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‘दी है परीक्षा कठिन यूं ही नहीं ताज-ए-हिंद’ कविता सुनाई

सिटी रिपोर्टर | चंडीगढ़ हिंदी पखवाड़ा की सेलिब्रेशन के अंतर्गत बुधवार को मनीमाजरा स्थित कलाग्राम में...

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2018, 02:05 AM IST
Chandigarh - ‘दी है परीक्षा कठिन यूं ही नहीं ताज-ए-हिंद’ कविता सुनाई
सिटी रिपोर्टर | चंडीगढ़

हिंदी पखवाड़ा की सेलिब्रेशन के अंतर्गत बुधवार को मनीमाजरा स्थित कलाग्राम में काव्यांजलि कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसे सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के निदेशक प्रो. सौभाग्य वर्धन ने आयोजित किया। उन्होंने हिंदी भाषा के जन्म, उसके विकास और मौजूदा स्थिति पर बात की। बाेले- भाषा साहित्य है और जब साहित्य की ग्रोथ होती है तो भाषा का विकास भी होता है। इसके बाद काव्यांजलि की शुरुआत हुई, जिसमें कई कवियों ने अपनी कविताएं पढ़ीं। सुनील बरालवी ने युगों-युगों से भारत की शान रही हिंदी भाषा कविता पढ़ी। तो पोएट राजन गरीब ने देवों ने भी बोली जो वो देवनागरी भाषा, सतनाम सिंह ने ई मातृभाषा हिंदी तुझे कोटि-कोटि नमन, उर्मिल कौशिक सखी ने हिंदी की खुशबू गजब निराली, नेहा ने जय हिंद जय हिंदी बोलें और हिंदी को अपनाएं, कृष्ण कांत ने मातृभूमि का कर्ज उतारना है तुम्हें, सुशील हसरत नरेलवी ने-दी है परीक्षा कठिन यूं ही नहीं ताज-ए-हिंद पढ़ी।

Kavi Sammelan

हिंदी पखवाड़ा की सेलिब्रेशन के अंतर्गत बुधवार को कलाग्राम में काव्यांजलि कार्यक्रम हुआ।

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