चंडीगढ़ के 13 परसेंट बालिग हैं मानसिक रोगी

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:20 AM IST

Chandigarh News - शहर की बालिग आबादी के 13 फीसदी लोग सामान्य मानसिक विकार से पीड़ित हैं। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के निदेशक...

Chandigarh News - 13 percent of adults in chandigarh are mentally ill
शहर की बालिग आबादी के 13 फीसदी लोग सामान्य मानसिक विकार से पीड़ित हैं। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के निदेशक प्रिंसिपल प्रो. बीएस चवन ने कहा कि राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2016 के अनुसार इस वर्ग की जनसंख्या के 1 फीसदी लोग गंभीर मानसिक बीमारी के शिकार हैं। इसमें सामान्य मानसिक विकारों में अवसाद, चिंता विकार, शराब व मादक द्रव्यों का सेवन, ओसीडी और तनाव से संबंधित समायोजन विकार शामिल हैं।

प्रो. चवन ने कहा कि करीब 80 फीसदी लोग इन विकारों का इलाज नहीं करवा रहे, इनमें से अधिकतर (50-70 फीसदी) को सामान्य या गंभीर परेशानी है। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (2017) के के तहत मानसिक स्वास्थ्य देखभाल व पुनर्वास किसी भी व्यक्ति का अधिकार है और वह अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा सकता है। संबंधित विभाग, स्वयं सेवी संस्था परिवर्तन के सहयोग से इन विकारों का उपचार उपलब्ध करवा रहा है। जो प्रभावित व्यक्ति बीच में ही उपचार छोड़ देते हैं या शारीरिक अक्षमता के कारण अस्पताल नहीं आ सकते, बेघर हैं या घुमंतू हैं, उनकी घर में देखभाल मुहैया करवाई जाती है।

प्रो. चवन मनोवैज्ञानिक पुनर्वास विषय पर बोल रहे थे। व्याख्यान का आयोजन जीएमसीएच-32 में वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ साइकॉलोजी रिहैबिलिटेशन की भारतीय शाखा के दो दिवसीय छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन पंजाब, हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जितेन्द्र चौहान ने किया। इस मौके पर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सी राम सुब्रमण्यम, उपाध्यक्ष डॉ मैथ्यू और संयोजन सचिव डॉ. नितिन गुप्ता मौजूद रहे।

पुनर्वास के लिए स्वदेशी और व्यवहारिक मॉडल पर फोकस

यह सम्मेलन शनिवार तक चलेगा। इसमें मनोरोग विशेषज्ञ, मनोविज्ञानी, समाजसेवी, मानसिक स्वास्थ्य नर्सें और मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत प्रशिक्षुओं समेत 250 लोग हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन का विषय पुनर्वास के लिए स्वदेशी और व्यवहारिक मॉडल, भविष्य के लिए फोकस है। प्रो. चवन ने कहा कि उनके कॉलेज, अस्पताल का मनोरोग चिकित्सा विभाग के पुनर्वास की दिशा में लगातार कार्यरत है और दिसंबर 2012 से डिसेबिलिटी असेसमेंट, रिहैबिलिटेशन एंड ट्राइएज (डार्ट) में पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध करवा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के प्रो. मोहन इस्साक, डब्लयूएपीआर(चंडीगढ़ चैप्टर) के अध्यक्ष सी रामासुब्रमण्यम ने अपने संबोधन में पुनर्वास के विभिन्न मॉडलों में सूचना प्रौद्योगिकी और टेलीमेडिसिन की योगदान भूमिका पर प्रकाश डाला।

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