|बच्चों की नींव अच्छी होगी तो वह गलत रास्तों पर नहीं चलेंगे। इसलिए हमारा फोकस गवर्नमेंट स्कूल के प्राइमरी एजुकेशन पर है। इसमें फिजीकल एंवायर्नमेंट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा होना चाहिए, पढ़ाई, स्कूल कैसे होने चाहिए। इसके अलावा बिल्डिंग लर्निंग एड पर भी काम करते हैं। जैसे दीवार पर राइम लिख दी। अगर बच्चों को एंगल समझाने हो तो दरवाजों पर एंगल बना कर दिखाना आदि। यह सब इंट्रस्टिंग तो होता ही है साथ में बच्चे भी जल्दी समझते हैं। फिर आता है सोशल एंवायर्नमेंट। इसमें यह देखते हैं कि घर का माहौल कैसे है। पेरेंट्स बच्चों पर ध्यान देते हैं या नहीं। क्योंकि बच्चों पर आसपास के लोगों का प्रभाव भी पड़ता है।

बच्चे जान सकें कि बनना क्या चाहते हैं

पढ़ाई के लिए शहर आई तो पता नहीं था चीजों को एक्सप्लोर कैसे करना है। यह भी नहीं जानती थी कि करिअर किसमें बनाना है। फिर इंजीनियरिंग, एमबीए करने के बाद टीचिंग फॉर इंडिया में दो साल काम किया। और सोच लिया कि बच्चों को पढ़ाना है ताकि वह जान सकें कि उन्हें अपनी जिंदगी में क्या करना चाहते हैं और बनना चाहते हैं।  इशप्रीत कौर गनौर, मेंबर

ये हैं यंग लीडर्स

 मैं 12 साल से न्यूयॉर्क में था। वहां टॉक सेशन में लोग रेप, सेक्सुअल एब्यूज और पंजाब में ड्रग्स, नशे वे बेरोजगारी पर बात करते थे। दुख होता था सुनकर। फिर एक दिन सोचा कि हम खुद क्यों नहीं बदलाव की बात करते और वापस आकर इस एनजीओ से जुड़ा।  जपिंदर सिंह, न्यूयॉर्क

 मैं लुधियाना के गवर्नमेंट स्मार्ट स्कूल से पढ़ा हूं। चाहता हूं कि अन्य शहरों के सरकारी स्कूलों में भी अच्छी शिक्षा के क्षेत्र में काम कर सकूं। इसलिए इससे जुड़ा।  सरमनदीप सिंह, लुधियाना

पंजाब में युवा ड्रग्स, मारपीट और नशे की तरफ ज्यादा बढ़ रहे हैं। चाहती हूं कि पंजाब में जाे बच्चे पढ़ना चाहते हैं उनकी बेसिक जरूरतों को पूरा कर सकूं, एजुकेशन गैप को फिल कर सकूं। इसलिए इस प्रोग्राम से जुड़ी हूं।  गुरलीन कौर, गुरदासपुर डिस्ट्रक्ट

 आज भी कई शहरों में लड़कियों को पढ़ने नहीं दिया जाता। बस इसलिए चाहती हूं कि गर्ल्स को पढ़ाऊं, ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और इससे अच्छा प्लेटफॉर्म अौर कोई मेरे लिए हो ही नहीं सकता था।  ज्योति चौहान, मुंबई

 मैं मालेरकोटला में आस वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन से जुड़ा, जो स्लम बच्चों को पढ़ाते हैं। उन्हें देखकर लगा कि आज भी एजुकेशन फील्ड में बहुत काम करने की जरूरत है। तभी यहां आ गया। चाहता हूं कि हर स्कूल में सुधार हो ताकि बच्चों को अच्छी एजुकेशन मिल सके।  मनप्रीत, मलेरकोटला

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